वायरल और बैक्टीरियल बुखार की पहचान कैसे करें? डॉक्टर लोकेंद्र गुप्ता ने बताया आसान तरीका

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Viral vs Bacterial Fever: मौसम बदलते वक्त अधिकतर लोग वायरल इंफेक्शन का शिकार हो जाते हैं. इसकी वजह से बुखार, जुकाम, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण नजर आते हैं. मेदांता के डॉक्टर लोकेंद्र गुप्ता के मुताबिक अगर बुखार आए, तो लोगों को पैरासिटामोल दवा लेनी चाहिए. अगर बुखार 3-4 दिनों तक लगातार बना रहे, तो ऐसे में डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें. अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवा न लें, क्योंकि वायरल बुखार में ये दवाएं बेअसर साबित होती हैं.

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वायरल बुखार 4-5 दिन में ठीक होने लगता है, जबकि बैक्टीरियल बुखार लंबे समय तक बना रहता है.

Viral vs Bacterial Fever Symptoms: इस वक्त मौसम तेजी से बदल रहा है. कुछ दिन पहले तक तेज धूप थी, लेकिन कई जगहों पर बारिश होने से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है. कभी गर्मी, कभी ठंडक ने लोगों की तबीयत खराब कर दी है. बड़ी संख्या में लोग सर्दी-खांसी और बुखार से जूझ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इस वक्त वायरल फीवर तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, जबकि कुछ लोग बैक्टीरियल फीवर का शिकार हो रहे हैं. अक्सर जब हमें बुखार होता है, तो हम उसे सामान्य समझकर पेरासिटामोल ले लेते हैं, लेकिन यह जानना बेहद जरूरी है कि बुखार वायरल है या बैक्टीरियल. इन दोनों के बीच का अंतर समझना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि इनका इलाज पूरी तरह अलग होता है. गलत दवा या बेवजह एंटीबायोटिक्स का सेवन शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान कर सकता है.

लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि इस वक्त मौसम बदल रहा है और अधिकतर लोग वायरल इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं. इसकी वजह से बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. अचानक बुखार आने पर लोगों को सिर्फ पैरासिटामोल दवा लेनी चाहिए. यह दवा बुखार कम करती है और शरीर दर्द से राहत दिलाती है. वायरल फीवर आमतौर पर 3 से 5 दिनों में अपने आप ठीक होने लगता है. इसके विपरीत बैक्टीरियल बुखार धीरे-धीरे शुरू हो सकता है, लेकिन यह लंबे समय तक बना रहता है. अगर आपको बुखार आए और पैरासिटामोल लेने के बावजूद 4-5 दिन तक ठीक न हो, तो ऐसी कंडीशन में डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं.

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डॉक्टर ने बताया कि वायरल इंफेक्शन में बुखार के साथ खांसी, गले में खराश और मसल्स में दर्द महसूस हो सकता है, जबकि बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर बुखार के साथ यूरिन इंफेक्शन, सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, पेट दर्द और कान में दर्द जैसे लक्षण भी नजर आते हैं. ऐसी कंडीशन में डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक दवाएं लेनी चाहिए. कई मामलों में बलगम का रंग भी संक्रमण की पहचान में मदद कर सकता है. वायरल संक्रमण में नाक बहने पर बलगम आमतौर पर पानी जैसा होता है. अगर संक्रमण बैक्टीरियल है, तो बलगम का रंग गहरा पीला या हरा हो जाता है. हालांकि यह पूरी तरह सटीक पैमाना नहीं है, लेकिन यह एक शुरुआती संकेत हो सकता है. ऐसे में सही जांच के बाद ही इसका पता चलता है.

एक्सपर्ट की मानें तो सभी लोगों को यह समझना चाहिए कि एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन पर काम करती हैं और वायरल बुखार में ये दवाएं नहीं लेनी चाहिए. एंटीबायोटिक दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए, क्योंकि इनका गलत उपयोग एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है, जिससे भविष्य में दवाइयां आपके शरीर पर असर करना बंद कर देती हैं. अगर आपको बुखार के साथ गंभीर लक्षण नजर आएं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं. टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर आपको दवाएं प्रिस्क्राइब कर सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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