ईरान अब सर्वोच्च धार्मिक नेता मोजतबा खामनेई हैं, जिन्होंने अपने पिता औऱ दूसरे अयातुल्लाह के निधन होने के बाद सत्ता की दौड़ में अपनी गोटियां एकदम सही जगह बिठाईं. अब वह ईरान के तीसरे अयातुल्ला हैं. क्या आपको मालूम है कि ईरान के पहले सर्वोच्च धार्मिक नेता यानि पहले अयातुल्लाह का परिवार कहां और किस स्थिति में है. ईरान में आमतौर पर कहा जाता है कि दूसरे सर्वोच्च धार्मिक नेता खामनेई और उनके बेटे ने पहले अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के परिवार को किनारे लगाते करीब महत्वहीन कर दिया.
ऐसा नहीं है कि ईरान में लोग पहले अयातुल्ला के परिवार को अब जानते नहीं या इज्जत नहीं देते लेकिन आमतौर पर माना जाता है कि उस परिवार को पॉवर की दौड़ में बरसों पहले ही ठिकाने लगाया जा चुका है. पहले अयातुल्लाह के पोते और बेटी को सुधारवादी होने के साथ खामनेई का आलोचक भी कहा जाता है.
वैसे खामनेई के निधन के साथ ही जब नए नेतृत्व का चयन होना था, तब पहले अयातुल्लाह खुमैनी का परिवार फिर चर्चाओं में आया. कुछ लोगों ने उन्हें इस दौड़ में शामिल करने की कोशिश की लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो सका.
खामनेई ने खुमैनी परिवार के असर को खत्म कर दिया
ईरान के इतिहास और वर्तमान राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके करीबियों ने धीरे-धीरे सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए खुमैनी परिवार के राजनीतिक प्रभाव को सीमित करने की कोशिश की है.
अयातुल्लाह अली खामनेई के साथ सबसे दाएं हसन खुमैनी, जो पहले अयातुल्लाह खुमैनी के पोते हैं और अक्सर खामनेई के खिलाफ मुखर रहते रहे हैं. (विकीकामंस)
पोते हसन खुमैनी सुधारवादियों के करीब
अयातुल्लाह खुमैनी का परिवार विशेष रूप से उनके पोते हसन खुमैनी वैचारिक रूप से ‘सुधारवादियों’ के करीब माने जाते हैं. वे नागरिक अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता की अधिक बात करते हैं. इसके विपरीत अली खामेनेई और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई कट्टरपंथी और सुरक्षा-केंद्रित विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं.
2016 में जब हसन खुमैनी ने ‘विशेषज्ञों की परिषद’ के लिए चुनाव लड़ने की कोशिश की, तो ‘गार्जियन काउंसिल’, जो खामेनेई के प्रति वफादार है, ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया. यह एक बड़ा संकेत था कि शासन खुमैनी के वंशजों को वास्तविक निर्णय लेने वाली संस्थाओं से दूर रखना चाहता है.
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी हमले में मारे गए अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का कद काफी बढ़ा. उन्हें सियासत और पर्दे के पीछे सत्ता के मोहरों को सही जगह रखने का भी महारथी माना जाता रहा है. अब तो मोजतबा खैर ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता बन गये हैं यानि ईरान की सारी ताकत उनकी मुट्ठियों में होगी.
ये हैं हसन खुमैनी, ईरान के पहले अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के पोते. वह ईरान में चर्चित रहते हैं. उन्हें सुधारवादी के तौर पर जाना जाता है.
अब क्या भूमिका खुमैनी परिवार की
वर्तमान व्यवस्था में खुमैनी परिवार को केवल उनके दादा के मकबरे के संरक्षक और ‘क्रांति के प्रतीक’ के रूप में सम्मान दिया जाता है, लेकिन देश की सैन्य, न्यायिक या परमाणु नीतियों जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं रह गई है.
