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पिंपल्स आज आम समस्या बन गई हैं और अक्सर क्रीम या दवाइयों के बाद भी दोबारा उभर आते हैं. ऐसे में प्राकृतिक और देसी उपाय मददगार होते हैं. शाल्मली वृक्ष, जिसे “पिंपल्स का पेड़” भी कहा जाता है, इसका एक असरदार उपाय है. इसके कांटों में एंटी-सेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पिंपल्स की सूजन कम करते हैं, दानों को सुखाते हैं और नए पिंपल आने से रोकते हैं. शाल्मली के कांटे को हल्का खुरचकर पिंपल्स पर लगाने से 10–15 मिनट में फायदा दिखता है. यह प्राकृतिक, सस्ता और सुरक्षित तरीका है, जिसे केमिकल क्रीम से बेहतर माना जाता है.
पिंपल्स की समस्या अभी आम समस्या बन गई है. जिसे देखो वह पिंपल से परेशान है क्योंकि त्वचा पर बार-बार उभरने वाले पिंपल्स न सिर्फ हमारे चेहरे की खूबसूरती को कम करते हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी घटा देते हैं. अक्सर क्रीम, फेस-वॉश और दवाइयां आज़माने के बाद भी जब पिंपल्स दोबारा लौट आते हैं.

तब लोग प्राकृतिक और देसी उपचार की तलाश करते हैं. ऐसा ही एक बेहद असरदार और पारंपरिक उपाय है शाल्मली वृक्ष का प्रयोग. इसे कई जगह “पिंपल्स का पेड़” भी कहा जाता है, क्योंकि इसका लेप चेहरे की दानों वाली त्वचा पर चमत्कारी असर दिखाता है.

शाल्मली एक बड़ा और कांटेदार वृक्ष होता है, जिसके छाल पर मजबूत कांटे पाए जाते हैं. आयुर्वेद में इस वृक्ष को त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बेहद उपयोगी माना गया है. इसके कांटों में प्राकृतिक गुण होते हैं, जो त्वचा की सूजन को शांत करने और पिंपल्स को सूखाने में मदद करते हैं.
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सबसे पहले शाल्मली की छाल से ताज़े कांटे तोड़ने हैं. इन कांटों को हल्का-सा खुरचकर या घीस कर एक लेप जैसा बना लेना है. इस लेप को सीधे पिंपल्स पर लगाना है, फिर 10 से 15 मिनट बाद चेहरा साफ पानी से धो लेना है. इसका नियमित उपयोग करने से पिंपल्स धीरे-धीरे सूखने लगते हैं और चेहरे पर नये दाने आने की संभावना भी कम होती है.

यह इतना असरदार इसलिए है क्योंकि शाल्मली के कांटों में एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते हैं. जो बैक्टीरिया को कम करते हैं. इसी के साथ इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन और लालपन शांत करते हैं. इसमें स्किन-हीलिंग गुण होते हैं जो घाव और दाने जल्दी भरने में मदद करते हैं. इन्हीं गुणों की वजह से यह पिंपल्स पर बेहद तेजी से काम करता है.

शाल्मली वृक्ष का कांटा पिंपल्स के लिए एक सस्ता, आसान और पूरी तरह प्राकृतिक उपाय है. यह त्वचा की गहराई में काम करके दानों को सुखाता है और नए पिंपल आने से भी रोकता है. इसलिए इसे आज भी लोग “पिंपल्स का पेड़” कहकर पहचानते हैं. यह पेड़ केमिकल्स से बनी हुई महंगी क्रीम से बेहतर उपाय है. ना तो इसका कोई साइड इफेक्ट है और ना ही कोई नुकसान यह एक बेहतर विकल्प है.