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- Flu Virus Symptoms; Cold Cough Transmission Process | Treatment & Precautions
26 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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फर्ज करिए, आप ऑफिस में हैं। आपके पास बैठे किसी साथी को लगातार छींक आ रही है। कुछ समय बाद आपको भी गले में खराश, सिरदर्द और बुखार महसूस होने लगता है।
इसका कारण इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस हो सकता है, जो हवा के जरिए तेजी से फैलता है। बंद और कम हवादार जगहों में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बंद कमरे में वायरस लंबे समय तक हवा में तैरते रहते हैं और सक्रिय बने रहते हैं।
भारत में हर साल मौसम बदलने के दौरान फ्लू के मामले तेजी से बढ़ते हैं। आमतौर पर यह एक हल्का संक्रमण है। लेकिन लापरवाही बरतने पर गंभीर रूप भी ले सकता है। हालांकि सही जानकारी, समय पर इलाज और कुछ सावधानियां अपनाकर फ्लू से बचा जा सकता है।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम फ्लू के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- सर्दी-जुकाम-खांसी का वायरस हवा में कैसे ट्रैवल करता है?
- फ्लू से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इनफेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली
सवाल- अगर हमारे आसपास कोई छींके या खांसे तो अगले दिन हमें भी सर्दी-जुकाम हो जाता है? ऐसा क्यों?
जवाब- एक-दूसरे से संपर्क ही इसका मुख्य कारण है। इसे नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए-
- जब कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो उसके मुंह और नाक से निकले वायरस हवा में फैल जाते हैं।
- अगर हम उसी एनवायर्नमेंट में सांस लेते हैं या संक्रमित सतह को छूकर आंख, नाक या मुंह को छू लेते हैं, तो वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है।
- सर्दी-जुकाम के वायरस बहुत तेजी से फैलते हैं और इनका इन्क्यूबेशन पीरियड (लक्षण उभरने का समय) आमतौर पर 1–3 दिन होता है।
- इसलिए अक्सर अगले दिन या कुछ ही दिनों में गले में खराश, नाक बहना या छींक जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
सवाल- सर्दी-जुकाम-खांसी का वायरस हवा में कैसे ट्रैवल करता है?
जवाब- जब कोई व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है, तो उसके मुंह और नाक से बहुत छोटी-छोटी बूंदें (ड्रॉपलेट्स) और सूक्ष्म कण (एरोसोल) हवा में निकलते हैं।
इन वाटर ड्रॉपलेट्स में वायरस मौजूद होता है। हैवी ड्रॉपलेट्स कुछ ही सेकेंड में सतह पर गिर जाती हैं। लेकिन हल्के एरोसोल हवा में कुछ समय तक मौजूद रहते हैं।
अगर दूसरा व्यक्ति उसी हवा में सांस लेता है तो वायरस रेस्पिरेटरी सिस्टम में पहुंचकर संक्रमण पैदा कर सकता है। यही वजह है कि भीड़भाड़ और बंद जगहों में संक्रमण तेजी से फैलता है।
सवाल- क्या फ्लू वायरस इंफेक्टेड सतह को छूने से भी फ्लू हो सकता है?
जवाब- हां, फ्लू वायरस कई घंटों तक दरवाजे के हैंडल, मोबाइल, टेबल या कीबोर्ड जैसी सतहों पर सक्रिय रह सकता है। संक्रमित सतह छूने के बाद बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूते हैं, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है।

सवाल- इसके अलावा और किन-किन तरीकों से फ्लू फैल सकता है?
जवाब- फ्लू सिर्फ हवा या छूने से ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतों के जरिए भी फैल सकता है। अक्सर हम इन आदतों पर ध्यान नहीं देते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या किसी फ्लू इन्फेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने पर 100% फ्लू होता ही है?
जवाब- नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है। संक्रमण का जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि-
- आपकी इम्यूनिटी कैसी है?
- आपने फ्लू वैक्सीन ली है या नहीं?
- संपर्क कैसा और कितनी देर था?
- क्या आपने मास्क पहनने या हाथों की साफ-सफाई जैसे सेफ्टी मेजर्स अपनाए थे?
मजबूत इम्यूनिटी और सावधानियां संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
सवाल- क्या ऐसा भी हो सकता है कि किसी को फ्लू हो, लेकिन उसका कोई लक्षण न दिख रहा हो जैसेकि छींक, खांसी, नाक बहना आदि?
जवाब- हां, ऐसा संभव है। कई बार व्यक्ति के शरीर में फ्लू वायरस मौजूद होता है, लेकिन कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस दौरान वह स्वस्थ महसूस कर सकता है, फिर भी दूसरों में संक्रमण फैला सकता है।
सवाल- फ्लू से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- फ्लू से बचाव के लिए रोजमर्रा की आदतों में थोड़े से बदलाव बहुत असरदार साबित हो सकते हैं। साफ-सफाई, पर्याप्त दूरी और मजबूत इम्यूनिटी से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या फ्लू का टीका लगवाना उपयोगी होता है?
जवाब- हां, यह फ्लू होने के खतरे को कम करता है। अगर संक्रमण हो भी जाए तो बीमारी को गंभीर होने से रोकता है।
सवाल- अगर किसी को फ्लू हो जाए तो क्या करना चाहिए?
जवाब- फ्लू होने पर शरीर को आराम देना बेहद जरूरी है। सही देखभाल और समय पर सावधानी रखने से रिकवरी तेज होती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- फ्लू आमतौर पर कितने दिनों में ठीक हो जाता है?
जवाब- ज्यादातर मामलों में फ्लू के लक्षण 5-7 दिनों में कम हो सकते हैं। इसके बावजूद थकान और कमजोरी कई दिनों तक बनी रह सकती है। पूरी तरह रिकवरी में 10-15 दिन तक का समय लग सकता है।
सवाल- अगर फ्लू का सही समय पर इलाज न किया जाए तो क्या समस्याएं हो सकती हैं?
जवाब- इलाज में देरी होने पर फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। जैसेकि-
- तेज बुखार लंबे समय तक बना रह सकता है।
- शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है।
- कुछ मामलों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
- बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों (जैसे डायबिटिक या अस्थमेटिक लोग) में स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है।
- इसलिए लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है?
जवाब- कुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। जैसेकि-
- अगर बुखार 102°F से ज्यादा हो और दो दिन से अधिक समय तक बना रहे।
- सांस लेने में परेशानी हो।
- तेज सिरदर्द हो या सीने में दर्द महसूस हो।
- भूख न लगे।
- लगातार उल्टी हो।
- बहुत ज्यादा कमजोरी या भ्रम की स्थिति हो।
- बच्चे, बुजुर्ग, पहले से बीमार व्यक्ति और गर्भवती महिला में फ्लू के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
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