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बागेश्वर: पहाड़ों की धरती में तिमूर का महत्व सिर्फ धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है. इसे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, वातावरण शुद्ध रहता है और स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ भी मिलते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक लोग इसकी महत्ता को समझने लगे हैं, और यह प्राकृतिक, सरल और किफायती उपाय बन चुका है. आइए जानते है इसके फायदे…
पहाड़ की स्थानीय मान्यता है कि घर में तिमूर की कांटेदार लकड़ी रखने से नकारात्मक ऊर्जा पास नहीं आती है. ग्रामीण इलाकों में इसे दरवाजों और आंगन के कोनों पर रखने की परंपरा है. यह लकड़ी बुरी शक्तियों और नजर दोष से बचाव करती है. लोग इसे पूजा स्थलों पर भी रखते हैं ताकि घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहे. वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व बताया गया है.

घर-आंगन में तिमूर की लकड़ी रखने से वातावरण शुद्ध होता है, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है. ग्रामीण परिवार इसे खासतौर पर मुख्य द्वार और आंगन के कोनों पर रखते हैं. माना जाता है कि यह लकड़ी रोग-व्याधियों और मानसिक तनाव को भी कम करती है. वर्तमान समय में जब लोग ऊर्जा संतुलन के लिए महंगे उपाय अपनाते हैं, तिमूर एक सरल और किफायती विकल्प है.

बागेश्वर के स्थानीय जानकार संदेश आर्या ने लोकल 18 को बताया कि तिमूर की लकड़ी धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जाती है. कई परिवार इसे मंदिरों और पूजा स्थलों पर रखते हैं. मान्यता है कि यह लकड़ी घर में सुख-शांति बनाए रखती है, और भगवान का आशीर्वाद मिलना सुनिश्चित करती है. गांवों में तीज-त्योहार और पूजा के समय इसका विशेष प्रयोग किया जाता है. धार्मिक अनुष्ठानों में यह शुभ प्रतीक के रूप में मानी जाती है.

तिमूर केवल मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक औषधीय पौधा भी है. आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल पाचन शक्ति बढ़ाने, दांत दर्द, सिरदर्द और श्वसन से जुड़ी बीमारियों में किया जाता है. इसके बीज मसाले के रूप में और पत्तियां औषधीय काढ़ों में उपयोग होती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में तिमूर की लकड़ी को घर की सुरक्षा और शांति से जोड़ा जाता है. इसे आंगन और दरवाजे पर रखने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. गांवों के बुजुर्ग मानते हैं कि तिमूर घर के वातावरण को पवित्र और सुरक्षित बनाए रखता है. ग्रामीण जीवन में यह मान्यता आज भी उतनी ही प्रचलित है जितनी सदियों पहले थी.

तिमूर की कांटेदार लकड़ी को घर में रखने से सुख-समृद्धि बनी रहती है. ऐसी मान्यता प्रचलित है कि यह लकड़ी परिवार में शांति, एकता और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देती है. ग्रामीण समाज में इसे समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. पूजा और शुभ अवसरों पर लोग इसे विशेष रूप से प्रयोग में लाते हैं.

आज जब लोग वास्तु और ऊर्जा संतुलन के लिए महंगे उपाय अपनाते हैं, वहीं तिमूर जैसी प्राकृतिक वस्तुएं सस्ता और असरदार विकल्प बन सकती हैं. यह बिना किसी खर्च के नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने का माध्यम है. ग्रामीण क्षेत्रों से अब शहरों तक लोग इसकी महत्ता समझने लगे हैं. यह घर को सकारात्मक बनाने के लिए एक प्राकृतिक उपाय है.

तिमूर सिर्फ लकड़ी ही नहीं, बल्कि इसके फल और पत्ते भी बेहद उपयोगी हैं. इसके फल मसाले के रूप में इस्तेमाल होते हैं, जबकि पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. यह पौधा धार्मिक, औषधीय और पारंपरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. घर में इसका उपयोग वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है.