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Khassi meat vs Bakra meat: पटना में खस्सी और बकरे के मीट की पहचान मुश्किल होती है. डॉ. रोहित कुमार जायसवाल ने बताया कि खस्सी में टेस्टिकल नहीं होता और इसका मीट अधिक होता है. गंध और फ्लेवर से भी पहचान की जा सकती…और पढ़ें
पटना: अगर आप मीट खाने के शौकीन हैं, तो आपने जरूर सोचा होगा कि दुकानदार ने जो मीट दिया है, वह खस्सी का है, बकरे का या बकरी का तो नहीं. आमतौर पर खस्सी का मीट सबसे स्वादिष्ट माना जाता है. इसलिए इसकी डिमांड ज्यादा होती है, लेकिन बकरे और खस्सी के मीट में समानता के कारण दोनों के बीच फर्क करना मुश्किल होता है. इसी कारण दुकानदार खस्सी का बोलकर बकरे या बकरी का मीट भी दे देते हैं.
खस्सी और बकरे के मीट की पहचान
लोकल 18 ने इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के लाइफस्टॉक प्रोडक्ट्स टेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोहित कुमार जायसवाल से बातचीत की. डॉ. जायसवाल ने बताया कि आम लोगों के लिए मीट की पहचान करना आसान नहीं है, लेकिन कुछ खास बातों पर ध्यान देकर खस्सी और बकरे के मीट की पहचान की जा सकती है.
दुकान पर पहचान करने का तरीका
डॉ. रोहित कुमार जायसवाल ने बताया कि खस्सी का बाध्यकरण किया जाता है. इसलिए दुकान पर खस्सी का मीट लेते समय यह देखें कि टेस्टिकल (अंडकोष) मौजूद है या नहीं. अगर टेस्टिकल नहीं है तो यह खस्सी का मीट है. अगर कोई दुकानदार कहता है कि टेस्टिकल वाला मीट खस्सी का है तो वह गलत है. क्योंकि खस्सी में टेस्टिकल होता ही नहीं है. खस्सी के मीट में मांस अधिक और हड्डी कम होती है. जबकि बकरे में हड्डी ज्यादा और मीट कम होता है. बकरी में हड्डी बहुत ज्यादा होती है.
स्वाद और गंध से पहचान
डॉ. जायसवाल के अनुसार, अनुभवी मांसाहारी लोग फ्लेवर के आधार पर पहचान कर लेते हैं कि मीट खस्सी का है या बकरे का. अगर मीट में तेज गंध (गोटी स्मेल) है तो यह बकरे का मीट होता है. वहीं, अगर गंध हल्की है और फ्लेवर तीव्र नहीं है तो यह खस्सी का मीट होगा.
फ्लेवर प्रोफाइल से पहचान
फ्लेवर यानी मीट का स्वाद और गंध का संयोजन होता है. पहले मीट को गहराई से सूंघें और फिर स्वाद लें. अगर फ्लेवर बहुत तेज लगे तो यह बकरे का है, लेकिन अगर फ्लेवर स्मूद और हल्का है तो यह खस्सी का मीट है.
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