Last Updated:
झारखंड में महुआ को लंबे समय से सिर्फ देसी शराब से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अब हजारीबाग की महिलाओं ने इस धारणा को बदल दिया है. उन्होंने महुआ से स्वादिष्ट और पौष्टिक लड्डू बनाकर न सिर्फ इसकी नई पहचान बनाई है, बल्कि इसे रोजगार का जरिया भी बना लिया है. पारंपरिक संसाधन को नए तरीके से इस्तेमाल करते हुए ये महिलाएं आज आत्मनिर्भर बन रही हैं और समाज को यह संदेश दे रही हैं कि सही सोच और मेहनत से किसी भी चीज को नई दिशा दी जा सकती है. रिपोर्ट- परमजीत कुमार
झारखंड में महुआ का पेड़ बड़ी मात्रा में पाया जाता है. गांवों में रहने वाले लोग महुआ के नाम से भली-भांति परिचित हैं. लेकिन जब भी महुआ का नाम लिया जाता है, तो अधिकतर लोगों के मन में सबसे पहले शराब का ख्याल आता है. क्योंकि लंबे समय से महुआ का इस्तेमाल मुख्य रूप से देसी शराब बनाने के लिए ही किया जाता रहा है.
यही वजह है कि महुआ की पहचान भी धीरे-धीरे इसी रूप में बन गई. लेकिन अब हजारीबाग की कुछ महिलाओं ने इस सोच को बदलने का बीड़ा उठाया है. इन महिलाओं ने महुआ को शराब तक सीमित न रखते हुए उससे स्वादिष्ट और पौष्टिक लड्डू बनाकर एक नई मिसाल पेश की है.
दरअसल, इन दिनों देवघर में खादी स्वदेशी मेला का आयोजन किया गया है. इस मेले में अलग-अलग जिलों से लोग अपने पारंपरिक उत्पाद लेकर पहुंचे हैं. इसी मेले में हजारीबाग जिले की महिलाएं भी अपने खास उत्पाद के साथ आई हैं. ये महिलाएं महुआ से बने लड्डू और भुंजा लोगों को चखा रही हैं. खास बात यह है कि जो भी एक बार इस लड्डू का स्वाद ले रहा है, वह इसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पा रहा है. देवघर के लोग भी इस नए स्वाद को काफी पसंद कर रहे हैं और बड़ी संख्या में इन उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
हजारीबाग के चुरचू प्रखंड के चुनरो गांव की रहने वाली वैष्णवी देवी बताती हैं कि उनके इलाके में महुआ के पेड़ काफी संख्या में हैं. पहले गांव के लोग महुआ का इस्तेमाल सिर्फ शराब बनाने के लिए ही करते थे. लेकिन इससे समाज में कई तरह की समस्याएं भी पैदा होती थीं. ऐसे में बिहार की एक संस्था के माध्यम से उन्हें यह जानकारी मिली कि महुआ से कई तरह के खाद्य पदार्थ भी बनाए जा सकते हैं, जिनमें लड्डू और भुंजा प्रमुख हैं. इस जानकारी ने गांव की महिलाओं को एक नई दिशा दिखाई.
इसके बाद गांव की महिलाओं ने मिलकर एक समूह बनाया और महुआ से अलग-अलग खाद्य उत्पाद तैयार करने का प्रयोग शुरू किया. शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर किया गया, लेकिन धीरे-धीरे लोगों को इन उत्पादों का स्वाद पसंद आने लगा. इसके बाद महिलाओं ने इसे एक छोटे व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. आज यही महिलाएं महुआ से बने उत्पादों के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं और साथ ही अपनी आमदनी भी बढ़ा रही हैं.
महिला कारीगर छवि कुमारी बताती हैं कि महुआ का फल प्राकृतिक रूप से मीठा और पोषक तत्वों से भरपूर होता है. लड्डू बनाने से पहले महुआ के फल को अच्छी तरह साफ किया जाता है और उसका सही तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है. इसके बाद इसमें गुड़ और घी मिलाकर लड्डू तैयार किए जाते हैं. यह लड्डू न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी माने जाते हैं.
आज हजारीबाग की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और मेहनत मिले तो किसी भी पारंपरिक संसाधन को नई पहचान दी जा सकती है. महुआ, जिसे कभी सिर्फ शराब के रूप में जाना जाता था, आज उसी से बने लड्डू लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं. यह पहल न सिर्फ समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रही है.
.