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आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में दिमाग पर लगातार दबाव रहता है. नींद की कमी, भूलने की आदत और ध्यान भटकना आम समस्याएं बन गई हैं. ऐसे में कोलीन, जिसे वैज्ञानिक ‘मेमोरी विटामिन’ कहते हैं, दिमाग को जरूरी पोषण देता है और उसकी सेहत को बनाए रखने में मदद करता है.
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर नींद की कमी, उदासी, चिड़चिड़ापन और भूलने की आदतों से परेशान रहते हैं. ये लक्षण मजाक नहीं बल्कि दिमागी सेहत बिगड़ने के संकेत हैं. जिस तरह शरीर को प्रोटीन, आयरन और विटामिन की जरूरत होती है, उसी तरह दिमाग को भी पोषण की आवश्यकता होती है. इस पोषण का सबसे अहम हिस्सा है कोलीन, जिसे वैज्ञानिक अब ‘मेमोरी विटामिन’ के नाम से जानते हैं.

न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, कोलीन दिमाग की कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है. यह याददाश्त को मजबूत करता है, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाता है और सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है. यही कारण है कि इसे ‘मेमोरी विटामिन’ कहा जाता है.

एक स्टडी में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं ने पर्याप्त कोलीन का सेवन किया, उनके बच्चों ने 7 साल की उम्र में मेमोरी और समझने के टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन किया. इसका मतलब है कि गर्भ में मां की ओर से लिया गया कोलीन बच्चे के दिमाग को जीवनभर स्मार्ट बना सकता है.
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एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिमाग की सेहत और याददाश्त को मजबूत रखने के लिए सामान्य महिलाओं को रोजाना 425 मिलीग्राम और पुरुषों को 550 मिलीग्राम कोलीन का सेवन करना चाहिए.

कोलीन के बेहतरीन स्रोतों में अंडे की जर्दी, चिकन, मछली, दूध, दही, पनीर, सोयाबीन, एडामे, ब्रोकली, शिटाके मशरूम, मूंगफली, क्विनोआ, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, राजमा और छोले शामिल हैं. इन्हें नियमित आहार में शामिल करने से दिमाग को जरूरी पोषण मिलता है.

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि दुनिया की लगभग 90 प्रतिशत आबादी रोजाना कोलीन की जरूरत पूरी नहीं कर पाती. यानी ज्यादातर लोग अपने दिमाग को उसका सबसे जरूरी पोषण नहीं दे रहे हैं. इसका असर मानसिक थकान, ध्यान की कमी और भूलने की आदतों के रूप में सामने आता है.

दिमागी सेहत को मजबूत रखने के लिए कोलीन को आहार में शामिल करना बेहद जरूरी है. चाहे आप छात्र हों, प्रोफेशनल हों या गर्भवती महिला, ‘मेमोरी विटामिन’ आपके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है. सही खानपान और संतुलित पोषण से ही दिमाग को उसका असली ईंधन मिलता है.