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Katihar Preeti Success Story: हादसे ने पति को बेड रेस्ट पर पहुंचाया, तो कटिहार की कुमारी प्रीति ने परिवार की कमान थाम ली. शून्य से शुरुआत कर प्रीति ने घर पर ही प्रज्ञा सत्तू नाम से अपना ब्रांड खड़ा किया. आज वे प्रतिदिन एक क्विंटल सत्तू का उत्पादन कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. तंगी को अपनी ताकत बनाने वाली इस महिला उद्यमी की प्रेरणादायक कहानी, जो अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं.
मनीष कुमार ठाकुर/कटिहार: जिंदगी कब किस मोड़ पर परीक्षा ले ले कोई नहीं जानता. लेकिन जो इस परीक्षा में तपकर निकलता है वही समाज के लिए मिसाल बनता है. कटिहार जिले के हवाईअड्डा (शरीफगंज) क्षेत्र की रहने वाली कुमारी प्रीति की कहानी आज उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है. जो कठिन परिस्थितियों में घुटने टेकने के बजाय लड़ना जानती हैं. एक भीषण सड़क हादसे ने प्रीति की दुनिया उजाड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उसी राख से अपनी सफलता का साम्राज्य खड़ा कर दिया.
वह काला दिन और संघर्ष की शुरुआत
कुमारी प्रीति के पति एलआईसी (LIC) एजेंट के रूप में परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक सड़क हादसे ने उनकी खुशहाल जिंदगी में अंधेरा भर दिया. हादसे में पति को गंभीर चोटें आईं और डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी. घर की आय का एकमात्र स्रोत बंद हो गया. इलाज के भारी खर्च ने परिवार को आर्थिक तंगी के दलदल में धकेल दिया.
चूल्हे-चौके से ‘प्रज्ञा ब्रांड’ तक का सफर
जब घर चलाना मुश्किल हुआ तो प्रीति ने चारदीवारी से बाहर निकलकर कुछ अलग करने की ठानी. उन्होंने बाजार में मिलने वाले मिलावटी खाद्य पदार्थों के बीच शुद्धता को अपनी ताकत बनाया. प्रीति ने घर पर ही सत्तू, बेसन और पारंपरिक बड़ी बनाना शुरू किया. शुरुआत में वे खुद ही चने पिसवातीं, उसे छानतीं और हाथों से पैकिंग कर बाजार तक पहुंचाती थीं. उनके हाथों के बने सत्तू का स्वाद और शुद्धता इतनी पसंद की गई कि मांग तेजी से बढ़ने लगी. अपनी पहचान को और मजबूत करने के लिए प्रीति ने एक बड़ा कदम उठाया और अपने काम को प्रज्ञा सत्तू-100 प्रतिशत शुद्ध नाम से ब्रांड की शक्ल दी.
आज प्रीति किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. वे हर दिन करीब एक क्विंटल (100 किलो) सत्तू तैयार करती हैं. उनके उत्पादों की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि अब उन्हें मंडी या दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, बल्कि दुकानदार और ग्राहक खुद उनके घर पहुंचकर खरीदारी करते हैं. सत्तू के साथ-साथ उनके द्वारा बनाए गए अचार, बेसन और बड़ी की मांग भी कटिहार के स्थानीय बाजारों में काफी अधिक है. सत्तू 140 रुपया किलो और बेसन 120 रुपया किलो और बड़ी 300 रुपया केजी बाजार में मिलता है.
सिर्फ खुद की तरक्की नहीं, दूसरों को भी दिया सहारा
प्रीति का संघर्ष अब एक सामाजिक बदलाव का रूप ले चुका है. जब काम का दायरा बढ़ा, तो उन्होंने आसपास की जरूरतमंद महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ लिया. आज उनके इस लघु उद्योग से कई और महिलाओं के घर का चूल्हा जल रहा है. कुमारी प्रीति की यह कहानी साबित करती है कि व्यापार शुरू करने के लिए केवल मोटी पूंजी की नहीं, बल्कि अटूट इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है. जो महिला कल तक केवल घर संभालती थी, आज वह अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ और समाज के लिए ‘सेल्फ-मेड’ एंटरप्रेन्योर की मिसाल है.
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