बकरी खरीदने जा रहे हैं, तो पहले जान लें चयन का सही तरीका, फॉलो करें एक्सपर्ट टिप्स, कभी नहीं होगा धोखा

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बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने स्वस्थ बकरी चुनने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दी हैं. बीमार बकरी में आंखों में पीलापन, नाक से पानी, असामान्य मल और तेज सांस जैसे लक्षण दिखते हैं. थन और जीभ की सफाई की भी जांच जरूरी है. नई बकरी को 14 दिन तक अलग रखना और समय पर वैक्सीनेशन कराना जरूरी है ताकि संक्रमण न फैले.

बोकारोः ग्रामीण इलाकों में आज भी बकरी पालन को प्रमुख पशुधन के रूप में माना जाता है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई पशुपालक अस्वस्थ और बीमार बकरियों को खरीद लाते हैं, जिससे उन्हें बाद में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है इसी समस्या को देखते हुए बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने लोगों को खास टिप्स बताई हैं जिसके जरिए पशुपालक स्वस्थ बकरियों का चुनाव कर सकते हैं

नस्ल और शारीरिक संरचना की जांच करें
बकरी खरीदने से पहले उसकी नस्ल, वंशावली और शारीरिक संरचना अच्छी तरह जांच करना जरूरी है क्योंकि बीमार बकरियां आमतौर पर सुस्त होती हैं और उनका व्यवहार भी असामान्य दिखाई देता है वहीं स्वस्थ बकरी की पहचान के लिए पशुपालक को चारों पैरों की जांच अच्छे से करनी चाहिए ताकि लंगड़ापन और अन्य समस्या का पता चल सके वहीं असामान्य तरीके से खड़ी बकरी में पैरों में कमजोरी या सूजन बीमारी का संकेत हो सकता है.

इसके साथ ही बकरी की आंखों में गहरा पीला पन, नाक से लगातार पानी बहना और मुंह में बदबू जैसे लक्षण भी बीमारी की ओर इशारा करते हैं वहीं बकरी की कमर के पास की चौड़ाई भी अवश्य जांचें, क्योंकि इससे उसकी प्रजनन क्षमता और शारीरिक मजबूती का पता चलता है.

वहीं बकरी कि खरीदारी के समय थन को ध्यान से जांच करें कि कहीं सूजन, संक्रमण या घाव तो नहीं है , वहीं कई बार बकरियों की जीभ पर फोड़े निकलने कि समस्या आती हैं, जिससे वे ठीक से खा नहीं पातीं और धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं इसलिए बकरे जीभ भी साफ और स्वस्थ दिखनी चाहिए. श्वसन संबंधी बीमारी कि जांच के लिए बकरी की सांस पर भी ध्यान दें, क्योंकि बहुत तेज सांस लेना श्वसन संबंधी बीमारी का प्रमुख लक्षण होता है.

मल की जांच जरूरी
इसके अलावा बकरी के मल की जांच कर सकते हैं जिससे पानी जैसा पतला होना, खून आना या बदबूदार होना किसी गंभीर बीमारी की निशानी हो सकती है. इसके अलावा बकरी को खरीदकर लाने के बाद भी कुछ सावधानियां जरूरी है जैसे बकरियों का वैक्सीनेशन समय पर कराना चाहिए और कम से कम 14 दिनों तक उसे बाकी बकरियों से अलग रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित बीमारी का संक्रमण अन्य जानवरों में न फैले साथ ही पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार बकरी के पैरों को डिसइन्फेक्ट करना भी उपयोगी होता है.

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Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.

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बकरी खरीदने जा रहे हैं, तो पहले जान लें चयन का सही तरीका, नहीं होगा धोखा

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