Last Updated:
Success Story: हरि साह ने मुजफ्फरपुर के चांद केवाड़ी पंचायत में संघर्ष के बाद अमरूद की खेती से 20 लाख की बागवानी कर मिसाल कायम की है, उनकी कहानी किसानों के लिए प्रेरणा है.
हरि साह ने अपने 4 छोटे-छोटे बच्चों की परवरिश के लिए पहले रिक्शा चलाया. ताकि बच्चों को भूखा न रहना पड़े. संघर्षों से जूझते हुए उन्होंने धीरे-धीरे दूसरे की जमीन पर खेती शुरू की और आज लगभग 20 लाख रुपये की लागत के अमरूद के बाग के मालिक बनकर गांव और इलाके में मिसाल कायम कर रहे हैं.
हरि साह ने पश्चिमी दियारा इलाके में लीज पर ली गई जमीन पर 56 कट्ठा में अमरूद का बाग लगाया है. उनकी मेहनत और लगन को देखकर दूसरे गांवों के किसान भी उनसे सीखने आते हैं. उनका मानना है कि यदि उचित संसाधन और सरकारी सहयोग मिले, तो अमरूद की खेती से लाखों की कमाई संभव है. हालांकि दियारा क्षेत्र से फसल बाहर भेजने में सबसे बड़ी समस्या ट्रांसपोर्टेशन की लागत अधिक होने और खरीदारों तक न पहुंच पाने की आती है. इसी कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता है.
किसान हरि साह का मानना है कि यदि सरकार किसानों को दियारा इलाके में बाजार उपलब्ध कराने और परिवहन व्यवस्था में सहयोग दे, तो क्षेत्र के किसान भी फल उत्पादन से आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं. वर्तमान में वह अपने स्तर पर ही खेती को आगे बढ़ा रहे हैं और बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे हैं.
किसान हरि साह ने मेहनत से अमरूद का बाग खड़ा कर दिया है. यह उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी है. यह उन तमाम किसानों के लिए प्रेरणा है,स जो कठिनाइयों के बावजूद खेती से जुड़कर सफलता हासिल करना चाहते हैं. गांव के लोग भी उन्हें मेहनत और संघर्ष की मिसाल मानते हैं. हरि साह की कहानी बताती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो मुश्किल हालात में भी सफलता की नई राहें बनाई जा सकती हैं.
.