Why People Seek Astrology For Relationships: रिश्तों को लेकर लोगों की सोच देश और समाज के हिसाब से बदलती है, लेकिन एक बात साफ है कि प्यार, शादी और रिश्तों से जुड़े सवाल हर जगह लोगों की प्राथमिकता में हैं. हाल ही में Astrotalk के डेटा से यह बात सामने आई है, जिसमें अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 1.2 करोड़ से ज्यादा कंसल्टेशन का एनालिसिस किया गया. डेटा के मुताबिक, भारत में ज्यादातर लोग ज्योतिषियों से अपने विवाह को लेकर सवाल पूछते हैं। यहां करीब 25 प्रतिशत कंसल्टेशन शादी और रिश्तों से जुड़े होते हैं, जिनमें लोग जानना चाहते हैं कि उनकी शादी कब होगी, किससे होगी और आगे का रिश्ता कैसा रहेगा. यह दिखाता है कि भारतीय समाज में शादी आज भी जीवन का एक अहम पड़ाव मानी जाती है.
अमेरिका को लेकर डेटा अलग
भारत से इतर अमेरिका में तस्वीर थोड़ी अलग है. वहां 33 प्रतिशत कंसल्टेशन रिश्तों से जुड़े जरूर हैं, लेकिन फोकस शादी से ज्यादा रिलेशनशिप की क्वालिटी पर होता है. लोग यह जानना चाहते हैं कि उनका पार्टनर कितना कम्पैटिबल है, रिश्ते को कैसे बेहतर बनाया जाए, परिवार की प्लानिंग कैसी हो या ब्रेकअप के बाद क्या दोबारा साथ आ सकते हैं. इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि जहां भारत में शादी केंद्र में है, वहीं अमेरिका में रिश्ते को एक व्यापक रूप में देखा जाता है, जो शादी तक सीमित नहीं है. हालांकि एक दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों देशों में कुल रेवेन्यू का 29 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रिश्तों और शादी से जुड़े सवालों से आता है, यानी रिश्ते हर जगह लोगों की सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं.
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करियर को लेकर भी सवाल
रिलेशनशिप के अलावा भारत में करियर और बिजनेस से जुड़े सवाल भी काफी पूछे जाते हैं, जो लगभग 18 प्रतिशत कंसल्टेशन का हिस्सा हैं. वहीं अमेरिका में करियर के साथ-साथ फाइनेंशियल प्लानिंग और निवेश को लेकर ज्यादा दिलचस्पी दिखाई देती है. डिजिटल दौर में भी लोग पारंपरिक ज्योतिष पर भरोसा कर रहे हैं. कुंडली, ग्रहों की चाल और ज्योतिषीय सलाह अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए आसानी से उपलब्ध हो रही है. Astrotalk के फाउंडर और CEO पुनीत गुप्ता के अनुसार, लोग अनिश्चितता के समय में भरोसेमंद सिस्टम की ओर लौटते हैं और टेक्नोलॉजी ने इन सेवाओं को और आसान बना दिया है. अब लोग दुनिया के किसी भी कोने से अपनी निजी समस्याओं, खासकर रिश्तों को लेकर सलाह ले रहे हैं. भले ही समय और तकनीक भले बदल गई हो, लेकिन रिश्तों को समझने और संभालने की जरूरत आज भी उतनी ही गहरी है.
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