दवा छोड़ी तो बढ़ेगा खतरा! छत्तीसगढ़ी एक्सपर्ट कुनाल ने बताया हाथीपाव बचाव

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Elephantiasis Prevention : महासमुंद जिले के सरायपाली में 10 से 25 फरवरी तक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है. डॉ. कुनाल नायक ने बताया कि यह बीमारी मच्छर से फैलती है और इसके लक्षण 5 – 10 साल बाद दिखते हैं. DEC, एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन दवा दी जा रही है. हल्के साइड इफेक्ट सामान्य हैं. डरें नहीं, दवा जरूर लें.

Health Tips : फाइलेरिया (हाथीपांव) एक गंभीर लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है. इसके उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा हर साल सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जाता है. इस अभियान के तहत लोगों को निःशुल्क फाइलेरिया रोधी दवाएं दी जाती हैं. इसी कड़ी में महासमुंद जिले के सरायपाली खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुनाल नायक ने बताया कि फाइलेरिया यानी हाथीपांव एक गंभीर लेकिन धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है.

25 फरवरी तक विशेष दवा वितरण अभियान
इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके लक्षण तुरंत सामने नहीं आते, बल्कि 5 से 10 वर्षों बाद दिखाई देते हैं. इसी वजह से लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और सोचते हैं कि वे अभी पूरी तरह स्वस्थ हैं. डॉ. नायक ने कहा कि इसी मानसिकता को बदलने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 फरवरी से 25 फरवरी तक विशेष दवा वितरण अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य गांव, ब्लॉक और जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाना है. अभियान के अंतर्गत ग्रामीण अंचलों में मितानिन दीदियां और स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को उम्र और लंबाई के अनुसार दवा खिला रहे हैं.

दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवा नहीं
इस अभियान में तीन प्रकार की दवाइयां दी जा रही हैं डाईथाइलकार्बामाज़ीन (DEC), एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन. दो साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवा नहीं दी जा रही है. उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को दवा खाने के बाद जी मचलाना, उल्टी होना, थकान या नींद आना जैसे सामान्य साइड इफेक्ट दिखाई दे सकते हैं. यह संकेत है कि दवा शरीर में मौजूद कृमि और कीटाणुओं को खत्म कर रही है. ऐसे में घबराने की आवश्यकता नहीं है. यदि असुविधा अधिक हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर आवश्यक उपचार लिया जा सकता है.

यह अभियान World Health Organization, केंद्र सरकार, जिला कलेक्टर महासमुंद और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने गांव से लेकर शहर तक के सभी नागरिकों से अपील की है कि डर या अफवाहों से बचें और बिना हिचक दवा का सेवन करें. आज ली गई एक गोली आने वाले वर्षों में आपको हाथीपांव जैसी गंभीर बीमारी से बचा सकती है. जागरूकता और सहभागिता ही फाइलेरिया मुक्त समाज की सबसे बड़ी कुंजी है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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