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यूपी के सुल्तानपुर में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है, जहां कई किसान पारंपरिक फसलें छोड़कर सिर्फ केले की ही खेती में जुटे हैं और इससे बेहतरीन कमाई कर रहे हैं. इस खबर में हम जानेंगे सुल्तानपुर के ऐसे पांच किसानों के बारे में, जिन्होंने केले की खेती को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया और इसमें खास महारथ हासिल की है.
विकास खण्ड बल्दीराय के रहने वाले किसान करुणाशंकर मिश्रा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने पारंपरिक फसल धान और गेहूं छोड़कर केले की खेती शुरू की, जिसमें उन्हें कम लागत में अच्छा मुनाफा होने लगा. अब वे अपने अधिकतर खेतों में केले की ही खेती कर रहे हैं. करुणाशंकर के अनुसार लगभग 5 बीघा खेत में उन्होंने 1700 पौधे लगाए, जिनके तैयार होने तक कुल लागत 1 लाख रुपए आई और उन्होंने 5 लाख रुपए का केला बेचा. इससे उन्हें केले की खेती में काफी फायदा हो रहा है.

सुल्तानपुर जिले की बल्दीराय तहसील के अंतर्गत आने वाले एक गांव के रहने वाले किसान कृष्ण कुमार सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने पारंपरिक फसल धान और गेहूं छोड़कर केले की खेती शुरू की है, जिसमें उन्हें कम लागत में अच्छा मुनाफा होने लगा. अब वे अपने अधिकतर खेतों में केले की ही खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 1 एकड़ खेत में उन्होंने 1100 पौधे लगाए, जिनके तैयार होने तक कुल लागत 1 लाख रुपए आई और उन्होंने 3 लाख रुपए का केला बेचा. इससे उन्हें केले की खेती में अच्छा मुनाफा हो रहा है.

सुल्तानपुर के रहने वाले किसान अनुपम यादव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने केले के पौधे उद्यान विभाग से मंगवाए थे, जिन्हें अपने खेतों में लगाकर वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने 5000 से अधिक पेड़ लगवाए हैं, जो लगभग 2.5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में तैयार हो रहे हैं.
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विकास खण्ड बल्दीराय के रहने वाले किसान करुणाशंकर मिश्रा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने पारंपरिक फसल धान और गेहूं छोड़कर केले की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें कम लागत में अच्छा मुनाफा होने लगा. अब वे अपने अधिकतर खेतों में केले की ही खेती कर रहे हैं. करुणाशंकर के अनुसार लगभग 5 बीघा खेत में उन्होंने 1700 पौधे लगाए, जिनके तैयार होने तक कुल लागत 1 लाख रुपए आई और उन्होंने 5 लाख रुपए का केला बेचा. इससे उन्हें केले की खेती में काफी फायदा हो रहा है.

सुल्तानपुर के हरिपुर बनवा के रहने वाले किसान दलजीत वर्मा ने लगभग 670 से अधिक केले के पौधे लगाए हैं, जिससे उन्हें तगड़ी कमाई हो रही है. इसके साथ ही उन्होंने केले के पौधों के नीचे सब्जियों की नर्सरी भी लगाई है, जिससे उन्हें एक साथ दो फसलों का लाभ मिल रहा है. खेती के मामले में वे तकनीकी कृषि विधियों का प्रयोग करते हैं. यही वजह है कि केले की खेती के साथ-साथ वे गोभी, मिर्च, लौकी, नेनुआ आदि की भी खेती करते हैं और नर्सरी लगाकर सब्जियों के पौधों की बाजार में सप्लाई करते हैं.
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