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Risks of Persistent Acidity: एसिडिटी की समस्या लोगों को काफी परेशान कर देती है. इससे निजात पाने के लिए लोग कई नुस्खे आजमाते हैं, लेकिन ट्रीटमेंट से बचते हैं. अगर एसिडिटी लंबे समय तक बनी रहे तो यह GERD, इसोफैजाइटिस, पेट के अल्सर और बैरेट्स इसोफैगस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी होता है.
क्रॉनिक एसिडिटी से पेट में अल्सर हो सकते हैं.
Chronic Acidity and Its Impact: हमारे पेट की सेहत का सीधा संबंध खानपान से होता है. अगर आप हेल्दी फूड्स का सेवन करेंगे, तो पाचन तंत्र ठीक बना रहेगा. खानपान बिगड़ जाएगा, तो इससे पेट की सेहत पर भी बुरा असर पड़ेगा. अनहेल्दी खान-पान, तनाव और गलत लाइफस्टाइल की वजह से एसिडिटी की समस्या बढ़ती जा रही है. कभी-कभी एसिडिटी होना सामान्य माना जाता है, लेकिन जब यह परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. लगातार एसिडिटी रहना इस बात का संकेत है कि पाचन तंत्र में कोई गड़बड़ी है, जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि लंबे समय तक एसिडिटी रहने से सबसे पहले गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का खतरा बढ़ जाता है. इस कंडीशन में पेट का एसिड बार-बार खाने की नली में ऊपर की ओर आने लगता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकारें और गले में जलन महसूस होती है. अगर GERD का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह खाने की नली को नुकसान पहुंचा सकता है. क्रॉनिक एसिडिटी से इसोफैजाइटिस नाम की समस्या भी हो सकती है, जिसमें खाने की नली की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है. इससे निगलने में दर्द, सीने में जलन और कभी-कभी खून की उल्टी जैसी गंभीर स्थिति भी बन सकती है.
डॉक्टर ने बताया कि लगातार एसिड के संपर्क में रहने से हमारे इसोफैगस की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं. लगातार एसिडिटी रहने पर पेट में अल्सर बनने का खतरा भी बढ़ जाता है. पेट की अंदरूनी परत पर एसिड का प्रभाव लंबे समय तक रहने से घाव बन सकते हैं, जिससे पेट दर्द, उल्टी, मतली और कभी-कभी ब्लीडिंग तक हो सकती है. अल्सर की स्थिति गंभीर होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कुछ मामलों में लंबे समय तक एसिडिटी रहने से बैरेट्स इसोफैगस जैसी गंभीर स्थिति डेवलप हो सकती है. इसमें खाने की नली की कोशिकाओं की संरचना बदलने लगती है, जिससे आगे चलकर इसोफैगस कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि यह स्थिति हर मरीज में नहीं होती, लेकिन लंबे समय से एसिडिटी झेल रहे लोगों में इसका रिस्क अधिक माना जाता है.
एक्सपर्ट ने बताया कि लंबे समय तक एसिडिटी से बचने के लिए समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है. संतुलित भोजन, मसालेदार और तैलीय चीजों से दूरी, समय पर खाना, तनाव कम करना और जरूरत पड़ने पर दवाइयों का सही इस्तेमाल एसिडिटी को कंट्रोल करने में मदद करता है. अगर सीने में लगातार जलन, निगलने में दिक्कत या वजन तेजी से कम हो रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि गंभीर बीमारियों से बचा जा सके.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें