मजदूरी करते वक्त आया आइडिया, मात्र 15,000 से शुरू कर दिया बिजनेस, आज 12 लोगों के मालिक!

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Used Car Dealer Burhanpur: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में रहने वाले सुखविंदर सिंह कोचर ने मात्र 15 हजार रुपये से अपने बिजनेस की शुरुआत की और आज 12 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. गैरेज की नौकरी से मिला आइडिया उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उन्होंने पुरानी गाड़ियां खरीदकर मॉडिफाई करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपना बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया. निमाड़ क्षेत्र में वे गाड़ियों के मीटर सुधारने वाले पहले कारीगर के रूप में पहचाने जाते हैं. उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है.

Small Business Success Story: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है. बस स्टैंड इलाके में “गुरु कृपा ऑटो डील” चलाने वाले सुखविंदर सिंह कोचर ने नौकरी से सीखा हुनर और उसी से खड़ा कर दिया लाखों का कारोबार.

गैरेज की नौकरी से मिला बिजनेस का आइडिया
सुखविंदर सिंह कोचर बताते हैं कि साल 2002 में उन्होंने एक गैरेज पर काम करना शुरू किया था. वहां काम करते-करते उन्होंने पैसे जमा किए. उसी दौरान उन्हें आइडिया आया कि क्यों न पुरानी गाड़ियां खरीदकर उन्हें मॉडिफाई कर बेचा जाए. उन्होंने पहली गाड़ी खकनार क्षेत्र से खरीदी. उसे ठीक किया, नया लुक दिया और बेच दिया. वहीं से उनका आत्मविश्वास बढ़ा. इस काम की प्रेरणा उन्हें अपने पिता कमल वीर सिंह कोचर से मिली, जो 1986 से बस स्टैंड क्षेत्र में गैरेज चला रहे थे.

सिर्फ 15 हजार से शुरू, आज लाखों का टर्नओवर
सुखविंदर ने मात्र 15 हजार रुपये लगाकर अपने बिजनेस की शुरुआत की. शुरुआत आसान नहीं थी. कई बार नुकसान भी हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज 17 साल बाद उनकी दुकान पर 12 लोग काम कर रहे हैं. वे सिर्फ नई और पुरानी गाड़ियां खरीद-बेच ही नहीं करते, बल्कि टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर के मीटर सुधारने का खास काम भी करते हैं. सालाना 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई हो रही है और अब तक वे 2000 से ज्यादा गाड़ियां बेच चुके हैं.

निमाड़ क्षेत्र के पहले मीटर सुधारने वाले कारीगर
सुखविंदर सिंह कोचर को निमाड़ क्षेत्र में गाड़ियों के मीटर सुधारने वाले पहले कारीगर के रूप में जाना जाता है. अगर बुरहानपुर जिले में किसी की गाड़ी का मीटर खराब हो जाए, तो लोग सीधे उनकी दुकान का रुख करते हैं. वे कहते हैं कि जो हुनर मैंने अपने पिता से सीखा, वही आज मेरी पहचान बन गया है. उनकी मेहनत और सिखाई कला ही मेरी असली पूंजी है.

दूसरों को भी देना चाहते हैं रोजगार
सुखविंदर का सपना सिर्फ खुद आगे बढ़ना नहीं है, बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देना है. वे चाहते हैं कि युवा नौकरी करने के साथ-साथ कुछ नया सीखें और अपने पैरों पर खड़े हों. उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर मेहनत और लगन हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता की मिसाल बन सकती है.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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