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Why Greenland is Green: जिस ग्रीनलैंड के पीछे इस वक्त दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स पागल है, वो जगह यूं ही तो नहीं होगी. अब तक हम सब जान चुके हैं कि ये खनिजों का भंडार है लेकिन कभी आपने सोचा कि बर्फ के इस रेगिस्तान का नाम भला ग्रीनलैंड क्यों रखा गया होगा? वो भी तब, जब यहां कुछ भी ‘ग्रीन’ नहीं है. बर्फ के अलावा यहां कोई हरियाली नहीं है.
Why Greenland is Green: ग्रीनलैंड पहले भी चर्चाओं में रहा है, हालांकि जैसा इस वक्त है, ऐसा बिल्कुल नहीं. ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. यहां बर्फ की चट्टानें और बर्फीली जमीन है और अपने पिघलते ग्लेशियरों की वजह से कई बार धरती के इकोसिस्टम को लेकर इसकी चर्चा होती रही है. वो बात अलग है कि इसका नाम ग्रीनलैंड होने के बाद भी इस देश में हरियाली नहीं है.

सबसे अजीब बात ये है कि इसका नाम ग्रीनलैंड है जबकि इस द्वीप पर हरियाली का नामोनिशान नहीं है.<br />यह कोई महाद्वीप नहीं है लेकिन ग्रीनलैंड का कुल क्षेत्रफल 21.6 लाख वर्ग किलोमीटर है इसका 80 फीसदी हिस्सा बर्फ की चादर से ढका है. यहां की आबादी सिर्फ 56 हजार के आसपास है यह दुनिया के सबसे कम घनत्व वाला देश कहलाता है.

ग्रीनलैंड को ग्रीनलैंड नाम मिलने की भी एक रोचक कहानी है. नॉर्स की कहानियों के मुताबिक यहां डेनमार्क से एक आइसलैंड के शख्स को मर्डर के आरोप में निर्वासित किया गया था. उसका नाम एरिक द रेड था. इसने यहां आकर लोगों का बसाना शुरू किया. तब भी यहां बर्फ थी लेकिन लोगों को आकर्षित करने के लिए उसने इलाके का नाम ग्रीनलैंड रख दिया.
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ग्रीनलैंड के बारे मे एक बात की खास तौर से चर्चा दुनिया भर में होती रहती है. वह यह कि यहां पिछले 30 सालों में बहुत बड़ा प्राकृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. यहां की बर्फ की चादरें तेजी से पिघल रही हैं और यहां के कई इलाकों में धीरे धीरे हरियाली पनप रही है और फैल रही है.अब ग्रीनलैंड वाकई ग्रीन हो रहा है, तभी भी अमेरिका की नजर इस पर है. बर्फ के पिघलने से नए रास्ते बनेंगे और मिनरल्स से भरपूर इस जगह पर आने के लिए अमेरिका बेकरार है.

ग्रीनलैंड का ज्यादातर इलाका बर्फ और ग्लेशियरों से गिरा है. ऊपर से दिखने में ये आर्कटिक देश सफेद दिखता है, फिर भी इसका नाम ग्रीनलैंड हैं. वैसे, एक हकीकत यह भी है कि एक समय था जब यह सही में हरा भरा था, वैज्ञानिक बताते हैं कि 25 लाख साल पहले यहां हरिायली हुआ करती थी.

The Greenland landscape is seen during a commercial airline flight from Kangerlussauq to Sisimiut in this photo taken May 14, 2007. REUTERS/Bob Strong (GREENLAND)

ग्रीनलैंड फिलहाल स्वायत्त है और डेनमार्क का हिस्सा है. वो बात अलग है कि डोनाल्ड ट्रंप की टेढ़ी नजर इस द्वीप पर पड़ चुकी है. रोचक बात यह है भौगोलिक हिसाब से वह उत्तरी अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा है, लेकिन इस विशाल द्वीप का लंबे समय से यूरोप से ज्यादा नाता रहा है.

1721 से यह डेनमार्क का उपनिवेश रहा है, लेकिन यह डेनमार्क का हिस्सा 1953 में ही बना है. 1979 में ग्रीनलैंड को होमरूल मिला है. धीरे धीरे ग्रीनलैंड स्वायत्त शासन की ओर बढ़ ही रहा था कि उसकी किस्मत में डोनाल्ड ट्रंप आ गए. अब यहां की शांति और राजनीति, दोनों ही उथल-पुथल से भर गई है.

कई इतिहासकार मानते हैं इंसान ग्रीनलैंड में 2500 ईसा पूर्व में आए थे. इस देश का इतिहास 4500 साल पुराना है. निर्जन से लगने वाले इस देश का इतना पुराना इतिहास हैरात की बात लगती है, हालांकि यहां आने वाले लोग ज्यादा टिक नहीं पाते थे. 10वीं सदी में आइसलैंड से आने वाले नॉर्समैन यहां आकर बसे, लेकिन वे भी 15 वीं सदी तक गायब हो गए. वहीं 13वीं सदी में एशिया से आए इन्युइट के वंशज आज भी यहां रहते हैं, जिन्होंने यहां की संस्कृति बनाई.

इतना बड़ा द्वीप होने के बावजूद ग्रीनलैंड ऐसा देश है जहां सड़क नहीं है और किसी तरह का रेलवे सिस्टम नहीं है. हां, यहां कुछ छोटे शहरों के अंदर सड़कें जरूर हैं. शहरों के बीच सफर करने के लिए विमान, नावें, हेलीकॉप्टर और कुत्तागाड़ी का इस्तेमाल होता है.

ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां 25 मई से 25 जुलाई के बीच सूर्य डूबता ही नहीं और दिन रात सूर्य को देखा जा सकता है. मिडनाइट सन को देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं. उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे बड़ा दिन 21 जून ग्रीनलैंड के लिए भी बड़ा दिन है और इस दिन यहां राष्ट्रीय अवकाश होता है.

कम लोग जानते हैं कि ग्रीनलैंड में ठीक-ठाक गर्मी हो जाती है. यहां गर्मियों के दिन में अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक हो जाता है. यही वह दौर होता है जब पर्यटक बाहर से यहां सबसे ज्यादा आते हैं, जब यहां गर्म पानी की झरने या चश्मे भी देखने को मिलते हैं.
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