आपका पैसा- इस धनतेरस खरीदना है सोना: BIS हॉलमार्क जरूर चेक करें, फिजिकल और डिजिटल गोल्ड खरीदने हुए बरतें ये जरूरी सावधानियां

54 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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हिन्दू धर्म में मान्यता है कि धनतेरस पर सोना खरीदने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और इससे घर में समृद्धि आती है। हर साल इस दिन बाजारों में भारी रौनक देखने को मिलती है।

भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, भारत में साल 2020 में धनतेरस पर करीब 40 टन सोना बिका था। वहीं 2022 में करीब 39 टन सोना खरीदा गया। यही नहीं, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में भारत की सालाना सोने की मांग 802.8 टन तक पहुंच गई, जिसकी कीमत करीब 5.15 लाख करोड़ रुपए थी।

ये आंकड़े बताते हैं कि चाहे कीमतें ऊंची हों या गिरावट आए, सोना हम भारतीयों पहली पसंद बना रहता है। हालांकि खरीदारी से पहले अगर कुछ जरूरी बातों पर ध्यान न दिया जाए तो यह निवेश नुकसान भी कर सकता है।

इसलिए आज आपका पैसा कॉलम में जानेंगे कि-

  • सोना खरीदते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
  • सोना खरीदते समय हॉलमार्क चेक करना क्यों जरूरी है?
  • क्या डिजिटल गोल्ड खरीदना सुरक्षित है?

सवाल- सोना खरीदते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- सोना सिर्फ गहनों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा निवेश भी माना जाता है। इसलिए खरीदारी से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना आपके पैसे और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

सवाल- हॉलमार्क क्या होता है? गोल्ड खरीदते वक्त इसे चेक करना क्यों जरूरी है?

जवाब- हॉलमार्क गोल्ड का मतलब सोने की शुद्धता और असली होने का सरकारी सर्टिफिकेट। भारत में यह प्रमाणन BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) द्वारा दिया जाता है। जब किसी गहने पर हॉलमार्क होता है तो इसका मतलब है कि वह सोना जांचा-परखा और मानक के अनुसार शुद्ध है। हॉलमार्क से खरीदार और निवेशक दोनों को भरोसा मिलता है और सोने की खरीद-बिक्री आसान हो जाती है।

भारतीय गोल्ड हॉलमार्क के निशान

  • हॉलमार्क किए गए गहनों या सिक्कों पर चार स्टैंडर्ड निशान होते हैं
  • BIS का लोगो- यह सोने की शुद्धता का सबसे भरोसेमंद निशान है।
  • सोने की कैरेट या शुद्धता का निशान, जैसे 22K (916), 18K या 14K लिखा होता है।
  • हॉलमार्किंग सेंटर का निशान- यह दिखाता है कि सोने की जांच कहां हुई।
  • ज्वेलर का HUID नंबर- हर गहने पर एक छह अंकों का यूनिक कोड होता है।
  • इससे असली-नकली की पहचान आसानी से की जा सकती है।

सवाल- डिजिटल गोल्ड क्या है?

जवाब- डिजिटल गोल्ड एक तरीका है, जिससे आप ऑनलाइन सोना खरीद, बेच और सुरक्षित रख सकते हैं। जब आप डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, तो उतने ही वजन का असली सोना आपके लिए सुरक्षित वॉल्ट में स्टोर कर दिया जाता है। यानी सोना आपका ही होता है, लेकिन उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आपको देने वाली कंपनी की होती है।

सवाल- क्या डिजिटल गोल्ड खरीदना सुरक्षित होता है?

जवाब- आमतौर पर डिजिटल गोल्ड खरीदना सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। डिजिटल गोल्ड सुरक्षित है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस कंपनी से खरीदते हैं।

चूंकि, डिजिटल गोल्ड RBI या SEBI द्वारा सीधे रेग्युलेटेड नहीं है, बल्कि अलग-अलग कंपनियां और ट्रस्ट इसे मैनेज करते हैं। इसलिए इसे खरीदते समय केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म (जैसे पेटीएम, गूगल पे, फोनपे या बैंकिंग ऐप्स) से ही लें और लंबी अवधि के निवेश के बजाय इसे शॉर्ट से मीडियम टर्म ऑप्शन मानें।

डिजिटल गोल्ड में आप ऑनलाइन छोटी-छोटी रकम से भी निवेश कर सकते हैं और आपके निवेश के बराबर असली सोना ट्रस्ट के पास सुरक्षित रखा जाता है। इसे कभी भी बेच सकते हैं या फिजिकल गोल्ड (सिक्के/बार) में बदल सकते हैं।

सवाल- डिजिटल गोल्ड खरीदते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- डिजिटल गोल्ड खरीदते वक्त कई सारे बातें ध्यान रखनी जरूरी होती हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

सवाल- इन्वेस्टमेंट के लिए कॉइन बेहतर है या ज्वेलरी?

