बचपन में साइकिल पर माचिस बेचने वाला लड़का कैसे बना दुनिया का फर्नीचर किंग?

Last Updated:

Success Story- आइकिया आज दुनिया का सबसे बड़ा फर्नीचर रिटेलर है. कंपनी की शुरुआत इंगवार कैम्पराड ने महज 17 साल की उम्र में की थी. छह साल की उम्र से ही कैम्‍पराड ने काम करना शुरू कर दिया और माचिस बेचने लगे.

ख़बरें फटाफट

अरबपति होते हुए भी कैम्‍पराड ने बेहद साधारण जीवन जीया और फिजूलखर्ची से हमेशा दूर रहे.

नई दिल्‍ली. सपने बड़े हों और उन्‍हें पूरा करने को कड़ी मेहनत करने का जज्‍बा तो सफलता इंसान के कदम जरूर चूमती है. फिर न गरीबी आड़े आते ही और न ही अभाव. दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर रिटेलर कंपनी आइकिया के फाउंडर इंगवार कैम्पराड इसका उदाहरण हैं. साल 1926 में स्वीडन के एक गरीब ग्रामीण के घर पैदा हुए कैम्‍पराड का बचपन बेहद गरीबी में बीता था. हालत यह थी कि छह साल की उम्र में ही उन्‍हें पढ़ाई के साथ काम करना शुरु करना पड़ा. ऊपर से वे डिस्लेक्सिया से पीड़ित थे. लेकिन, कैम्‍पराड ने किसी भी कठिनाइया को अपनी सफलता में बाधा नहीं बनने दिया और एक ऐसी कंपनी खड़ी कर दी जो जिसका बिजनेस भारत सहित करीब 65 देशों में फैला है. अरबपति होते हुए भी कैम्‍पराड ने बेहद साधारण जीवन जीया और फिजूलखर्ची से हमेशा दूर रहे. साल 2018 में 91 साल की उम्र में उनकी मौत हुई. दोस्‍तों के बीच वे ‘कंजूस अंकल’ के नाम से मशहूर थे.

घर के हालत ठीक न होने की वजह से कैम्‍पराड को छह साल की उम्र में ही माचिस बेचनी पड़ी. 10 साल के होते-होते उन्‍होंने अपनी बचत से एक साइकिल खरीदी और अपना बिजनेस बढाया और माचिस के साथ पेन, पेंसिल, बीज और क्रिसमस ट्री आसपास के गांवों में घूम-घूमकर बेचना शुरू कर दिया. वो हमेशा उस सामान की तलाश में रहते थे, जिसकी मांग होती थी. मांग बढते ही वो सामान भी इंगवार बेचने लगते. 17 की उम्र में ही उन्‍होंने दुनियाभर में महशूर कंपनी IKEA की नींव रख दी थी.

पिता से मिले इनाम से शुरू की आइकिया

कैम्‍पराड ने भले ही छह साल की उम्र से माचिस बेचनी शुरू की, पर पढ़ाई नहीं छोड़ी. वे पढाई में तेज थे. एक बार वे क्‍लास में अव्‍वल आए तो उनके पिता ने उन्‍हें कुछ पैसे इनाम में दिए. इन्‍हीं पैसों से उन्‍होंने 1943 में आइकिया शुरू की. उस वक्‍त उनकी उम्र केवल 17 साल थी. कंपनी शुरू में पेन, वॉलेट, और पिक्चर फ्रेम जैसी छोटी घरेलू चीजें बनाई. फर्नीचर व्यवसाय में कैम्पराड 1948 में प्रवेश किया.

किचन टेबल से फर्नीचर बिजनेस की शुरुआत

फर्नीचर बिजनेस की शुरुआत उन्‍होंने किचन टेबल बेचने से की. वे स्थानीय कारीगरों से सस्ते में टेबल खरीदते और उसे महंगे दामों पर बेचते थे. कुछ समय बाद उन्‍होंने टेबल के अलावा और भी घरेलू फर्नीचर बेचना शुरू कर दिया. काम शुरू करने के 2 साल बाद ही उनकी कंपनी पॉपुलर हो गई.

IKEA को प्रसिद्दी मिली फ्लैट-पैक फर्नीचर से. 1940 के दशक के अंत में, इंगवार कैम्पराड ने महसूस किया कि बड़े, असेंबल किए गए फर्नीचर की शिपिंग महंगी थी. उन्‍होंने उत्पादों को इस तरह डिजाइन किया कि वे अलग किए जा सकें और फ्लैट में ले जाकर उन्‍हें जोड़ा जा सके. इससे IKEA ने शिपिंग खर्चों को काफी हद तक कम कर लिया. साथ ही उनकी बिक्री को भी कई गुणा बढा दिया.

अब 176000 करोड़ है वैल्‍यूएशन

आज आकिया के 65 देशों में 500 के करीब स्‍टोर हैं. आइकिया की वैलयूएशन आज करीब 176169 करोड़ रुपये है. IKEA वेबसाइट पर लगभग 12,000 उत्पाद हैं. आज यह दुनिया का सबसे बड़ा फर्नीचर रिटेलर है, जो रेडी-टू-असेम्बल फर्नीचर, उपकरण, घरेलू सामान और बहुत कुछ डिजाइन करता और बेचता है. भारत में 2018 में आइकिया ने अपना पहला स्‍टोर खोला था.

homebusiness

बचपन में साइकिल पर माचिस बेचने वाला लड़का कैसे बना दुनिया का फर्नीचर किंग?

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *