शादी में अड़चन? वरुथिनी एकादशी पर कर लें ये छोटा सा उपाय, जल्द होगा विवाह

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Ujjain News: वरुथिनी एकादशी का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत शुभ माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं.

उज्जैन. हिंदू धर्म में सालभर में कुल 24 एकादशी व्रत आते हैं, जो हर माह दो बार मनाए जाते हैं और प्रत्येक का विशेष धार्मिक महत्व होता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की एकादशी तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख-समृद्धि आती है. अब वैशाख माह की पहली एकादशी नजदीक है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है, साथ ही पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है. वैशाख महीने की पहली एकादशी की तिथि को लेकर थोड़ी सी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, तो आइए उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि वैशाख मास की पहली एकादशी कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या है.

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल वरुथिनी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आती है. इस बार वरुथिनी एकादशी तिथि 13 अप्रैल को रात 1 बजकर 17 मिनट के लगभग से शुरू होगी और इसका समापन 14 अप्रैल को रात 1 बजकर 08 मिनट के लगभग होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल दिन सोमवार को रखा जाएगा और इसका पारण 14 अप्रैल 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा.

वरुथिनी एकादशी का महत्व
वरुथिनी एकादशी का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. खासतौर पर जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी है. ऐसे जातक पूरे दिन व्रत रखें और सच्चे मन से भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का जाप करें. साथ ही माता लक्ष्मी को हल्दी की गांठ अर्पित करें. मान्यता है कि ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और जल्द ही इच्छाएं पूरी होने लगती हैं.

एकादशी पर न करें अन्न का सेवन
एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए इस दिन कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है. मान्यता है कि जो लोग व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें भी इस दिन चावल का सेवन करने से बचना चाहिए. साथ ही बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है, इसलिए इन कार्यों से दूरी बनाए रखें. इस दिन ब्राह्मणों को दान देना विशेष पुण्यदायी होता है, जिससे भगवान की कृपा प्राप्त होती है. वहीं व्रत के पारण के बाद अन्न का दान करना भी बेहद शुभ माना गया है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाने में सहायक होता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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