सर्वाइकल के दर्द से हैं परेशान, तो इन चीजों से बनाएं दूरी.. जानिए सही उपचार

अंबाला: हरियाणा के मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है. कभी गर्मी तो कभी ठंड के कारण सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, तो इसके साथ ही कमर दर्द, जोड़ दर्द, सर्वाइकल और सायटिका से पीड़ित मरीज भी बड़ी संख्या में अस्पतालों का रुख कर रहे हैं.

बढ़ रही है सर्वाइकल के मरीजों की संख्या

दरअसल, अंबाला जिले में मौसम परिवर्तन के साथ ही बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इन बीमारियों से सबसे अधिक प्रभावित हैं, आंकड़ों की बात करे तो अम्बाला छावनी नागरिक अस्पताल के आयुर्वेद ओपीडी में लगभग सर्वाइकल के 100 से 150 मरीज प्रति माह आ रहे है. इनमें से लगभग 50 प्रतिशत मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी से पीड़ित हैं, जबकि करीब 30 प्रतिशत मरीज सायटिका, सर्वाइकल और कमर दर्द की समस्या लेकर इलाज कराने आ रहे हैं.

क्या है वजह

वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदाचार्य डॉ जितेंद्र वर्मा ने बताया कि आजकल लगातार मौसम परिवर्तन हो रहा है, जिसमें जहां कभी ज्यादा ठंड पड़ रही है, तो कभी बहुत ज्यादा गर्मी पड़ रही है. इसके साथ ही बीते दिनों हुई बारिश का असर भी लोगों सेहत पर काफी देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि बर्फीली हवाएं चलने के कारण जोड़ों से संबंधित मरीजों में जकड़न यानी सर्वाइकल की समस्या काफी ज्यादा बढ़ रही है, इसलिए इस मौसम में ऐसे लोगों को हाथ ओर पैरों के एक्सरसाइज ( व्यायाम) जरूर करना है.

इन चीजों का ना करें सेवन

उन्होंने बताया कि इस मौसम में रजाई में काफी देर तक लेटे रहने के कारण भी यह समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि एक जगह लेटे रहने और झुक रहने से समस्या बढ़ाती है. उन्होंने बताया कि इस दौरान खासतौर पर दही, चावल, अचार ओर खटाई जैसे आहार खाने के कारण भी वायु शरीर में काफी बढ़ती है, इसलिए इनका प्रयोग नहीं करना है.

गर्म पानी पीएं, कुनकुने गर्म पानी से नहाकर धूप में जरूर बैठें. इन चीजों से फायदा देगा. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में सोंठ और अलसी को काफी फायदेमंद बताया गया है, इसलिए इनका सेवन हमें इस मौसम में जरूर करना है. उन्होंने बताया कि सर्वाइकल, ज्यादातर महिलाओं में काफी ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि सिलाई और ऑफिस वर्क करने वाली महिलाएं अक्सर काफी काफी देर तक एक ही स्थान पर बैठी रहती है, जिससे शरीर बिल्कुल शांत हो जाता है, इसलिए कुछ-कुछ देर बाद उन्हें एक स्थान से उठकर थोड़ा बहुत चलते फिरते रहना है.

सर्वाइकल के लिए प्रमुख व्यायाम

वहीं आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर जितेंद्र ने कुछ एक्सरसाइज बताई जो इस प्रकार है:

ठुड्डी को अंदर खींचना: इसमें आपको सीधे बैठकर अपनी ठुड्डी को धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाएं, जैसे कि आप गर्दन में “डबल चिन” बना रहे हों. 5 सेकंड तक रोकें और 10 बार दोहराएं.

गर्दन घुमाना व्यायाम: धीरे-धीरे अपनी गर्दन को दाईं ओर घुमाएं और फिर बाईं ओर, हर तरफ 5-10 सेकंड रुकें.

गर्दन झुकाना : कान को कंधे की तरफ ले जाएं (बिना कंधे ऊपर उठाए), दोनों तरफ से 5-10 बार करें.

कंधे घुमाना : कंधों को ऊपर, पीछे और नीचे की ओर गोल घुमाएं (15-20 बार), इससे मांसपेशियों का तनाव कम होता है.

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज: माथे पर हथेली रखकर गर्दन से आगे की और दबाव डालें (सिर हिलाना नहीं है) और 5 सेकंड तक रोकें, यही प्रक्रिया पीछे और दोनों तरफ दोहराएं.

भुजंगासन : पेट के बल लेटकर हाथों के सहारे छाती को उठाएं, यह पीठ और गर्दन की अकड़न कम करता है.

तेल मालिश और सिकाई

सर्वाइकल की समस्या में तेल मालिश और सिकाई भी फायदेमंद हो सकती है. किसी भी तेल से गर्दन पर हल्के हाथों से मालिश करना और सूती कपड़े को गर्म करके सिकाई करना लाभदायक हो सकता है. ऐसा करने से आपको तुरंत दर्द से राहत मिल सकती है और दवाई भी नहीं लेनी होगी.

आयुर्वेदिक दवाएं

आयुर्वेद में अश्वगंधा और शिलाजीत जैसी दवाएं सर्वाइकल के लिए रामबाण साबित हो सकती हैं. अश्वगंधा नसों को क्लियर करता है, जबकि शिलाजीत कफ, वात और पित्त की समस्या को दूर करता है. सर्वाइकल की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए आयुर्वेद में इसके सटीक इलाज के लिए जड़ी-बूटियों और शारीरिक एक्टिविटी का सहारा लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अश्वगंधा और शिलाजीत जैसी आयुर्वेदिक दवाओं को एक्सपर्ट की राय के अनुसार ही इस्तेमाल करें. अपनी बीमारी की हिस्ट्री के मुताबिक सलाह लें और डोज से लेकर खाने के तरीके तक सब आयुर्वेदाचार्य से बात करके ही लें.

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