नई दिल्ली: वर्तमान में हमारे देश में डायबिटीज हो या फिर थायराइड या फिर कैंसर, किसी भी तरह की कोई बीमारी की उम्र नहीं रह गई है. अब खाना पीना दूषित होने की वजह से लोग कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से भी जूझ रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण हमारा खान पान है. अगर खान-पान अच्छा हो तो यकीनन आपका शरीर हमेशा फिट रहेगा और बीमारियों से फ्री रहेगा.
इन बीमारियों को देने में महत्वपूर्ण भूमिका ग्लूटेन निभाता है. जो कि गेहूं, जौ और राई में पाया जाने वाला एक तरह का प्रोटीन है. यह सीलिएक छोटी आंत को नुकसान पहुंचाता है. ऐसे में इसका विकल्प खोज निकाला है. देश की जानी-मानी न्यूट्रिशन और डाइटिशियन डॉ. कनुप्रिया खन्ना ने, जिनकी मां को खुद ग्लूटेन की वजह से गंभीर बीमारी हुई.
वहीं से कनुप्रिया खन्ना को इसका विकल्प खोजने पर मजबूर होना पड़ा. मां की जिंदगी बचाने से लेकर अपने बच्चों और खुद को सेहतमंद रखने के लिए उन्होंने घर में ही ज्वार से रोटियां और केक, बिस्किट, मठरी नमकीन, मफिन, आटा समेत काफी कुछ बनाना शुरू कर दिया, जिससे उनकी मां की तबियत ठीक हो गई. हालांकि तब तक उन्होंने बिजनेस शुरू नहीं किया था, सिर्फ परिवार के लिए ही बनाती थी.
दोस्तों ने दिया आइडिया
कनुप्रिया खन्ना ने बताया कि जब वह लंदन में अपनी मास्टर्स की पढ़ाई कर रही थीं. तब उनकी मां को ग्लूटेन से एलर्जी या यूं कहें एक बीमारी का पता चला था. तब वहां पर भी ग्लूटेन फ्री सिर्फ एक ब्रेड और एक ही बिस्किट मिलती थी. जो खाने में बेहद खराब थी. तब इन्हें समझ आया कि ग्लूटेन कितना सेहत के लिए हानिकारक है. इसीलिए मां को अच्छा स्वाद के साथ सेहत देने के लिए इन्होंने घर में ही ज्वार से रोटियां बनाई और केक, बिस्किट, मठरी नमकीन, मफिन, आटा और ब्रेड बनानी शुरू कर दी.
7 साल पहले की बिजनेस की शुरूआत
एक दिन उनके कुछ दोस्त घर पर आए तो कनुप्रिया ने अपने हाथों के बनाए हुए प्रोडक्ट उनको भी खिलाया. सबको इतना पसंद आया कि सभी ने इसे मार्केट में उतारने का आईडिया दे दिया. फिर करीब 7 साल पहले उन्होंने कैरामल नाम से बिजनेस की शुरुआत की. आज पूरे देश भर से इनके प्रोडक्ट की डिमांड हो रही है.
प्रोडक्ट में नहीं करती चीनी का इस्तेमाल
कनुप्रिया खन्ना ने बताया कि एक न्यूट्रीशन और डाइटिशियन होने के नाते लोगों को ग्लूटेन खाना खाने की सलाह दी जाती है. ग्लूटेन उनकी सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचाता है. आंतों को भी काफी नुकसान पहुंचाने का काम यह करता है. उन्होंने यह भी बताया कि इनके ग्लूटेन फ्री केक और बाकी मीठे सामानों में चीनी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है. उसकी जगह ऑर्गेनिक गुड और खजूर का इस्तेमाल किया जाता है.
यही वजह है कि कैंसर के मरीज, डायबिटीज या फिर ब्लड प्रेशर सभी के मरीज उनके इस खाने को खा सकते हैं. आज देश के बड़े-बड़े डॉक्टर भी उनके प्रोडक्ट को खाने की सलाह अपने मरीज को दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि हर कोई उनके प्रोडक्ट को खा सके इसीलिए कीमत बहुत कम रखी गई है. ज्वार का आटा की कीमत 235 रुपए किलो है, जबकि बाकि प्रोडक्ट की शुरुआत 165 रुपए से है. उनका मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि लोगों को स्वाद के साथ ही सेहत देना है.
ऐसे करें ऑर्डर
कनुप्रिया खन्ना ने बताया कि www.karamele.in पर जाकर लोग इन प्रोडक्ट को ऑर्डर कर सकते हैं. सभी की कीमत बहुत कम है. दिल्ली एनसीआर में उनका प्रोडक्ट भेजा जाता है. इसके अलावा पूरे भारत में बैठकर भी कोई भी उनके प्रोडक्ट को ऑर्डर कर सकता है.
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