अलीगढ़: मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या आम हो जाती है. हल्की-सी लापरवाही या कमजोर इम्युनिटी लोगों को बार-बार इस परेशानी का शिकार बना देती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दी-जुकाम बार-बार क्यों होता है, इसके पीछे असली वजह क्या है और बिना दवा इसे कैसे ठीक किया जा सकता है? इन्हीं सवालों के जवाब एएमयू के एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शोध कर रहे शिरजील अहमद ने दिए.
क्यों होता है सर्दी, खांसी और जुकाम
एएमयू के एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शोध कर रहे शिरजील अहमद ने बताया कि सर्दी, खांसी और जुकाम एक बेहद आम समस्या है, जिसे सामान्य भाषा में कोल्ड कहा जाता है. यह बीमारी मुख्य रूप से वायरस के कारण होती है. वायरस सूक्ष्म जीव होते हैं और इसके कई प्रकार होते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से राइनो वायरस और इन्फ्लुएंजा वायरस शामिल हैं. आमतौर पर जो साधारण सर्दी-जुकाम होती है, वह राइनो वायरस से होती है, जबकि जो फ्लू या तेजी से फैलने वाला वायरल संक्रमण होता है वह इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होता है. इन दोनों के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आम लोगों को यह एक जैसी समस्या लगती है.
बार-बार सर्दी जुकाम होने की वजह
शोधकर्ता शिरजील का कहना है कि बार-बार सर्दी-जुकाम होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि वायरस अपने जेनेटिक मटेरियल यानी डीएनए में लगातार बदलाव करता रहता है. इसी कारण हर बार शरीर की इम्युनिटी उसे पूरी तरह पहचान नहीं पाती और संक्रमण दोबारा हो जाता है. वायरस शरीर में अलग-अलग जगह अटैच होकर इंफेक्शन फैलाता है. उन्होंने बताया कि आमतौर पर सर्दी-जुकाम तीन से पांच दिन में और अधिकतम सात दिन में अपने आप ठीक हो जाता है. ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना सही नहीं है.
खुद से न करें एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन
खासकर एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवाओं का खुद से सेवन नहीं करना चाहिए. एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन में दी जाती हैं, जबकि सर्दी-जुकाम ज्यादातर वायरल होता है. उन्होंने बताया कि अक्सर देखा गया है कि लोग सर्दी-जुकाम होते ही एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं, जिससे शरीर में दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इससे सबसे बड़ा खतरा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का होता है, जिसमें दवाएं भविष्य में असर करना बंद कर देती हैं.
घरेलू उपाय हैं कारगर
सर्दी-जुकाम से बचाव और राहत के लिए घरेलू उपाय काफी कारगर होते हैं. लक्षणों को कम करने के लिए गर्म पानी का सेवन करना चाहिए और शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है. अदरक की चाय, शहद और काली मिर्च का उपयोग गले की खराश, नाक बहने और सूजन में राहत देता है. ये उपाय वर्षों से आजमाए जाते रहे हैं और काफी प्रभावी माने जाते हैं.
डॉक्टर की सलाह से लें दवा
शिरजील का कहना है कि डॉक्टर की सलाह और दवा तभी लेनी चाहिए जब बुखार लगातार कई दिनों तक बना रहे, या लक्षण कम होने के बजाय और गंभीर होते जाएं. सामान्य स्थिति में बार-बार दवाइयों का सेवन शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है. इसलिए बिना जरूरत दवा, खासकर एंटीबायोटिक, लेने से बचना चाहिए जब तक कोई बैक्टीरियल संक्रमण साबित न हो.