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Tips and Tricks: उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है. सर्दी के मौसम में यदि पशुओं के रहने, खान-पान और देखभाल पर सही ध्यान न दिया जाए तो वे जल्दी बीमार हो सकते हैं और दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है. ऐसे में जहानाबाद जिला पशुपालन कार्यालय की पशु चिकित्सक डॉ. रानी ने सर्दियों में पशुओं को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए जरूरी टिप्स साझा किए हैं. रिपोर्ट- शशांक शेखर
कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. हाड़ कंपाती सर्दी से पूरा उत्तर भारत ठिठुरा हुआ है. घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है. सर्दी का मौसम न सिर्फ इंसानों को प्रभावित किया है, बल्कि पशु पक्षियों को भी इससे खासा नुकसान हुआ है. सर्दी के दिनों में जिस प्रकार की व्यवस्थाओं की जरूरत इंसानों को पड़ती है, ठीक उसे प्रकार से पशुओं का भी विशेष ख्याल रखना पड़ता है.

खान पान से लेकर रख रखाव तक का ध्यान रखना पड़ता है. कुछ पशुपालक को जानकारी होती है तो वो ध्यान रख लेते हैं. हालांकि, कई ऐसे पशुपालक हैं जिनको यह जानकारी नहीं रह पाती और उनके पशु ठंड के शिकार हो जाते हैं.

अब ऐसा नहीं होने वाला है, क्योंकि जहानाबाद जिला पशुपालन कार्यालय में कार्यरत पशु चिकित्सक सह सहायक कुक्कुट पदाधिकारी डॉक्टर रानी ने खान पान और प्रबंधन से जुड़ी खास बातें बताई. यदि इन एक्सपर्ट की बात मानकर काम करते हैं तो काफी फायदा होने वाला है. न दूध में कमी आएगी और न ही उनके पशु ज्यादा बीमार होंगे.
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डॉक्टर रानी के मुताबिक, सर्दी का मौसम जानवरों के लिए काफी सेंसटिव होता है. इस मौसम रहने का प्रबंधन जितना जरूरी है, उतना ही खान पान की सही व्यवस्था. अन्यथा आपके पशु बीमारी के शिकार हो सकते हैं. दूध की कमी हो सकती है.

ऐसे में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए जुट का बोरा, फटे पुराने कपड़ों का चादर सिलकर और धान का नेवारी का प्रयाग गर्माहट देने के लिए कर सकते हैं. सावधानी पूर्वक आप बोरसी, रूम हीटर और ब्लोअर भी रख सकते हैं. इससे पशुओं को गर्माहट मिलती रहती है.

उन्होंने ये भी कहा कि ठीक उसी प्रकार से खान पान में सावधानियां बरतने की भी जरुरत होती है. ठंड में शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है. इस कारण सही से खान पान की जरूरत पड़ती है, ताकि शरीर हमारा गर्म रहे. इस मौसम में पशुओं को भूसा के साथ-साथ दाना की भी व्यवस्था खान पान में करनी चाहिए.

इसमें चना, उसका छिलका और मक्का देना चाहिए. चोकर भी बढ़ाकर देना चाहिए. ठंड में मिनरल मिक्सचर और कैल्शियम की खास व्यवस्था कर देने चाहिए, ताकि दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता बरकरार रहे. रोज एक मुट्ठी दोनों का प्रयोग खिलाने में करना चाहिए.
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