इंदौर कृषि कॉलेज में नौ साल पहले का घोटाला सामने आया है। कॉलेज को 2016 में ICAR (इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च) ने ट्राइबल सब प्लान (TSP) के तहत 1.34 करोड़ रु. दिए थे। कॉलेज ने ये रकम मात्र तीन दिनों में खर्च कर दी।
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किसानों में जागरुकता के लिए न ठीक से शिविर लगे और न ही उन्हें उपकरण दिए गए। पहली जांच में जिम्मेदार दोषी पाए गए, लेकिन रिपोर्ट ही राजभवन नहीं पहुंची। कई रिमाइंडर के बाद दूसरी जांच कराई, जिसमें सभी निर्दोष ठहरा दिए गए।
प्रोजेक्ट के तहत किसानों को 9 कड़कनाथ मुर्गी पालन हेचरीज यूनिट और 81 वर्मी कंपोस्ट पिट लगाई जाना थी। 54 आदिवासी किसान प्रशिक्षण भी होना थे। दो साल की समय सीमा थी, लेकिन किसानों को न तो हेचरी मिली और न ही वर्मी कंपोस्ट पिट।
कागजों में 3 दिन में 6 प्रशिक्षण का आयोजन कर 1.34 करोड़ का खर्च दिखा दिया। शिकायत राजभवन तक गई, जिसमें कॉलेज की पूर्व डीन मृदुला बिल्लौरे, परियोजना समन्वयक धार व झाबुआ पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।
दूसरी कमेटी ने ग्वालियर में बैठकर ही कर ली जांच
पहली- 54 की जगह 6 शिविर
- चार सदस्यीय कमेटी ने पाया हेचरी और वर्मी कंपोस्ट पिट के लिए 38 लाख स्वीकृत किए गए थे, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।
- बिना स्वीकृति 10 लाख 32 हजार की प्रचार सामग्री खरीदी गई, लेकिन भावसूची या चालान की प्रति रसीद नहीं मिली।
- प्रशिक्षण के लिए 2200 किट खरीदी, इनका पेमेंट झाबुआ से हुआ, लेकिन दर्ज इंदौर कॉलेज की स्टॉक सूची में किया गया।
- 24.30 लाख में 54 प्रशिक्षण शिविर लगाने थे, ये मात्र तीन दिनों में 6 शिविर में ही खर्च कर दिए गए।
दूसरी रिपोर्ट में कोई गड़बड़ नहीं
- 2 प्रशिक्षण हर साल 27 गांवों के लिए अनुमोदित थे, 2 कार्यक्रम अलग-अलग दिनों में 27 गांवों के लिए आयोजित किए।
- म.प्र माध्यम भी सराकरी उपक्रम है, इसलिए उससे खरीदारी अनियमित्ता नहीं।
- परियोजना समन्वयक के प्रस्ताव पर डीन ने 38 लाख बैंक ट्रांसफर किए।
- एक दिनी प्रशिक्षण 27 गांवों के लिए और दो प्रशिक्षण 27 गांवों के लिए आदेशित थे। दोनों के बीच अंतर रखने का साफ आदेश नहीं था। कार्यक्रम के लिए राशि केवीके धार-झाबुआ-अलीराजपुरको उपलब्ध कराई गई। खर्च के सभी दस्तावेज दिए गए।
जिम्मेदारों को बचाने दूसरी जांच की गई
– बी.एस. बघेल, अध्यक्ष (रिटा. निदेशक RVSKVV) क्या गड़बड़ी पाई गई? – जो काम बताए गए वे मौके पर हुए ही नहीं। इसका क्या आधार है? – जांच करने तीनों जिले धार, झाबुआ, आलीराजपुर गए थे। मौके पर क्या मिला ? – कोई भी हेचरी और वर्मी कंपोस्ट पीट नहीं मिले थे। दो बार जांच क्यों? – लोगों को बचाने के लिए दूसरी बार जांच की गई थी।
मौके पर नहीं गए सिर्फ दस्तावेज देखे
– डॉ. एस. एस. शॉ, (रिटा.निदेशक, इंदिरा गांधी कृषि यूनि. रायपुर) रिपोर्ट में क्या पाया? – हम रिपोर्ट सब्मिट कर चुके हैं। अब इतना याद नहीं। दूसरी जांच क्यों कराई ? – पहली कमेटी से हमारा कोई सरोकार नहीं था। क्लीन चिट का आधार? – हमने सभी दस्तावेजों के आधार पर जांच की थी। क्या मौके पर गए थे? – ग्राउंड पर जांच नहीं की थी, सिर्फ दस्तावेज देखे।
सीधी बात – मृदुला बिल्लौरे, पूर्व डीन, कृषि कॉलेज
जांच हो गई है, आपको जो पता करना है कर लो ICAR KS TSP प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी हुई थी – बहुत शिकायत हुई थी, जांच में कुछ भी नहीं पाया गया। इस मामले क्या शिकायतें थीं ? – आपको इस पूरे मामले में क्या करना है? रजिस्ट्रार ऑफिस से पता कर लो। कुछ निकालना हो उसमें निकाल लो। 1.34 करोड़ की आर्थिक अनियमितता की शिकायत थी – 1.34 करोड़ रुपए क्या खा गए हम? जांच हो गई है। आपको जो पता करना है पता कर लो।
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