4 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी
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हमारे घर में कई ऐसी चीजें होती हैं, जो देखने में सुंदर लगती हैं, लेकिन सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। हाल ही में हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेनिंग ले चुके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने तीन घरेलू चीजों के बारे में चेतावनी दी है।
उन्होंने बताया कि सुगंधित मोमबत्तियां कितनी खतरनाक हैं। पूरी दुनिया में हर साल करोड़ों लोग सुगंधित मोमबत्तियां जलाते हैं। इनमें कई लोगों ने सिरदर्द, सांस में तकलीफ और अन्य शिकायतें की हैं।
भारत में भी ये मोमबत्तियां बहुत पॉपुलर हैं। इनमें मौजूद थैलेट्स जैसे केमिकल्स एंडोक्राइन डिसरप्टर्स होते हैं, जो हॉर्मोन सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम सेंटेंड कैंडल्स की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- ये सेहत के लिए क्यों हानिकारक हैं?
- किन लोगों को सबसे ज्यादा रिस्क है?
- इसके सुरक्षित विकल्प क्या हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. आशुतोष तिवारी, सीनियर कंसल्टेंट, क्रिटिकल केयर, रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर
25% लोगों को सेंटेड कैंडल्स से हुई समस्या
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, साल 2023 में सेंटेड कैंडल्स इस्तेमाल करने वाले 24.8% लोगों ने स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की। भारत में हर साल लाखों मोमबत्तियां बिकती हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इनमें मौजूद खरनाक केमिकल्स के बारे में नहीं जानते हैं।
ये मोमबत्तियां जलने पर वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) और थैलेट्स छोड़ती हैं, जो हवा में घुलकर फेफड़ों और खून में पहुंच जाते हैं। इससे हॉर्मोन असंतुलन, सांस की दिक्कत और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

सवाल: सेंटेड कैंडल्स से क्या समस्याएं होती है?
जवाब: सुगंधित मोमबत्तियों से तरह-तरह के फ्रैगरेंस आते हैं, कभी वेनिला, कभी लैवेंडर या कभी सिनेमन की खुशबू आती है। ये घर सुगंधित करने के लिए इस्तेमाल होती हैं, लेकिन समस्या इनमें इस्तेमाल होने वाली सिंथेटिक खुशबू और पैराफिन वैक्स में है। ये मोमबत्तियां जलने पर थैलेट्स नामक केमिकल्स छोड़ती हैं, जो एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) हैं। ये हमारे शरीर के हॉर्मोन सिस्टम को असंतुलित कर देते हैं।
सवाल: थैलेट्स क्या हैं और ये हानिकारक क्यों हैं?
जवाब: थैलेट्स एक तरह का केमिकल है, जो प्लास्टिक और खुशबू वाले प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होता है। ये मोमबत्तियों में खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए डाले जाते हैं। ये हॉर्मोन्स की नकल करते हैं या उन्हें रिलीज होने से रोकते हैं। इससे शरीर का नेचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है।
अगर आप रोजाना ऐसी मोमबत्तियां जलाते हैं, तो ये केमिकल्स आपके खून में जमा हो सकते हैं और थायरॉइड, इंसुलिन जैसे हॉर्मोन्स को प्रभावित कर सकते हैं। ये केमिकल्स फेफड़ों, लिवर और प्रजनन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। ये इतने छिपे हुए खतरे हैं कि लोग सोचते हैं मोमबत्ती तो बस खुशबू दे रही है, लेकिन असल में वो सेहत को नुकसान पहुंचा रही है।

