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Winter Safety Tips: ठंड से बचने के लिए लोग बंद कमरों में हीटर, अंगीठी और गैस गीजर का इस्तेमाल करने लगते हैं. इससे बाहर की ठिठुरन से राहत तो मिल जाती है. लेकिन यही आराम कई बार जानलेवा भी बन जाता है. खामोश दुश्मन यानी कार्बन मोनोऑक्साइड गैस, जो बिना चेतावनी शरीर पर हमला कर देती है. डॉक्टरों का कहना है कि बंद कमरे में इन उपकरणों का लंबे समय तक उपयोग जानलेवा भी हो सकता है.
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बड़ी खतरनाक होती हैं, जो न तो दिखाई देती है और न ही इसकी कोई गंध होती है. यही वजह है कि, लोग इसके खतरे को समय रहते समझ नहीं पाते है. जब तक शरीर पर इसके असर के लक्षण सामने आते हैं, तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है. इसको एक्सपर्ट साइलेंट किलर के रूप में मानते हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गैस सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर खून में मौजूद हीमोग्लोबिन से तेजी से चिपक जाती है. इससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना कम हो सकता है. ऑक्सीजन की कमी सीधे दिमाग, दिल और फेफड़ों को प्रभावित कर सकती है, जिससे खतरा कई गुना अधिक हो जाता है.

कार्बन मोनोऑक्साइड के असर से सबसे पहले सिरदर्द, चक्कर, मतली, उलझन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. कई लोगों को अचानक अत्यधिक नींद या घबराहट महसूस होती है. अगर समय रहते इलाज न मिले, तो व्यक्ति बेहोश तक हो सकता है और जान जाने का खतरा भी बन सकता है.
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बलिया के फेमस फिजिशियन डॉ रितेश सोनी के मुताबिक, बंद कमरे में अंगीठी या कोयले से जलने वाले हीटर का इस्तेमाल करना सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खराब या बिना वेंटिलेशन वाले गैस गीजर भी जानलेवा साबित हो सकते हैं. इस स्थिति में रात को दरवाजे-खिड़कियां बंद कर सोना भी खतरे को और बढ़ा देता है.

हालांकि, जब कमरे में हवा के निकलने का रास्ता नहीं होता है, तो कार्बन मोनोऑक्साइड बाहर नहीं जाती और उसी कमरे में जमा हो जाती है. धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ती जाती है और सोता हुआ व्यक्ति बिना कुछ समझे इसकी चपेट में आ जाता है. कई हादसे इसी के कारण हो जाते हैं.

हीटर और गैस गीजर का प्रयोग हमेशा हवादार कमरे में करें. सोते समय अंगीठी या कोयले से जलने वाले उपकरण बिल्कुल न रखें. गैस गीजर की नियमित जांच जरूर करनी चाहिए. अगर अचानक सिरदर्द या घबराहट हो, तो तुरंत बाहर खुली हवा में जाना चाहिए.

ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव तो जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी सुरक्षा है. थोड़ी सी लापरवाही ज्यादा भारी पड़ सकती है. सही जानकारी, सही उपकरण और सतर्कता ही इस खामोश खतरे से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है. ध्यान रखें कि, जागरूकता ही जिंदगी की सबसे मजबूत उपाय हैं.