टीकमगढ़ में गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के बैनर तले सवर्ण समाज ने यूजीसी बिल के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर कपड़े उतारकर विरोध जताया। केंद्र सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए नगर में रैली निकाली। इसके बाद एसडीएम कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम एसडीएम संजय दुबे को ज्ञापन सौंपा। राम रतन दीक्षित ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही इस ‘काले कानून’ को वापस नहीं लेती है, तो टीकमगढ़ सहित पूरे प्रदेश और देश में सवर्ण समाज उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा। सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति का ध्यान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से जारी ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस गाइडलाइंस 2026’ की ओर आकर्षित किया गया। इसमें कहा गया कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को रोकना है, लेकिन इनके वर्तमान स्वरूप में कई प्रावधान सामान्य (सवर्ण) वर्ग के छात्रों के लिए भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण प्रतीत होते हैं। यूजीसी बिल को बताया काला कानून ज्ञापन में बताया गया कि नए नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा का अभाव है। फरवरी 2025 के ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ दंड का प्रावधान था, लेकिन फाइनल रूल्स 2026 से इस प्रावधान को हटा दिया गया है। सुरक्षा उपायों के हटने से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ इन नियमों के दुरुपयोग की प्रबल संभावना है, क्योंकि शिकायतकर्ता को अपनी पहचान बताए बिना भी शिकायत करने की छूट दी गई है। राष्ट्रपति से यूजीसी बिल को तत्काल वापस लेने की मांग इक्विटी कमेटी में प्रतिनिधित्व की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। संस्थानों में न्याय निर्णय के लिए गठित ‘इक्विटी कमेटी’ में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिलाएं और दिव्यांगजनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, लेकिन इसमें सामान्य वर्ग का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं किया गया है। इससे यदि किसी सामान्य वर्ग के छात्र के साथ भेदभाव होता है, तो उसकी बात सुनने वाला कमेटी में कोई नहीं होगा। संगठन और सवर्ण समाज के लोगों ने राष्ट्रपति से यूजीसी बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की है। .