आम के पत्तों पर दिखे धब्बे तो हो जाएं सतर्क! कृषि वैज्ञानिक की चेतावनी, समय पर इलाज नहीं तो भारी नुकसान

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Mango Farming: आम के बागानों में पत्तों पर दिखने वाले धब्बों को हल्के में लेना किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह लक्षण फंगल या बैक्टीरियल रोग का संकेत हो सकता है, जो धीरे-धीरे पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है. शुरुआत में छोटे धब्बे दिखाई देते हैं, जो समय के साथ पत्तियों के सूखने और झड़ने का कारण बनते हैं. इससे आम के उत्पादन और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते उचित दवा का छिड़काव और संतुलित पोषण से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है.

सागर: आम की खेती करने वाले किसानों को समय-समय पर उर्वरक और पानी तो पेड़ पौधों को देना ही चाहिए लेकिन अब समय उनकी मॉनिटरिंग करने का भी आ गया है, क्योंकि जैसे ही बर आने का समय होता है. तो इनमें बीमारियां भी देखी जाने लगते हैं सागर जिले में शुरुआत में ही आम के पेड़ों में दो तरह की समस्याएं देखने को मिलने लगी हैं. एक जिसमें आम के पत्तों पर काले धब्बे आ रहे हैं और यह धब्बे आने की वजह से पत्तियां सूख जाती हैं. दूसरा जो आम के पेड़ में कोमल पत्तियां होती हैं. उनमें रस चूसक कीट लग रहे हैं. अगर इनका समय रहती उपचार नहीं किया गया तो यह है. पूरी फसल को बिगाड़ सकते हैं जिससे किसानों को उम्मीद के मुताबिक ना तो उत्पादन मिलेगा और ना ही उतनी आमदनी हो सकेगी.

किसी भी आम के पेड़ में फल तो बौर आने यानी की फूल आने के बाद बनते हैं, ऐसे में किसान ध्यान नहीं देते और वह सोचते हैं की पत्तियां सूखने से फलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यहीं पर वह बड़ी गलती कर जाते हैं, क्योंकि आमतौर पर पौधों के भोजन का मुख्य स्रोत सूर्य की रोशनी होती है. जिसको प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी कहते हैं यानी कि कोई भी पेड़ पौधा अपनी पत्तियां की माध्यम से सूर्य की रोशनी से भोजन लेता है. अगर पर अच्छे से यह क्रिया कर पाता है तो उसमें फूल भी भरपूर आते हैं. फल भी चमकदार दमदार और बड़े होते हैं. जब कोई भी पौधा बड़े और ज्यादा फल देता है, तो फिर उत्पादन भी अच्छा मिलता है जिससे किसान भाइयों को अच्छी आए मिल जाती है.

रस चूसने वाले कीटों से राहत मिलेगी
इसको लेकर सागर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि जनवरी के महीने में कहीं-कहीं पर आम के बगीचों में बौर आने लगे हैं या फिर आने वाले कुछ दिनों में बौर आ जाएंगे, इस साल शुरुआत में ही दो समस्याएं या यूं कहें की बीमारी सामने आ गई है जिसका किसान भाइयों को बचाव करना चाहिए सबसे पहले पेड़ के पत्तों को देखें तो उनमें धब्बे होंगे जिनको पत्ती धब्बा रोग कहते जो धीरे-धीरे पूरे पत्ते में फेल कर उसकी सुखा देते हैं. यह एंथ्रोक्यूनेज बीमारी हैं जिसमें फोटोसेंथिस नहीं हो पता है तो पौधों का भोजन नहीं बनेगा इससे फ्रूटिंग और फ्लोवरिंग में समस्या आएगी. और दूसरा पौधे की कोमल पत्तियों में जो रस चूसने वाली किट है वह उनमें लग रही है जिससे पूरी पट्टी का ही रस चूस लेते हैं इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि वह इमीडाक्लोरोपिड या नीम तेल का छिड़काव कर सकते हैं.

शुरुआती अवस्था में ऐसा करने की वजह से पत्ती धब्बा रोग और रस चूसने वाले कीटों से राहत मिलेगी और पौधा तंदुरुस्त होगा. इसके साथ-साथ किसान भाइयों को आम की बंपर पैदावार लेने के लिए इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि उन्हें समय-समय पर सिंचाई करनी है और उर्वरक भी देते जाए जिसकी वजह से फ्लावर में ज्यादा से ज्यादा फ्रूट तैयार हो सके.

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Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें

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आम की फसल खतरे में? पत्तों पर धब्बों को नजरअंदाज न करें, जानें क्यों

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