Shivpuri News: शिवपुरी में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अब छोटे बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा निशाने पर हैं. हाल ही में शिवपुरी शहर में एक तीन साल के मासूम बच्चे पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया. कुत्ते ने बच्चे को करीब आठ जगह काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज किया गया है. बच्चे की हालत देखकर परिवार के सदस्य चिंतित हैं.
अगर शिवपुरी जिले के पूरे साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक है. जिला अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, हर दिन औसतन 10 से ज्यादा लोग आवारा कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं. साल भर में यह संख्या करीब 4000 तक पहुंच चुकी है. इसके बावजूद न तो कुत्तों की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण हो पा रहा है और न ही लोगों में पर्याप्त जागरूकता दिखाई दे रही है.
मीट मार्केट से रात में निकलना खतरे से खाली नहीं
शिवपुरी का मीट मार्केट इलाका रात के समय लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है. रात 10 से 11 बजे के बीच अगर कोई व्यक्ति इस इलाके से गुजरता है तो उसे खास सतर्कता बरतनी पड़ती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां आवारा कुत्तों का झुंड सड़क किनारे बैठकर इंसानों के निकलने का इंतजार करता है. जैसे ही कोई दोपहिया या पैदल राहगीर दिखाई देता है, कुत्ते उसके पीछे दौड़ पड़ते हैं. कई बार कुत्ते चारों तरफ से घेर लेते हैं, जिससे लोगों की सांसें अटक जाती हैं. डर के कारण कई लोग गिर भी चुके हैं और चोटिल हो गए हैं.
इनकम टैक्स ऑफिस के बाहर भी हालात खराब
मीट मार्केट ही नहीं, बल्कि इनकम टैक्स ऑफिस के बाहर का इलाका भी रात के समय आवारा कुत्तों के आतंक के लिए जाना जा रहा है. यहां खड़े कुत्ते राहगीरों और वाहन चालकों का पीछा करने लगते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जान बचाने के लिए तेज रफ्तार में वाहन निकालना पड़ता है, जिससे हादसे की आशंका भी बनी रहती है.
जिला अस्पताल के आंकड़े कर रहे परेशान
शिवपुरी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बीएल यादव ने बताया, जिले में एक साल के भीतर करीब 4000 लोगों को कुत्तों ने काटा है. यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है. उन्होंने कहा, लोगों को समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने की जरूरत है, साथ ही आवारा कुत्तों के वैक्सीनेशन और नसबंदी पर भी जोर दिया जाना चाहिए. डॉक्टरों के अनुसार, कई लोग लापरवाही बरतते हैं और समय पर इलाज नहीं कराते, जिससे खतरा और बढ़ जाता है.
कार्रवाई की मांग
शिवपुरी के नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका सिर्फ कागजी कार्रवाई कर रही है, न तो कुत्तों की संख्या कम हो रही है और न ही रात के समय सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं. लोगों ने प्रशासन से मांग की कि आवारा कुत्तों के लिए ठोस नीति बनाई जाए, नियमित नसबंदी और वैक्सीनेशन कराया जाए और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि किसी और मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े.
आवारा कुत्तों के खतरे की गंभीरता दतिया की हालिया घटना से और साफ हो जाती है. दतिया के सपा पहाड़ क्षेत्र में 6 साल के हंस प्रजापति को आवारा कुत्ते ने सिर, गर्दन और हाथ पर काट लिया था. जिला अस्पताल में उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन की तीन डोज, टिटनेस और इम्युनोग्लोबिन लगाया गया, लेकिन अंतिम डोज बाकी रहने के दौरान ही बच्चे में रेबीज के लक्षण उभर आए. 25 दिन बाद बच्चे की मौत हो गई. पूरी घटना पढ़ें…
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