खरीफ सीजन से पहले खेतों में नहीं कराया ये काम तो पड़ेगा महंगा, उत्पादन पर असर
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Agriculture News: खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने लोकल 18 से कहा कि लगातार कई वर्षों तक खेती करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है. कई बार सूक्ष्म पोषक तत्व खेतों से धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं.
खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी फसलों गेहूं, चना आदि की कटाई का काम शुरू हो गया है. धीरे-धीरे खेत खाली होने लगे हैं और कुछ समय बाद किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट जाएंगे. जिले में कई किसान गर्मी के मौसम में कपास की खेती भी करते हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को खरीफ बुआई से पहले खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए. इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है और खेती की लागत भी संतुलित रहती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ अच्छे बीज, समय पर खाद और पानी देना ही काफी नहीं होता. जमीन की स्थिति को समझना भी उतना ही जरूरी है. खेत की मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किस तत्व की कमी है, इसका पता मिट्टी परीक्षण से ही चलता है. इसी आधार पर किसान सही मात्रा में खाद और उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं.
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने लोकल 18 को बताया कि लगातार कई वर्षों तक खेती करने से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है. कई बार खेतों से सूक्ष्म पोषक तत्व धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं. इनकी कमी होने पर फसलों की बढ़वार पर असर पड़ता है और उत्पादन भी कम हो जाता है लेकिन मिट्टी की जांच से पता चलता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और किसकी मात्रा ज्यादा है. इसी आधार पर किसान अपनी फसल के लिए जरूरी खाद और पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं. इससे उत्पादन बेहतर होता है और अनावश्यक खर्च भी बच जाता है.
कहां कराएं मिट्टी परीक्षण?
इसके लिए किसान अपने गांव के ग्राम सेवक के माध्यम से भी मिट्टी की जांच करवा सकते हैं. इसके अलावा खरगोन मुख्यालय पर मृदा स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र पर किसान खुद जाकर मिट्टी की जांच करवा सकते हैं. यहां किसानों को यह सुविधा मुफ्त में भी मिलती है. इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र में भी मिट्टी परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है. हालांकि यहां किसानों को निर्धारित शुल्क देना होता है क्योंकि जांच की रिपोर्ट अनुसंधान केंद्र से तैयार होकर आती है.
मिट्टी परीक्षण का सही समय
वैज्ञानिक डॉ आरके सिंह ने कहा कि रबी फसलों की कटाई के बाद खेत खाली हो जाते हैं. यह समय मिट्टी परीक्षण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय किसान आराम से खेत से नमूना लेकर जांच के लिए भेज सकते हैं. उनका मानना है कि हर साल मिट्टी की जांच करानी चाहिए. अगर हर साल जांच संभव न हो, तो कम से कम तीन साल में एक बार जरूर करानी चाहिए क्योंकि एक बार की जांच रिपोर्ट लगभग तीन साल तक उपयोगी रहती है.
मिट्टी का नमूना लेते समय रखें ये सावधानी
कई बार किसान मिट्टी का नमूना लेते समय गलती कर देते हैं. इसकी वजह से जांच रिपोर्ट सही नहीं आती, इसलिए नमूना लेते समय ध्यान रखें कि नमूना हमेशा पूरे खेत से लेना चाहिए. अगर खेत एक एकड़ का है, तो कम से कम पांच अलग-अलग जगहों से मिट्टी का नमूना लेना चाहिए. इसके लिए खेत में फावड़े से टी आकार का गड्ढा बनाएं और गड्ढे के दोनों किनारों से एक-एक इंच मिट्टी निकालें. इसी तरह पांच अलग-अलग जगहों से मिट्टी एकत्रित करें. इसके बाद सभी मिट्टी को मिलाकर करीब 250 ग्राम नमूना एक साफ थैली में भर लें. नमूना देते समय थैली पर पूरी जानकारी लिखना भी जरूरी है. इसमें किसान का नाम, खेत का नाम, खसरा नंबर, पहले कौन सी फसल लगाई थी और आगे कौन सी फसल लगाने की तैयारी है, यह जानकारी लिखकर ही नमूना प्रयोगशाला में जमा करना चाहिए. इससे जांच रिपोर्ट सही तरीके से तैयार हो पाती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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