कैसे ईरान में अंदर तक घुस चुके सीआईए और मोसाद के जासूस …वो क्या करते हैं वहां

ईरान में आज जो कुछ भी हो रहा है, उससे ये जाहिर है कि ईरान की हर सूचना अमेरिका और इजरायल तक पहुंच रही है. उसके हर रणनीतिक और संवेदनशील जगहों की जानकारियां इन दोनों देशों के पास हैं. ये संभव हो सका है वहां अंदर तक पैठ बना चुके सीआईए और इजरायल की मोसाद जासूसी एजेंसी के जरिए. कहा तो ये भी जाता है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च धार्मिक गुरु अयातुल्ला खामनेई के आसपास रहने वाले उनके विश्वसनीय लोगों में भी इनके कुछ एजेंट शामिल हो चुके थे.

ईरान में इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिकी सीआईए के जासूसों की घुसपैठ लंबे समय से एक छिपी हुई जंग का हिस्सा रही है, जो मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सैन्य बुनियादी ढांचे और नेतृत्व पर नजर रखती है, उन पर निशाना बनाने के लिए पुख्ता सूचनाएं भेजती है.

विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, ये एजेंसियां वर्षों से ईरान के अंदर गुप्त ऑपरेशंस चला रही हैं, जिसमें जासूसों की भर्ती, हथियारों की तस्करी और साइबर हमलों का इस्तेमाल शामिल है. मोसाद की पहुंच को ईरान के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है.

घुसपैठ कैसे हुई

मोसाद और सीआईए ने ईरान में घुसपैठ के लिए कई तरह की रणनीतियां अपनाई हैं, जिसमें स्थानीय असंतुष्टों की भर्ती, झूठी पहचान का इस्तेमाल और लंबे समय की निगरानी शामिल है.

इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के अंदर सैकड़ों एजेंट तैनात किये हैं. जो बरसों की तैयारी के बाद सक्रिय हुए. मोसाद ने हथियारों और ड्रोनों को ईरान में तस्करी करके गुप्त ठिकाने स्थापित किए, जो बाद में हमलों में इस्तेमाल हुए. ये एजेंट ईरान के सैन्य और परमाणु सुविधाओं के करीब पहुंचकर खुफिया जानकारी इकट्ठा करते हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि मोसाद ने ईरानी नागरिकों को भर्ती किया, जिन्हें प्रशिक्षित करके कमांडो जैसी भूमिकाओं में लगाया गया.

अमेरिकी जासूसी एजेंसी सीआईए ने भी ईरान में जासूसों का नेटवर्क बनाया. इसमें कुछ असफलताएं भी मिलीं. 2009 से ईरान ने कई सीआईए एजेंटों को पकड़ा, जो संचार की कमजोरियों के कारण हुआ. फिर भी सीआईए ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखने के लिए गुप्त संपर्क स्थापित किए, जिसमें ईरानी असंतुष्टों और पड़ोसी देशों से मदद ली गई.

घुसपैठ की प्रक्रिया में एआई और साइबर टूल्स के इस्तेमाल ने भी खास भूमिका अदा की. जासूसों ने डेटा इकट्ठा करके लक्ष्यों की पहचान की. ईरान की सरकार ने कई बार इन घुसपैठों को उजागर करने का दावा किया.

ये जासूस वहां क्या करते हैं

ईरान में इन जासूसों की मुख्य गतिविधियां खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, तोड़फोड़ और लक्षित हमले हैं, जो ईरान के परमाणु और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने पर केंद्रित हैं.

जासूस ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों और सुविधाओं पर नजर रखते हैं. मोसाद ने ईरान के गोदामों से परमाणु दस्तावेज चुराए, जो बाद में सार्वजनिक किए गए. वे हथियार तस्करी करके गुप्त हमलों की तैयारी करते हैं, जैसे कि ड्रोनों से हमले या साइबर अटैक.

कई रिपोर्ट्स में मोसाद को ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याओं का जिम्मेदार ठहराया गया है, जैसे कि मोहसेन फखरीजादेह की हत्या. जासूस ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करके इजरायली हमलों का रास्ता साफ करते हैं. सीआईए ने भी ऐसे ऑपरेशंस में सहयोग किया, लेकिन ईरान ने कई जासूसों को गिरफ्तार करके जवाब दिया. ये जासूस सोशल मीडिया और प्रोपेगैंडा के जरिए ईरान में अस्थिरता फैलाते हैं, जैसे कि विरोध प्रदर्शनों को समर्थन देना.

क्या खास काम किए इन जासूसों ने

2025 में मोसाद ने ईरान के अंदर से हमले शुरू किए, जिसमें एजेंटों ने मिसाइल लांचरों को नष्ट किया. इजरायली वायुसेना के लिए रास्ता बनाया. यह वर्षों की घुसपैठ का नतीजा था.

2018 में मोसाद एजेंटों ने तेहरान से हजारों दस्तावेज चुराए, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम की धोखाधड़ी को उजागर करते थे.

क्या ये खामनेई के करीबी दायर तक पहुंच चुके थे

उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों और खुफिया स्रोतों के आधार पर यह काफी हद तक सही लगता है कि मोसाद और सीआईए ने आयतुल्ला अली खामनेई के करीबी दायरे तक पहुंच बना ली थी या कम से कम उनके निकटतम सलाहकारों, मीटिंग पैटर्न और लोकेशन की उच्च-स्तरीय जानकारी हासिल कर ली थी. फरवरी 2026 में हुए हमलों में खामनेई और उनके कई करीबी जिस तरह मारे गए, वो बात ये पुष्ट करती है कि खामनेई के करीबी लोगों तक इन जासूसी एजेंसियों की पकड़ बन चुकी थ.

मोसाद ने ईरान के अंदर गहरे नेटवर्क बनाए थे, जिसमें सीनियर मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों तक पहुंच शामिल थी. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि मोसाद ने खामनेई के इनर सर्कल को ब्रेक किया था, जिससे हमलों में मदद मिली. ईरानी अधिकारी स्वीकार करते हैं कि मोसाद ने सीनियर अधिकारियों तक पहुंच बना ली थी. द गार्डियन, न्यूज अरब और ईरान इंटरनेशनल की ताजा तरीन रिपोर्ट्स भी इसकी तसदीक करती हैं.

कौन होते हैं ईरान में ये एजेंट

ये लोग आम लोगों की तरह ही होते हैं और उन्हीं में घुसे होते हैं. ये आफिसों में काम करते हैं. वैज्ञानिक होते हैं. सेना के अफसर हो सकते हैं. महिलाएं भी हो सकती हैं. सामान्य तौर पर कोई नहीं कह सकता कि ऐसे किसी जासूसी नेटवर्क से जुड़े हुए लोग हो सकते हैं. इन्हें पैसा दिया जाता है. ऑपरेशंस में फंडिंग गोपनीय होती है, लेकिन रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ये सरकारी बजट, ब्राइब्स और अप्रत्यक्ष तरीकों से आती है.

मोसाद को इजरायल सरकार से सीधी फंडिंग मिलती है. ईरान में एजेंट्स को बड़े अमाउंट्स (लाखों डॉलर्स) का प्रलोभन देकर भर्ती किया जाता है. कई लोगों को एक्सटॉर्शन और ब्लैकमेल के जरिए भी इस्तेमाल करते हैं.

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