योग महिलाओं को बर्नआउट से उबरने में कैसे कर सकता है मदद? यहां जानें!

Corporate Wellness Reset: कई प्रोफेशनल महिलाओं के लिए सफलता अक्सर शांति की कीमत पर आती है. मीटिंग्स से कैलेंडर भरे रहते हैं, डेडलाइन देर रात तक खिंच जाती हैं, और खुद की सेहत धीरे-धीरे सबसे नीचे चली जाती है. लीडरशिप, देखभाल और करियर ग्रोथ हमेशा एक साथ चलती रहती है. इसका नतीजा है थकावट का एक जाना-पहचाना एहसास – ऊंची उपलब्धि के साथ कम रिकवरी. लेकिन अब धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है. वेलनेस को साल में एक बार या वीकेंड की तरह मानने के बजाय, अब ज्यादा महिलाएं इसे अपनी रोजमर्रा की आदतों में शामिल कर रही हैं. और योग सबसे आसान और टिकाऊ तरीका बनता जा रहा है…

‘कॉर्पोरेट दुनिया में महिलाएं लगातार लीडरशिप, परिवार, सेहत और खुद की ग्रोथ को बैलेंस करती हैं, और इसी में वे खुद को सबसे पीछे रख देती हैं,’ कहते हैं सौरभ बोथरा, Habuild के को-फाउंडर और योग टीचर. उनका मानना है कि असली बदलाव तब आता है जब वेलनेस कभी-कभार की चीज न होकर रोज की आदत बन जाती है. वे बताते हैं, ‘योग इसलिए काम करता है क्योंकि यह आसान, सबके लिए और एडजस्टेबल है. जब इसे रोज किया जाए, तो यह एक एंकर हैबिट बन जाता है – एक छोटी सी रोज की कमिटमेंट जो ताकत, फोकस, इमोशनल बैलेंस और डिसीजन मेकिंग को बेहतर करती है.’

एंकर हैबिट का यही आइडिया सबसे जरूरी है. मोटिवेशन के झटकों पर निर्भर रहने के बजाय, योग एक ऐसी आदत बन जाता है जो रोजमर्रा की चीज है, जैसे दांत साफ करना. योग को अक्सर शारीरिक एक्सरसाइज के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके फायदे इससे कहीं ज्यादा हैं. सुमी लाजर, प्राणिक हीलिंग इंस्ट्रक्टर और वर्ल्ड प्राणिक हीलिंग इंडिया की ट्रस्टी, कहती हैं कि योग इमोशनल और एनर्जी की थकावट को भी दूर करता है. ‘महिलाएं अपनी जिंदगी में कई रोल निभाती हैं. इसलिए बर्नआउट होना कोई हैरानी की बात नहीं है,’ वे बताती हैं. एडवांस्ड मेडिटेशन सिस्टम जैसे अर्हाटिक योग के जरिए, प्रैक्टिशनर्स अपनी एनर्जी फील्ड को बढ़ाते हैं और स्ट्रेस मैनेज करने की ताकत मजबूत करते हैं. ‘नियमित अभ्यास से अंदरूनी ताकत, करुणा और अंतर्ज्ञान अपने आप बढ़ता है,’ लाजर बताती हैं, ये क्वालिटीज महिलाओं को प्रोफेशनल और पर्सनल जिम्मेदारियों को आसानी और मजबूती से संभालने में मदद करती हैं.

प्रैक्टिकल लेवल पर, योग बिजी शेड्यूल में भी आसानी से फिट हो जाता है. आपको एक घंटे की क्लास या परफेक्ट जगह की जरूरत नहीं है. कॉल्स के बीच कुछ गहरी सांसें या डेस्क पर स्ट्रेचिंग से नर्वस सिस्टम रीसेट हो जाता है. तारिका दवे, होलिस्टिक लाइफ कोच और योग एक्सपर्ट, कहती हैं कि योग की यही आसानी हाई परफॉर्मर्स के लिए जरूरी है. ‘यह डिकम्प्रेशन और री-कनेक्शन का टूल है. कुछ गहरी सांसें भी नर्वस सिस्टम को शांत कर सकती हैं, तनाव कम कर सकती हैं और क्लैरिटी ला सकती हैं,’ वे बताती हैं. वे जोड़ती हैं कि फायदे वहीं दिखते हैं जहां सबसे ज्यादा जरूरत होती है – तेज फोकस, स्थिर भावनाएं और आत्मविश्वास से फैसले लेना. ‘यह आपको रीचार्ज करने और अपनी महत्वाकांक्षा को बिना बर्नआउट के आगे बढ़ाने में मदद करता है,’ वे कहती हैं.

इन सभी तरीकों को जोड़ता है सफलता की नई परिभाषा. ताकत अब सिर्फ काम के घंटों या हासिल किए गए गोल्स से नहीं, बल्कि टिकाऊपन से मापी जाती है – बिना दबाव के अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता. रोजाना योग धीरे-धीरे यह नींव बनाता है. समय के साथ बेहतर नींद, सुधरी हुई मुद्रा, शांत प्रतिक्रिया और साफ सोच बढ़ती जाती है, जिससे शरीर और दिमाग लंबे समय तक महत्वाकांक्षा को संभाल सकते हैं. कॉर्पोरेट वेलनेस अब भागने की बात नहीं है. यह इंटीग्रेशन की बात है.

सुबह की छोटी योग फ्लो, प्रेजेंटेशन से पहले ब्रेथवर्क या शाम के स्ट्रेचेज ऐसे एंकर बन सकते हैं जो दिनभर की भागदौड़ में ठहराव लाते हैं. ये छोटे-छोटे ब्रेक तनाव को बढ़ने से रोकते हैं. जिस कल्चर में हसल को सेलिब्रेट किया जाता है, योग कुछ अलग देता है: बैलेंस. और महिलाओं के लिए, यही बैलेंस सबसे ताकतवर प्रोडक्टिविटी टूल हो सकता है.

Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

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