शुभमन गिल की तरह गर्दन में आ जाए अकड़ तो क्या अस्पताल में ही होगा इलाज या खुद से हो जाएगा ठीक, दर्द के डॉक्टर से जानिए इलाज

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What Happen when Shubman Gill Neck Spasm: भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल को मैच खेलते समय अचानक गर्दन में दर्द हुआ. दर्द इतना ज्यादा था कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा. डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें गर्दन की मांसपेशियों में स्पाज्म यानी एक तरह से सूजन हो गई. गर्दन में दर्द आज के जमाने में आम है. ऐसे में अगर शुभमन गिल की तरह किसी आम इंसान को हो जाए तो क्या उसे अस्पताल ले जाना पड़ेगा या यह खुद से ठीक हो जाएगा. इस बारे में हमने लोक नायक जयप्रकाश अस्पातल, दिल्ली में न्यूरो एनेस्थेसिया और पेन मैनजमेंट डिपार्टमेंट में एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भुवना आहुजा से बात की.

भारतीय क्रिकेट कप्तान शुभमन गिल को टेस्ट मैच के दौरान गर्दन में स्पाज्म हो गया.

Shubman Gill Neck Spasm details: शुभमन गिल को गर्दन में अकड़न हो गई. वे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इडेन गार्डेन कोलकाता में मैच खेल रहे थे. उन्हें वूडलैंड्स अस्पताल में भर्ती किया गया. शुभमन गिल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हैं. उनकी चोट पूरे देश के लिए बड़ी बात है. लेकिन फर्ज कीजिए कि अगर किसी आम इंसान को ऐसा हो जाए. अमूमन लोगों की गर्दन में अकड़न होती है. उससे गर्दन में दर्द बढ़ता है. कुछ लोगों में ठीक हो जाता है, कुछ लोगों में लंबे समय तक काफी दुख देता है. ऐसी परिस्थिति में हमें क्या करना चाहिए.क्या अस्पताल जाना चाहिए या खुद से ही कुछ करना चाहिए. अगर दर्द बर्दाश्त न हो तो क्या करना चाहिए. इन्हीं सब सवालों का जवाब जानने के लिए हमने लोक नायक जयप्रकाश अस्पातल, दिल्ली में न्यूरो एनेस्थेसिया और पेन मैनजमेंट डिपार्टमेंट में एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भुवना आहुजा से बात की. आइए इस दर्द के बारे में विस्तार से जानते हैं.

गर्दन में अकड़न या दर्द आखिर है क्या

डॉ. भुवना आहुजा ने बताया कि शुभमन गिल की गर्दन में वास्तव में क्या दिक्कत हुई यह सीटीएमआरआई जांच से पता चलेगा लेकिन अगर किसी आम इंसान को ऐसा हो जाता है तो इसमें कई चीजें हो सकती है. गर्दन में अचानक दर्द है तो यह सिर्फ स्पाज्म भी हो सकता है. इसमें गर्दन की मांसपेशियों में स्पाज्म या सूजन हो जाती है.यानी गर्दन की मांसपेशियां या मसल्स में कड़ापन आ जाता है. इसमें बहुत ज्यादा दर्द होने लगता है. दूसरा सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी भी हो सकता है. यह सिंपल स्पाज्म से ज्यादा तकलीफदेह है. सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी में सर्वाइकल डिस्क अपनी जगह से छिटकने लगती है. इस कारण गर्दन की नसें दब जाती है. जिससे पिंच वाला दर्द करता है.यानी तीखा दर्द करता है. डॉ. भुवना आहुजा ने बताया कि इसके लिए तीसरा कंडीशन भी हो सकती है. इसमें सर्वाइकल वर्टिब्रा वाली जटिलताएं भी सामने आ सकती है. गर्दन में रीढ़ की हड्डियों को जोड़ने वाले 7 छोटी-छोटी हड्डियों की बनी कशेरुकी होती है. इसे ही वर्टिब्रा कहते हैं. कभी-कभी इस वर्टिब्रा में भी चोट या प्रेशर पड़ने लगता है जिसके कारण गर्दन में अकड़न होने लगती है. मुख्य रूप से ये तीन कारण गर्दन में अकड़न, स्टीफनेस या दर्द के लिए जिम्मेदार होते हैं.लेकिन इसके अलावा आजकल सबसे ज्यादा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम होता है. यह बीमारी मोबाइल पर हमेशा चिपके रहने से होता है.कई बार ट्यूमर, कैंसर या पहले से कुछ बीमारियों के कारण भी ऐसा हो सकता है. ऐसे में जांच से पता चलेगा कि असल कारण क्या है.

इस दर्द से क्या-क्या होगा

डॉ. भुवना आहुजा ने बताया कि चाहे स्पाज्म हो, या सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी या सर्वाइकल वर्टिब्रा वाली समस्या हो, तीनों कंडीशन में मांसपेशियों के उपर दबाव पड़ता है. गर्दन की नसें दब जाती है. इन सबके कारण वहां खून की नलियां भी दब जाती है और इससे वहां की कोशिकाएं तक खून कम पहुंचता है. जब खून कम पहुंचेगा तो वह ऑक्सीजन भी कम पहुंचेगी. इन सबके कारण कुछ कोशिकाएं मरने लगेगी और कोशिकाओं के अंदर-बाहर आने वाले द्रव्य का संतुलन बिगड़ जाएगा. इससे भारी दर्द करेगा. इतना ही नहीं नसों के दब जाने से गर्दन की नसें जहां-जहां तक है वहां सिग्नल नहीं जाएगा जिसके कारण हाथ पर आपका नियंत्रण कम हो जाएगा और हाथ में सुन्नापन या झुनझुनी होने लगेगी. अगर इसका इलाज नहीं किया गया तो बाद में भारी परेशानियां भी हो सकती है.

क्या सबको अस्पताल जाना होगा

डॉ. भुवना कहती हैं कि यह डिपेंड करता है कि दर्द कितना गंभीर है या चोट कितनी गंभीर है. बहुत से मामलों में सात दिनों के अंदर हल्का-फुल्का एक्सरसाइज करने से ठीक हो जाता है. लेकिन अगर दर्द ठीक नहीं हो रहा है तो इसका मतलब है कि कुछ न कुछ गड़बड़ियां है, इसके लिए एमआरआई कराना जरूरी है. फिर उसी हिसाब से इलाज किया जाता है.

गर्दन में अकड़न का क्या है इलाज

सामान्य तौर पर इसके लिए नेक एक्सरसाइज कराई जाती है. डॉ. भुवना आहुजा कहती हैं कि अगर आपको गर्दन में दर्द हो रहा है तो डॉ. भुवना आहुजा कहती हैं कि हर इंसान को अस्पताल जाना जरूरी नहीं है. अगर दर्द ज्यादा नहीं है तो नेक मूव रोटेशन से यह ठीक हो जाता है. इसमें आइसोमैट्रिक एक्सरसाइज की जाती है. इसका तरीका आप फिजियोथेरेपिस्ट से जान सकते हैं. वहीं आप पेन किलर जेल लगा सकते हैं. दर्द के लिए पेनकिलर दवाइयां दी जाती है. नसों के दर्द के लिए अलग दवाइयां दी जाती है. लेकिन ध्यान रहना चाहिए कि गर्दन में दर्द है तो किसी भी हाल में मालिश वाले के पास न जाएं, इससे मामला बहुत बिगड़ सकता है.

Lakshmi Narayan

Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at News18. His role blends in-dep…और पढ़ें

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