पीरियड्स में नहीं हो रहा ब्लड फ्लो तो ये किस बात का संकेत? जान लें आप भी, नहीं तो हेल्थ पर…

सर्दियों या किसी भी मौसम में पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो कम होना या बिल्कुल न होना कई महिलाओं के लिए चिंता का कारण बन सकता है. यह शरीर में चल रहे कुछ बदलावों या स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. कई बार स्ट्रेस, हार्मोनल असंतुलन, वजन में अचानक बदलाव या थाइरॉइड जैसी समस्याएं पीरियड फ्लो को प्रभावित कर देती हैं. अगर शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन सही मात्रा में न बनें, तो ओव्यूलेशन बाधित हो सकता है और ब्लड फ्लो कम होने लगता है. कई महिलाएं PCOS की शुरुआती अवस्था में भी कम फ्लो, अनियमित पीरियड्स या केवल स्पॉटिंग का अनुभव करती हैं. इसके अलावा अत्यधिक फिजिकल एक्टिविटी, डाइट में पोषण की कमी, आयरन-डेफिशिएंसी या लगातार थकान भी पीरियड पैटर्न को बिगाड़ सकते हैं. इसलिए अगर हर महीने पीरियड्स में बदलाव नजर आएं, तो इसे हल्के में न लें और कारणों को समझने की कोशिश जरूर करें.

TOI की रिपोर्ट के अनुसार, कई बार पीरियड्स में ब्लड फ्लो कम होना शरीर की किसी इनर हेल्थ कंडीशन का भी सिग्नल हो सकता है. उदाहरण के तौर पर थाइरॉइड का बढ़ना–घटना (हाइपो या हाइपरथाइरॉइडिज्म) सीधे तौर पर मासिक धर्म को प्रभावित करता है, जिससे फ्लो बहुत कम हो सकता है या लेट हो सकता है. ज्यादा तनाव में रहने से ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन बढ़ जाता है और जब कोर्टिसोल बढ़ता है, तो रिप्रोडक्टिव हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है. इसका नतीजा यह होता है कि पीरियड्स या तो देर से आते हैं, बहुत हल्के होते हैं या कई बार आते ही नहीं. वजन का बहुत कम या बहुत ज्यादा होना भी शरीर के हार्मोनल सिस्टम को असंतुलित कर देता है, जिससे मासिक धर्म का फ्लो प्रभावित होता है. वहीं अगर आप हाल ही में कोई दवा ले रही हैं, जैसे हार्मोनल पिल या इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल, तो उससे भी पीरियड्स का फ्लो काफी हल्का हो सकता है. कई महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग के दौरान भी कम फ्लो या स्पॉटिंग का अनुभव करती हैं, क्योंकि उस समय शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन ज्यादा होता है.

अगर पीरियड्स में ब्लड फ्लो अचानक बहुत कम हो जाए और यह स्थिति लगातार दो–तीन महीनों तक बनी रहे, तो यह बात डॉक्टर से चर्चा करने लायक है, क्योंकि यह एनिमिया, PCOS, एंडोमेट्रियल थिनिंग या हार्मोनल कंडीशन की ओर इशारा कर सकता है. परफ्यूम्ड या केमिकल युक्त पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल, अत्यधिक वज़न कम करने वाली डाइट, स्लीप साइकिल की गड़बड़ी या बार-बार बीमारी भी फ्लो में बदलाव लाती है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि अपनी बॉडी के बदलावों पर ध्यान दें और अगर पीरियड हर बार अलग तरह से आ रहा है, तो कारण खोजें. हल्का फ्लो कभी-कभी होना सामान्य हो सकता है, लेकिन लगातार ऐसा होना सही नहीं माना जाता. सही डाइट, पर्याप्त पानी पीना, स्ट्रेस कम करना और नियमित नींद फ्लो को नार्मल रखने में मदद कर सकते हैं.

अगर कम फ्लो के साथ पेट में बहुत दर्द, चक्कर, अनियंत्रित थकान या लंबे समय तक पीरियड मिस होना भी शामिल हो, तो जल्द सलाह लेना बेहतर है. क्योंकि समय रहते समस्या की पहचान होने पर इसे ठीक करना आसान होता है और आगे की हेल्थ दिक्कतों से बचा जा सकता है. कुल मिलाकर, पीरियड्स का कम फ्लो होना एक संकेत है. कुछ शरीर के अंदर बदल रहा है, और उसे समझना और समय पर ध्यान देना आपकी हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है.

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