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Facts About Diabetes Medicine: कई लोगों को लगता है कि डायबिटीज की दवा एक बार शुरू हो गई, तो फिर इसके बिना शुगर लेवल कंट्रोल करना संभव नहीं है. डॉक्टर्स की मानें तो डायबिटीज की दवा शुरू करने का मतलब जीवन भर दवा लेना नहीं होता है. अगर कोई व्यक्ति शुरुआती स्टेज में खानपान और लाइफस्टाइल से डायबिटीज कंट्रोल कर ले, तो दवा बंद भी की जा सकती है. हालांकि लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को लाइफ टाइम दवा लेने की जरूरत पड़ती है.
डायबिटीज के मरीजों का शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए दवा दी जाती है.
Can You Stop Diabetes Medication: डायबिटीज की बीमारी तेजी से बढ़ रही है और करोड़ों लोग इसका शिकार हो चुके हैं. कई बार लोगों को डायबिटीज डायग्नोज होती है, लेकिन वे शुरुआत में दवा लेने से बचते हैं और देसी दवाएं लेना पसंद करते हैं. कई लोग मानते हैं कि एक बार एलोपैथी दवा शुरू कर दी, तो इसे जिंदगीभर लेना पड़ेगा. कुछ लोग यह भी कहते हैं कि डायबिटीज की दवा की शरीर को लत लग जाती है और शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए बॉडी इस पर निर्भर हो जाती है. हालांकि डॉक्टर्स इन सभी बातों को पूरी तरह गलत बताते हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि शुगर की दवा बीमारी को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है और उससे किसी तरह का एडिक्शन नहीं होता है. इसे जिंदगी भर लेने से भी शरीर को कोई खास नुकसान नहीं होता है.
गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर डिपार्टमेंट के क्लीनिकल हेड डॉ. पारस अग्रवाल ने News18 को बताया डायबिटीज की दवा को लेकर लोगों के मन में कई तरह के भ्रम होते हैं. मरीजों को दवा इसलिए दी जाती है, ताकि उनका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहे. इस दवा से किसी तरह का एडिक्शन नहीं होता है. अगर किसी व्यक्ति को टाइप 2 डायबिटीज डायग्नोज हुई है, तो उसे डॉक्टर से कंसल्ट करके दवा शुरू करनी चाहिए. अगर शुरुआती स्टेज में कोई दवा शुरू कर दे, तो लंबे समय तक डायबिटीज कंट्रोल रहने पर उसे एक्सपर्ट की सलाह पर कम या बंद भी किया जा सकता है. ऐसा सिर्फ उन मरीजों के मामले में होता है, जिन्हें डायबिटीज की शुरुआत हुई हो. क्रॉनिक डिजीज होने पर दवा लाइफ टाइम चलती है.
क्या डायबिटीज की दवाओं से लत लगती है?
डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि यह एक बड़ा मिथक है कि डायबिटीज की दवाएं लत लगाती हैं. डायबिटीज की दवाएं जैसे मेटफॉर्मिन, इंसुलिन या अन्य एंटी-डायबिटिक दवाएं ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित नहीं करती हैं. ऐसे में लत लगने का सवाल ही नहीं है. ये दवाएं केवल ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए होती हैं. अगर दवा बंद करने पर शुगर बढ़ जाती है, तो इसका मतलब लत नहीं, बल्कि बीमारी की प्रकृति है. शरीर को दवा की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि पैनक्रियास या इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित है. अगर बिना दवा के डायबिटीज कंट्रोल रहे, तो डॉक्टर की सलाह पर दवाएं बंद भी कर सकते हैं.
क्या टाइप 2 डायबिटीज में दवा बंद हो सकती है?
एक्सपर्ट के मुताबिक टाइप 2 डायबिटीज में स्थिति अलग हो सकती है. अगर मरीज वजन कम कर ले, संतुलित डाइट ले, नियमित व्यायाम करे और तनाव को कंट्रोल रखे, तो शुरुआती स्टेज में ब्लड शुगर स्तर सामान्य सीमा में आ सकता है. कुछ मरीजों में रेमिशन की स्थिति भी देखी गई है, जहां HbA1c लंबे समय तक नियंत्रित रहता है और डॉक्टर दवा कम या बंद करने पर विचार कर सकते हैं. हालांकि यह हर मरीज पर लागू नहीं होता. टाइप 2 डायबिटीज एक प्रोग्रेसिव बीमारी है यानी समय के साथ बढ़ सकती है. ऐसे में दवा की मात्रा बढ़ाना या इंसुलिन शुरू करना शरीर की बदलती जरूरत का संकेत है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें