38 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
- कॉपी लिंक
दिवाली ढेर सारी रोशनी, मिठाइयों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन अस्थमा के मरीजों के लिए यह पर्व चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, भारत में करीब 3.5 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। वायु प्रदूषण इस बीमारी के ट्रिगर का एक प्रमुख कारण है।
दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण एयर क्वालिटी को खतरनाक लेवल तक पहुंचा देता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (CSE) के मुताबिक, दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण सामान्य से 4-5 गुना तक बढ़ जाता है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 से 500 तक पहुंच जाता है, जो कि ‘सीरियस’ कैटेगरी में आता है।
पटाखों, धूपबत्ती और जलते दीयों से निकलने वाले धुएं अस्थमा मरीजों की समस्याएं बढ़ा देते हैं। इसलिए अस्थमा पीड़ितों को पहले से सावधानी बरतनी चाहिए ताकि त्योहार की खुशियां उनकी सेहत पर भारी न पड़ें।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम अस्थमा पीड़ितों के लिए दिवाली सेफ्टी टिप्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- पटाखों का धुआं और प्रदूषण अस्थमा को कैसे प्रभावित करता है?
- अस्थमा के मरीजों को पटाखों के नुकसान से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. एस. जेड. जाफरी, पल्मोनोलॉजिस्ट और एलर्जिस्ट, इंदौर
सवाल- दिवाली के समय अस्थमा पीड़ितों के लिए किस तरह की समस्याएं बढ जाती हैं?
जवाब- पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा में PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें छोड़ता है। ये तत्व सांस की नलियों में सूजन और जलन पैदा करते हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण ट्रिगर हो सकते हैं।
इसके अलावा धूपबत्ती, अगरबत्ती और दीयों का धुआं इनडोर प्रदूषण बढ़ाता है। यही वजह है कि भारत में हर साल दिवाली के बाद अस्पतालों में अस्थमा मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इस प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और क्रॉनिक अस्थमा पीड़ितों पर पड़ता है। नीचे दिए ग्राफिक में इन खतरों को विस्तार से समझिए-

सवाल- प्रदूषण और पटाखों का धुआं अस्थमा को कैसे ट्रिगर करता है?
जवाब- अस्थमा मरीजों की सांस की नलियां आम लोगों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती हैं। ऐसे में जब हवा में प्रदूषण बढ़ता है तो उन्हें सांस लेने में परेशानी, खांसी और घरघराहट की समस्या होने लगती है।
पटाखों से निकलने वाले धुओं में सल्फर, लेड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले तत्व होते हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा देते हैं।
WHO के मुताबिक, लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और लंग्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही आसपास होने वाला तेज शोर तनाव बढ़ाता है, जो अस्थमा अटैक को ट्रिगर कर सकता है।

सवाल- दिवाली पर अस्थमा मरीजों के लक्षणों में क्या बदलाव आते हैं?
जवाब- दिवाली के दौरान प्रदूषण और धुएं के कारण अस्थमा मरीजों में खांसी, घरघराहट, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कुछ मरीज तनाव या घबराहट के कारण चिड़चिड़ेपन या पैनिक अटैक का अनुभव भी कर सकते हैं। गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है।
सवाल- अस्थमा के मरीजों को दिवाली पर किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- इसके लिए पहले से तैयारी और कुछ सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं। प्रदूषण, धुएं और ठंडी हवा से बचाव के लिए सही कदम उठाने चाहिए। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- अगर दिवाली पर अस्थमा अटैक हो जाए तो क्या करना चाहिए?
जवाब- इस स्थिति में घबराएं नहीं। सबसे पहले मरीज को तुरंत साफ और हवादार जगह पर ले जाएं। अगर डॉक्टर ने पहले से इनहेलर इस्तेमाल करने को कहा है तो उसे इस्तेमाल करें। मरीज को धीरे-धीरे और गहरी सांस लेने के लिए कहें ताकि ऑक्सीजन का लेवल स्थिर रहे। अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या बोलने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल जाएं। मरीज को धुआं और भीड़-भाड़ वाली जगह से दूर रखें।
सवाल- क्या दिवाली पर अस्थमा मरीजों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित है?
जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. एस. जेड. जाफरी बताते हैं कि क्रॉनिक अस्थमेटिक लोगों के लिए दिवाली पर घर के बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। ज्यादा भीड़ और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से अस्थमा ट्रिगर हो सकता है। इसलिए अगर बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क पहनें और फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए इनहेलर साथ रखें।
सवाल- क्या दिवाली से पहले अस्थमा मरीजों को अपनी दवाएं बदलवानी चाहिए?
जवाब- दिवाली से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। वे आपकी स्थिति के अनुसार दवाओं में बदलाव कर सकते हैं। लेकिन खुद से दवाएं न बढ़ाएं।
सवाल- क्या खानपान से भी अस्थमा ट्रिगर हो सकता है?
जवाब- डॉ. एस. जेड. जाफरी बताते हैं कि हां, बहुत ज्यादा मिठाइयां, तली-भुनी चीजें और प्रोसेस्ड फूड अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं। हाई शुगर और चॉकलेट में मौजूद कुछ तत्व शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ा सकते हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। धूल, धुएं वाले वातावरण में यह असर और बढ़ जाता है। इसलिए अस्थमा मरीजों को हल्का, घर पर बना और कम मीठा खाना खाना चाहिए।
याद रखें दिवाली के दौरान अस्थमा के मरीजों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। हालांकि सही उपायों और सावधानियों से मरीज बिना डर के उत्सव का आनंद ले सकते हैं।
……………………
जरूरत की ये खबर भी पढ़िए…
जरूरत की खबर- फेस्टिव सीजन में ओवरईटिंग से कैसे बचें:क्यों जरूरत से ज्यादा खाते हैं हम, कैसे रोकें क्रेविंग, डॉक्टर के 10 टिप्स

दिवाली भारत का सबसे बड़ा त्योहार है। उत्साह में लोग पेट भरने के बाद भी खा रहे होते हैं। यही ओवर ईटिंग है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने, पाचन खराब होने और मोटापा बढ़ने का जोखिम होता है। पूरी खबर पढ़िए…
.