हसन खुमैनी ने कई बार शासन की सख्त नीतियों की दबी जुबान में आलोचना की है, जिससे उनके और वर्तमान नेतृत्व के बीच दूरियां और बढ़ गईं.
ये एक प्रकार का ऐसा ‘सत्ता संघर्ष’ रहा, जहां नई लीडरशिप ने पुरानी लीडरशिप के वंशजों को सम्मान तो दिया, लेकिन उन्हें सत्ता के गलियारों से प्रभावी ढंग से बाहर रखा ताकि उनके नेतृत्व को कोई चुनौती न मिल सके.
बहुत सालों पहले का ये चित्र ईरान के पहले अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के परिवार का है. इसमें बाएं से दाएं में पहले नंबर पर उनके पोते अली इशरागी हैं, दूसरे नंबर पर अयातुल्लाह रुहोल्लाह, तीसरे नंबर पर पोते हसन खुमैनी और सबसे दाएं उनके बेटे अहमद हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है
हसन खुमैनी पहले अयातुल्लाह रहे रुहोल्लाह खुमैनी के परिवार का प्रमुख चेहरा हैं. वह उनके पोते हैं. वह तेहरान के दक्षिण में स्थित अपने दादा रुहोल्लाह खुमैनी के विशाल मकबरे के संरक्षक हैं. ये रुहोल्लाह ही थे, जिनकी अगुवाई में ईऱान में इस्लामी क्रांति हुई. शाह रजा को ईरान से भागना पड़ा. फिर रुहोल्लाह वहां के सर्वेसर्वा बने. ईरान में मौजूदा शासन उन्हीं के जरिए आया.
अभी फिर उभरा खुमैनी के पोते का नाम
हसन खुमैनी को ईरान के ‘सुधारवादी’ गुट के करीब माना जाता है. हालांकि वे एक मध्य-स्तर के मौलवी हैं. हाल ही में अयातुल्लाह खामेनेई के निधन के बाद उनका नाम अगले ‘सुप्रीम लीडर’ के संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में उभरा था. कट्टरपंथियों ने अक्सर उनके राजनीतिक उभार को रोकने की कोशिश की. हालांकि वह आज भी जनता और सुधारवादी नेताओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं.
बेटी महिला अधिकारों की पैरोकार
ज़हरा मुस्तफ़वी खुमैनी पहले अयातुल्लाह की बेटी हैं. वो आज भी सक्रिय हैं.वह तेहरान विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की प्रोफेसर रही हैं और एसोसिएशन ऑफ द वूमन ऑफ द इस्लामिक रिपब्लिक यानि महिला संघ की महासचिव हैं.
वो फिलिस्तीनी हितों की प्रबल समर्थक रही हैं. ईरान की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की वकालत करती हैं. हालांकि वो अपने पिता के वैचारिक आदर्शों के प्रति वफादार हैं, लेकिन समय-समय पर उन्होंने सुधारवादी उम्मीदवारों जैसे 2009 में मीर-होसैन मौसवी का समर्थन किया है.
तो अब बिना शक्ति का है खुमैनी परिवार
खुमैनी के दो बेटे थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है. पहले बेटे मुस्तफ़ा खुमैनी की मृत्यु क्रांति से पहले 1977 में ही हो गई थी. दूसरे बेटे अहमद खुमैनी अपने पिता के दाहिने हाथ माने जाते थे, 1995 में उनका निधन हुआ. हसन खुमैनी इन्हीं के पुत्र हैं.
खुमैनी परिवार के पास अब ‘प्रशासनिक’ शक्ति कम और ‘प्रतीकात्मक’ शक्ति ज्यादा है. वे क्रांति की विरासत के संरक्षक माने जाते हैं. परिवार के कई सदस्य जैसे हसन खुमैनी अक्सर वर्तमान शासन की सख्त नीतियों की आलोचना करते रहे हैं. अधिक सामाजिक स्वतंत्रता और सुधारों की बात करते हैं.
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