जवाब- इन्वेस्टमेंट के लिए सोने के कॉइन या बार बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज बहुत कम या न के बराबर होता है और बेचते समय अच्छा रिटर्न मिलता है। वहीं, ज्वेलरी में मेकिंग चार्ज और डिजाइन चार्ज जुड़ जाते हैं, जो रीसेल करते समय वापस नहीं मिलते हैं। इसलिए अगर आपका उद्देश्य सिर्फ निवेश करना है तो कॉइन या बार खरीदना ज्यादा फायदेमंद है, जबकि ज्वेलरी भावनात्मक और उपयोग के नजरिए से खरीदी जाती है।

सवाल- क्या फिजिकल गोल्ड और डिजिटल गोल्ड में टैक्स देना पड़ता है?

जवाब- हां, दोनों ही मामलों में टैक्स लागू होता है। फिजिकल गोल्ड में सोना खरीदते समय 3% जीएसटी देना पड़ता है। ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज पर भी टैक्स जुड़ सकता है। अगर आप सोना बेचते हैं और उस पर लाभ होता है, तो यह कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आता है। 3 साल से कम समय में बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। यह इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार होता है। 3 साल से ज्यादा समय बाद बेचने पर 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है।

डिजिटल गोल्ड में भी वही नियम लागू होते हैं, क्योंकि यह सोने में निवेश ही माना जाता है। खरीदते वक्त GST और बेचते वक्त होने वाला लाभ टैक्स देना होता है।

इसलिए सोने में निवेश करने से पहले टैक्स इंपैक्ट जरूर समझ लें ताकि बाद में रिटर्न का सही अनुमान लगा सकें।

सवाल- सोना खरीदने का सबसे सही समय कौन-सा होता है?

जवाब- सोना एक लॉन्ग-टर्म निवेश है, इसलिए इसे टाइम करने की बजाय धीरे-धीरे खरीदना बेहतर होता है। अगर आप सोना निवेश के लिए खरीद रहे हैं तो हर महीने या तिमाही थोड़ी-थोड़ी रकम SIP की तरह लगाना समझदारी है। इससे दामों के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।

शॉर्ट टर्म खरीदारी यानी शादी या फेस्टिवल के समय ध्यान रखें कि त्योहारी सीजन या शादी के मौसम में दाम बढ़ जाते हैं। इसलिए उससे पहले खरीदारी कर लेना फायदेमंद होता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता या महंगाई बढ़ती है, तब सोने की कीमतें बढ़ती हैं। ऐसे समय में निवेशक इसे सेफ हेवन मानकर खरीदते हैं।

सवाल- क्या बच्चों के नाम पर या ज्वाइंट नाम में सोना खरीदा जा सकता है?

जवाब- हां, बिल्कुल। सोना चाहे फिजिकल हो या डिजिटल, किसी भी नाम से खरीदा जा सकता है।

बच्चों के नाम पर: आप अपने बच्चे के नाम पर सोना खरीद सकते हैं, लेकिन खरीद के समय KYC डिटेल्स अभिभावक के देने पड़ते हैं।

ज्वाइंट नाम से: पति-पत्नी या परिवार के दो सदस्यों के नाम पर संयुक्त रूप से सोना खरीदा जा सकता है। यह व्यवस्था निवेश के दृष्टिकोण से ज्यादा सुरक्षित रहती है।

यह सुविधा डिजिटल गोल्ड में भी कई प्लेटफॉर्म्स देते हैं, हालांकि अकाउंट एक ही व्यक्ति के नाम से खुलता है। इससे निवेश पारदर्शी रहता है और भविष्य में वारिस या ओनरशिप से जुड़ी दिक्कतें नहीं आती हैं।

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