मोहन ढाकले/बुरहानपुर: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के रास्तीपूरा इलाके में रहने वाले योगेश महाजन की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो नौकरी छोड़कर कुछ अपना करने का सपना देखते हैं. बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद योगेश ने एक आईटी कंपनी में अच्छी सैलरी वाली नौकरी शुरू की थी, लेकिन मन कहीं और था.
लॉकडाउन बना टर्निंग पॉइंट
योगेश बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि नौकरी के भरोसे रहना हमेशा सुरक्षित नहीं होता. उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि अब खुद का काम शुरू करना है. साल 2021 में उन्होंने करीब 1 लाख रुपये का लोन लेकर कपड़ों की दुकान खोल दी. शुरुआत आसान नहीं थी, कई दिन ऐसे भी आए जब दुकान में एक भी ग्राहक नहीं आता था.
बच्चों के कपड़ों से मिली पहचान
योगेश ने कमल टॉकीज क्षेत्र में बच्चों के रेडीमेड कपड़ों की दुकान शुरू की. उन्होंने खासतौर पर बच्चों के सस्ते और अच्छे कपड़ों पर फोकस किया. दुकान में ₹500 में बच्चों के कपड़ों की एक जोड़ी मिल जाती है, यही वजह है कि ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती गई.
गुजरात से मुंबई तक से मंगाते हैं माल
योगेश बताते हैं कि वे गुजरात, दिल्ली, मुंबई और आगरा से कपड़े लाते हैं. थोक में सस्ता माल मिलने की वजह से वे ग्राहकों को भी कम दाम में कपड़े दे पाते हैं. दुकान सुबह से देर रात तक खुली रहती है, जिससे हर वर्ग के ग्राहक आसानी से खरीदारी कर पाते हैं.
मेहनत रंग लाई, अब सालाना लाखों की कमाई
शुरुआती संघर्ष के बाद अब योगेश का बिजनेस अच्छी रफ्तार पकड़ चुका है. वे सालाना 4 से 6 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं और 3 से 4 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. सिर्फ 26 साल की उम्र में योगेश खुद को एक सफल कारोबारी मानते हैं.
युवाओं के लिए संदेश
योगेश कहते हैं कि अगर आप अपने बिजनेस को समय और मेहनत देते हैं, तो सफलता जरूर मिलती है. शुरुआत में डर लगता है, लेकिन खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है. यह कहानी साबित करती है कि सही सोच, मेहनत और हिम्मत हो, तो छोटा बिजनेस भी बड़ी पहचान बना सकता है.
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