सवाल: प्रेग्नेंसी में सुगंधित मोमबत्तियां क्यों खतरनाक हैं?
जवाब: गर्भावस्था में महिलाओं का शरीर पहले से ही हॉर्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है। थैलेट्स गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव, प्रीक्लेम्प्सिया या यहां तक कि स्टिलबर्थ का रिस्क बढ़ा सकते हैं। ये केमिकल्स प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंच जाते हैं और विकास को प्रभावित करते हैं। सोचिए, आप घर को अच्छा बनाने के लिए मोमबत्ती जलाती हैं, लेकिन वो आपके होने वाले बच्चे की सेहत पर असर डाल रही है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इनसे पूरी तरह दूर रहना चाहिए। ऐसे केमिकल्स से एक्सपोजर वाली महिलाओं में जटिलताओं का रिस्क बढ़ जाता है।
सवाल: बच्चों में क्या असर पड़ता है?
जवाब: बच्चे सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनका शरीर विकसित हो रहा होता है। EDCs से बच्चों में समय से पहले प्यूबर्टी हो सकती है, जैसे लड़कियों में 8 साल की उम्र में ही बदलाव शुरू हो जाना। ये लंबे समय में हॉर्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित होता है। एक अध्ययन में पाया गया कि 20% ऐसे मामलों में पर्यावरणीय केमिकल्स जिम्मेदार होते हैं। पेरेंट्स सोचते हैं कि मोमबत्ती से कमरा अच्छा लगेगा, लेकिन बच्चों की सेहत पर ये बोझ डाल रही है। इसलिए घर में बच्चों के आसपास ऐसी मोमबत्तियां न जलाएं।
सवाल: मोटापा और डायबिटीज से क्या कनेक्शन है?
जवाब: थैलेट्स इंसुलिन के कामकाज को बिगाड़ते हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस होती है। लंबे समय तक एक्सपोजर से डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का रिस्क बढ़ जाता है। ये केमिकल्स फैट सेल्स को बढ़ावा देते हैं, जिससे वजन बढ़ता है। ऐसे केमिकल्स से मोटापे का रिस्क बढ़ता है। अगर आप पहले से डायबिटीज के मरीज हैं, तो ये और खराब कर सकती हैं। रोजाना की छोटी आदत जैसे मोमबत्ती जलाना, आपकी कमर का घेरा बढ़ा सकती है। ये सोचकर ही सावधान हो जाएं।
सवाल: फर्टिलिटी पर क्या प्रभाव पड़ता है?
जवाब: जो लोग फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं, उनके लिए ये मोमबत्तियां बड़ा रिस्क हैं। पुरुषों में थैलेट्स स्पर्म काउंट और क्वालिटी कम करते हैं, जबकि महिलाओं में अंडों को नुकसान पहुंचाते हैं। फर्टिलिटी क्लिनिक्स में 30% मामलों में ऐसे केमिकल्स का असर देखा जाता है। ये केमिकल्स हॉर्मोन्स को ब्लॉक करके प्रजनन क्षमता घटाते हैं। अगर आप बच्चा प्लान कर रहे हैं, तो घर से ऐसी मोमबत्तियां हटाकर शुरुआत करें। ये छोटा बदलाव बड़ा फर्क ला सकता है।
सवाल: किन लोगों को सबसे ज्यादा रिस्क है?
जवाब: कुछ लोग ज्यादा संवेदनशील होते हैं। गर्भवती महिलाएं, बच्चे, डायबिटिक लोग, अस्थमा या एलर्जी के मरीज और फर्टिलिटी प्रॉब्लम वाले सबसे ज्यादा रिस्क में हैं। बुजुर्गों में भी हॉर्मोन असंतुलन से समस्या हो सकती है। अगर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है, तो ये केमिकल्स और तेजी से असर करते हैं। घर में अगर कोई ऐसा व्यक्ति है, तो मोमबत्तियां फेंक देना ही बेहतर है।

सवाल: क्या सभी सुगंधित मोमबत्तियां हानिकारक हैं?
जवाब: 100 फीसदी ऐसा नहीं है, लेकिन ज्यादातर सस्ती और सिंथेटिक मोमबत्तियां पैराफिन वैक्स और थैलेट्स से बनी होती हैं। इन्हें खरीदने से पहले इनरे लेबल चेक करें। अगर ‘फ्थैलेट फ्री’ या ‘नेचुरल फ्रैगरेंस’ लिखा है तो बेहतर है। लेकिन सुरक्षित रहने के लिए प्राकृतिक विकल्प चुनें। कुछ मोमबत्तियां लीड वाली विक्स से बनी होती हैं, जो और खतरनाक हैं।
सवाल: सेंटेड मोमबत्तियों के सुरक्षित विकल्प क्या हैं?
जवाब: अगर आपको घर महकाना पसंद है, तो चिंता न करें, कई सुरक्षित तरीके हैं। बीजवैक्स या सोय वैक्स से बनी मोमबत्तियां चुनें, जो टॉक्सिक एडिटिव्स फ्री हों। एसेंशियल ऑयल डिफ्यूजर इस्तेमाल करें, जहां प्योर प्लांट-बेस्ड ऑयल्स डालें। घरेलू तरीके जैसे सिमर पॉट- जिसमें नींबू, दालचीनी, लौंग उबालें- ये सस्ता और सुरक्षित है। रीड डिफ्यूजर या फ्रेश फूल भी अच्छे हैं। ये न सिर्फ खुशबू देते हैं, बल्कि सेहत को फायदा भी पहुंचाते हैं।

सवाल: क्या थोड़ी देर भी सेंटेड कैंडल जलाने से नुकसान होता है?
जवाब: हां, थोड़ी देर भी सेंटेड कैंडल असर कर सकती है, लेकिन लंबे समय का एक्सपोजर ज्यादा खतरनाक है। अगर आप रोजाना जलाते हैं, तो केमिकल्स जमा होते जाते हैं। बेहतर है कि बंद कमरे में न जलाएं और वेंटिलेशन रखें। लेकिन क्यों रिस्क लें, जब प्राकृतिक विकल्प उपलब्ध हैं।
सवाल: अगर सेंटेड कैंडल्स से कोई समस्या हो रही है तो क्या करें?
जवाब: अगर आपको सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ या हॉर्मोनल इश्यू समझ में आए तो डॉक्टर से मिलें। डॉ. आशुतोष तिवारी कहते हैं कि अगर आपको लग रहा है कि सेंटेड कैंडल्स से समस्या हो रही है तो ब्लड टेस्ट से केमिकल्स का पता लग सकता है। इसके इलाज में बॉडी डिटॉक्स की जाती है और लाइफस्टाइल चेंज करके स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
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