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आज अर्चना का कप मैन्युफैक्चरिंग उद्योग क्षेत्र में एक जाना-माना नाम बन चुका है. उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है और अपने जैसे कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है. उनकी सफलता ने अन्य महिलाओं को भी प्रे…और पढ़ें
2019 में अर्चना की शादी बनगांव निवासी संजीव कुमार कामत से हुई उस वक्त संजीव सहारा इंडिया में नौकरी कर रहे थे. शादी के 2 साल बाद संजीव की नौकरी चली गई, फिर क्या था संजीव के साथ उनकी पत्नी यह सोच में पड़ गई कि अब घर कैसे चलेगा? आगे क्या होगा? उस वक्त संजीव को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर चट्टान की तरह संजीव की पत्नी खड़ी हो गई और उन्हें बिजनेस का एक आईडिया दिया. फिर क्या था सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से जुड़कर नई शुरुआत की. लॉटरी में अर्चना का नाम सामने आया जिसके बाद अर्चना और उनके पति को उस वक्त ऐसी खुशी महसूस हुई कि उन्हें अब लगा कि अब जीवन पटरी पर आ सकता है.
जानकारी देते हुए सफल उद्यमी महिला अर्चना कुमारी बताती हैं कि 2019 में उनकी शादी हुई थी. शादी के 2 साल बाद सहारा इंडिया में काम कर रहे हैं उनके पति की नौकरी चली गई घर के सभी सदस्य चिंतित हो गए लेकिन उस वक्त पति का हौसला बढ़ाते हुए बिजनेस करने का आईडिया दिया. लेकिन सबसे बड़ी समस्या पैसे की थी, फिर सरकार की योजना के बारे में जानकारी मिली आवेदन किया गया आवेदन करने के बाद लॉटरी में उनका नाम आया जहां उन्हें लगभग ₹800000 का लोन प्रदान किया गया, जिसकी मदद से मैन्युफैक्चरिंग का उद्योग खोल दिल्ली से मशीन मंगवाई और कारोबार को शुरू किया. कारोबार बेहतर तरीके से चलने लगा मार्केट में डिमांड बढ़ती गई और जीवन पटरी पर आ गया. यह योजना खास तौर पर महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई. सरकार की यह स्कीम ऐसे वक्त पर मुझे मिली जिस वक्त में मुझे उसकी काफी जरूरत थी.
क्या है इस योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का मकसद है महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे स्वयं का रोजगार पैदा कर सकें और देश की आर्थिक प्रगति में अपना योगदान दे सकें. अर्चना ने इस योजना का पूरा फायदा उठाया और कप मैन्युफैक्चरिंग का उद्योग शुरू किया. यह उद्योग न केवल उनके लिए कामयाबी का रास्ता बना, बल्कि उन्होंने अपने आसपास के कई लोगों को भी रोजगार के अवसर दिए.
रोजाना करीब 20 हजार की कमाई
कप मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योग की मांग हमेशा बनी रहती है, क्योंकि कप एक रोजाना इस्तेमाल का सामान है. अर्चना ने इस जरूरत को समझकर इसे व्यवसाय का रूप दिया. उन्होंने आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करके गुणवत्ता पर ध्यान दिया. इसके अलावा, अर्चना ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करके काम पर रखा, जिससे उन्हें स्थायी रोजगार मिला. आज अर्चना और उनके पति मिलाकर रोजाना लगभग 20 हजार की कमाई कर रहे हैं और उनका जीवन भी अब बेहतर तरीके से चल रहा है.
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