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Ibuprofen damage Intestine wall: हमें थोड़ा भी दर्द हुआ कि हमने केमिस्ट की दुकान से दवा खरीदा और इसे गटक लिया. लेकिन जब आप इसे छोटी सी परेशानी में गटकते रहेंगे तो जब असली परेशानी होगी, काम ही नहीं करेगी. इसलिए अगर आप इस टैबलेट को ज्यादा दिनों तक खाते हैं तो इससे आंत की दीवार डैमेज हो सकती है.
Ibuprofen damage Intestine wall : जब भी शरीर में दर्द होता है या सिर दर्द होता है, लोग पेन किलर दवा खा लेते हैं. मामूली थकान पर भी लोग ऐसा करते हैं. पेन किलर दवाइयां नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लामेटरी ड्रग्स होता है जिसका मतलब होता है कि ये शरीर में इंफ्लामेशन को कम करता है. लेकिन जब यह दवा शरीर में जाता है तो इसका एक साइड इफेक्ट भी होता है. यह दवा शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक केमिकल को कम कर देती है. प्रोस्टाग्लैंडिन पेट की भीतरी दीवार यानी आंत की लाइनिंग को एसिड से बचाता है. इसके कम होने से आंत की परत कमजोर हो जाती है और जलन शुरू हो सकती है. अगर हम इस पेनकिलर दवाइयों को कभी-कभार खाते हैं तो दोबारा से यह केमिकल बनने लगता है लेकिन अगर हम इस दवा को लगातार खाते रहते हैं तो प्रोस्टाग्लैंडिन एकदम कम हो जाती है और उस स्थिति में हमें भारी परेशानियों का सामना कर पड़ सकता है.
आंतों की सुरक्षा कैसे होती है
पहले समझिए कि हमारी आंतों की सुरक्षा कैसे होती है. सर गंगाराम अस्पताल में इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पेनक्रिएटिक बिलीएरी साइंसेज के कंसल्टेंट डॉ. श्रीहरि अनिखिंडी ने बताया कि दरअसल, हमारे पेट में हर दिन कई तरह की खराब चीजें जाती हैं. इनमें लोहा, मर्करी, लेड, कार्बन, मैग्नीज, जिंक जैसे खतरनाक टॉक्सिन के कण भी शामिल होते है. जरा सोचिए कि अगर ये भारी चीजें पेट में रह जाए तो हमारे पेट की क्या दशा होगी. कुदरत ने इसके लिए कमाल की कारीगरी की है. जैसे ही ये कण हमारी आंत की लाइनिंग को टच करते हैं आंत की लाइनिंग से म्यूकस निकलने लगता है. म्यूकस के उपर म्यूसिन नाम का चिपचिपा पदार्थ होता है जो इन भारी चीजों को खुद में लपेट लेता है. फिर यह उन चीजों को आंतों की दीवार से बाहर धकेल देता है. म्यूकस और म्यूसिन को मजबूत बनाने के लिए प्रोस्टाग्लैंडिन हमेशा तत्पर रहता है. यह प्रोटेक्टिव मैकेनिज्म हमारी आंतों में इतनी खतरनाक चीजों से बचाती है.
आइबूप्रोफेन कैसे सुरक्षा को भेदती है
अब यह समझिए कि यह आइबूप्रोफेन या पेन किलर दवा हमारी आंतों की सुरक्षा को कैसे भेद देती है. एक तरह से हमारी आंतों के सिक्योरिटी गार्ड को खत्म करने लगती है. दरअसल, जब हम बहुत ज्यादा पेन किलर दवाइयां खाएंगे तो इससे प्रोस्टाग्लैंडिन कम बनेगा और इस कारण आंत की लाइनिंग में जो म्यूकस बनता है, वह भी कम बनेगा या नहीं बनेगा. इससे ये कण हमारी आंत की दीवार को डैमेज करना शुरू कर देगा. अब आप खुद ही सोच सकते हैं कि ये दवा हमपर कितना खतनाक असर दिखाएगी. इससे आंतों का अल्सर भी हो सकता है. हालांकि यदि आपको बर्दाश्त से बाहर दर्द हो रहा है और आपने दवा खा ली तो इसका असर सामान्य होगा. इससे आंतों पर कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन जब आप इसे आदत बना लेंगे तो इसका खतरनाक असर सामने आ सकता है. इसलिए बेहतर यही रहेगा कि इन दवाओं को बगैर डॉक्टर की सलाह के नहीं खाएं.
इन दवाओं के साइड इफेक्ट से क्या होगा
ये दवाइयां जब आप ज्यादा खाने लगेंगे तो सबसे पहले पेट में दर्द होने लगेगा, सिर में दर्द जैसी समस्या बढ़ने लगेगी, आंतों की दीवार में घाव होने लगेगा. फिर पेट में एसिड भी ज्यादा बनने लगेगा और इससे पेट हमेशा फूला हुआ महसूस होगा. इससे अल्सर भी हो सकता है और जब यह मामला बहुत अधिक बढ़ जाएगा तो स्टूल से खून भी निकलने लग सकता है. हालांकि यह रेयर मामला है. इसलिए जब भी इन दवाओं को खाएं तो पहले डॉक्टर से सलाह ले लें. कई ऐसी दवाइयां भी है जो इसके विकल्प में आ गई हैं और इसके बहुत कम साइड इफेक्ट हैं.
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