बालाघााट: बालाघााट में बीते एक साल वन्य प्राणियों और मानव के संघर्ष के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. बीते एक साल 5 मांसाहारी वन्य प्राणी और इतने ही लोगों ने बाघ के हमले में अपनी जान गंवाई है. वहीं, 2 लोग घायल हुए हैं. हालांकि, सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया था. इलाके बढ़ रहे इस संघर्ष से लोगों में खौफ का माहौल है. अब एक ताजा मामला कटंगी के आंजनबिहारी से सामने आया है, जहां एक बाघिन की मौत हुई है.
बाघ का हुआ अंतिम संस्कार
12 दिसंबर को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के मुताबिक, डीएफओ की मौजूदगी में बाघ का अंतिम संस्कार हुआ. लेकिन इससे पहले बाघ का पोस्टमार्टम किया गया. अब शुरुआती जांच के मुताबिक, संभावना जताई जा रही है कि बाघिन की मौत का कारण करंट लगना है. वहीं, डॉग स्क्वायड और जांच टीम मौके पर पहुंची. उन्हें सबूत इकट्ठा कर जांच शुरु कर दी है. लेकिन सवाल तो तब शुरु होते है जब नवंबर में ही बाघ गणना शुरू हुई और नियमित गश्ती के दावे करने वाले वन विभाग के गश्त में बाघिन की मौत हो जाती है.
बाघ के हमले में 5 लोगों की मौत और 2 घायल
आपको बता दें कि चार मामले कटंगी वन परिक्षेत्र से है, तो एक मामला सोनवाने वन अभयारण्य से जुड़ा हुआ है. ऐसे में दोनों ही क्षेत्र कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है. ऐसे में इस इलाके में वन्य प्राणी ही सुरक्षित नहीं है, तो कहां सुरक्षित रहेंगे. उसी इलाके में लोगों पर बाघ ने कई बार हमला किया है, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई है और 2 लोग घायल हुए है.
पहली घटना बीते साल 22 दिसंबर 2024 में हुई थी, जिसमें खैरलांजी निवासी सुखराम उइके की मौत हुई थी. वह अपने खेत में गए थे. अचानक बाघ ने हमला कर दिया और उनका शव घटनास्थल से 200 मीटर दूर क्षत-विक्षिप्त हालत में मिला. वहीं, दूसरी घटना है. 3 मई को बाघ ने किसान प्रकाश पाने पर हमला कर उनकी जान ले ली थी. रविवार को ग्रामीणों ने बताया कि बाघ एक बार फिर प्रकाश पाने के खेत की झोपड़ी तक आ गया था.
क्यों होता है संघर्ष
बालाघाट के इस इलाकों में क्यों मानव और वन्य प्राणियों के बीच संघर्ष क्यों बढ़ा रहा है. ये जानने के लिए लोकल 18 ने वन विभाग में एसडीओ बीआर सिरसाम से बातचीत की. उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में मानव जब वन्य प्राणियों के क्षेत्र में जाता है, तब टाइगर असुरक्षित महसूस करता है. ऐसे में वह मानव पर हमला करता है. वहीं, जिन इलाकों में बाघ की मौत हुई है वह कान्हा नेशनल पार्क और पेंच का कॉरिडोर भी है. ऐसे में वन्य प्राणियों की बढ़ती आबादी अपने लिए नई-नई टेरिटोरी बना रही है. ऐसे में बाघ रिहायशी इलाकों में आ भी जाते और इस तरह के हादसे हो रहे है.
जैव विविधता पर खतरा
जिस इलाके में घटनाएं हो रही है, वहां के जैव विविधता पर खतरा है, सालों पहले वन विभाग के निगम ने इमारती पौधों को रोपा था, जिसमें बांस, सागौन और शीशम है. ऐसे में प्राकृतिक वन से छेड़छाड़ हुई. ऐसे में शाकाहारी वन्य प्राणी (जंगली सुअर,चित्तल सहित अन्य) जंगल से लगे खेतों में आना शुरु कर दिया और उनके पीछे-पीछे मांसाहारी वन्य प्राणी जैसे बाघ, तेंदुआ भी आने लगे. ऐसे में उन्हें रिहायशी इलाके में आसान शिकार मिलने लगे. इसके बाद बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणी उसी इलाके में घटनाएं भी हुई.
एसडीओ बीआर सिरसाम ने बताया कि अगर मानव का सामना बाघ से हो जाए, तो शांत रहना चाहिए. उसे पीठ नहीं दिखाना चाहिए और पीछे की ओर उल्टा चलना चाहिए.
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