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Chhatarpur News: चरवाहे के पास जितनी बकरियां थीं, उसने उन सभी बकरियों का दूध कुंड में डाल दिया लेकिन इसके बाद भी कुंड नहीं भरा. वह अपने परिवार और रिश्तेदारों की सभी बकरियों का दूध लेकर आया लेकिन तब भी कुंड को नहीं भर पाया.
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक ऐसा भी गांव हैं, जहां भेड़-बकरी पालने वाले लोग नहीं रह सकते हैं. दरअसल छतरपुर जिले के लवकुश नगर में लगभग 300 साल पहले पाल समाज को गांव की माता ने श्राप दे दिया था. जिसके चलते आज भी इस गांव में पाल समाज के लोग नहीं रहते हैं. लवकुश नगर के रहने वाले राजेंद्र देव सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि आज से करीब 300 साल पहले जंगल वाली पहाड़ी में एक चरवाहा अपनी बकरियों को चरा रहा था. चरवाहे को पता चला कि इस पहाड़ी पर एक छोटा सा कुंड है, जिसे लोग जल से भर नहीं पा रहे हैं. इसके बाद पाल समाज का यह चरवाहा उस कुंड को अच्छे से साफ करता है और सभी के सामने कहता है कि आप लोग इस कुंड को जल से नहीं भर पा रहे हैं लेकिन वह इस कुंड को दूध से भर देगा.
इतिहासकार डॉ काशी प्रसाद त्रिपाठी की बुंदेलखंड का वृहद इतिहास के अनुसार स्वप्न मिलने पर तत्कालीन पन्ना महाराज हिंदूपत ने 1758-76 ईस्वी के मध्य चमत्कारिक कुंड स्थान में माता बंबरबेनी का निर्माण कराया था.
मां ने दिया राजा को स्वप्न
वहीं पुजारी बृजेश शर्मा लोकल 18 को बताते हैं कि इस कुंड में मां सीता अपनी गोद में लव और कुश को लिए दिखती हैं. यह वह चमत्कारिक कुंड है, जिसे पाल समाज के एक व्यक्ति ने दूध से भरने का प्रयास किया था लेकिन घमंड आने की वजह से यह कुंड नहीं भर पाया और मां ने उस समय के राजा को सपना दिया कि मेरे खेरे में या मेरे मौजा में यहां कोई भी पाल समाज का व्यक्ति नहीं रहेगा. इसके बाद यहां से पाल समाज के लोग विस्थापित होने लगे क्योंकि उन्हें दिक्कतें होने लगी थीं.
स्थायी रहने पर होती हैं दिक्कतें
स्थानीय निवासी जगदीश नामदेव लोकल 18 को बताते हैं कि आज भी इस खेरी में या इस मौजा में कोई भी पाल समाज का व्यक्ति स्थायी तौर पर नहीं रहता है. साथ ही बकरी पालक भी नहीं रह सकता है. अगर रहता है, तो उसे कष्ट होने लगते हैं, जिसकी वजह से यहां पाल समाज के व्यक्ति नहीं रहते हैं. उनका वंश नाश होने लगता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
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