मानसून में बढ़ा खतरा… जानवरों से इंसानों में फैल रहीं ये जानलेवा बीमारियां!

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Rainy Season Diseases: जयपुर में बारिश के दौरान रामनिवास चौधरी ने जूनोटिक बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छता, टीकाकरण और घरेलू उपाय जैसे नीम, हल्दी, तुलसी की सलाह दी है.

जयपुर. मौजूदा बारिश के दौर में पशुओं और इंसानों के बीच संपर्क बढ़ने से संक्रामक जूनोटिक यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. समय पर देखभाल और उपचार नहीं होने पर ये बीमारियां खतरनाक साबित हो सकती हैं. पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि बारिश के समय ये बीमारियां सबसे अधिक फैलती हैं और सही समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमित मरीज की जान भी जा सकती है. ऐसे में सावधानी और रोकथाम बेहद जरूरी है.

पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने कहा कि बदलते मौसम में कच्चे दूध का सेवन न करें, बल्कि उसे उबालकर ही पिएं. पालतू पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण करवाएं. पशुपालन या सफाई कार्य के बाद हाथों को केवल मिट्टी से न धोएं, बल्कि साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग करें. पशुओं के मल, मूत्र और स्राव के सीधे संपर्क से बचें. काम के दौरान दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा साधनों का उपयोग करना जरूरी है.

वायरल जैसे लक्षण
पशु चिकित्सक ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी आमतौर पर चूहों से मनुष्य में फैलती है, जबकि बुसेलोसिस अन्य जानवरों के संपर्क से फैलती है. इन बीमारियों का खतरा खासकर उन लोगों को अधिक होता है जो पालतू जानवरों या मवेशियों के ज्यादा करीब रहते हैं. इसके लक्षण वायरल बुखार जैसे होते हैं. अचानक वजन कम होना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और लंबे समय तक बीमारी बने रहना इसके प्रमुख संकेत हैं. यही कारण है कि बीमारी को पहचानने में देर हो जाती है.

बचाव के लिए अपनाएं घरेलू नुस्खे
पशु चिकित्सक ने बताया कि इनसे बचाव के लिए स्वच्छता के साथ कुछ घरेलू उपाय भी कारगर हैं. नीम की पत्तियां जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और कीटाणु नष्ट होते हैं. हल्दी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, इसलिए हल्दी वाला दूध पीना फायदेमंद है. पशुओं के बाड़े में समय-समय पर फिटकरी का पानी छिड़कने से बैक्टीरिया और दुर्गंध से बचाव होता है. तुलसी और अदरक की चाय का सेवन भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है.

Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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