भीख मांगने की सलाह देने वालों को श्रीकांत ने कैसे दिया ‘₹500 करोड़ का जवाब’

नई दिल्‍ली. दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बाधाओं के आगे घुटने टेक देते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जो कइिनाइयों को ही सीढ़ी बना लेते हैं. ऐसे ही शख्‍स हैं बोलेंट इंडस्ट्रीज (Bollant Industries) के संस्‍थापक श्रीकांत बोला. श्रीकांत का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था. जन्म के साथ ही ईश्वर ने उनकी आंखों की रोशनी छीन ली थी. बचपन से लेकर जवानी तक, हर मोड़ पर उन्‍हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. स्‍कूल में सहपाठियो ने चिढाया, साइंस की पढाई में सरकार के कानून आड़े आए और भारत के शीर्ष शैक्षणित संस्‍थान में वे केवल दृष्टिहीन होने के कारण दाखिला नहीं ले पाए. लेकिन, श्रीकांत ने हिम्‍मत नहीं हारी. अमेरिका से उच्‍च शिक्षा ली और भारत आकर 500 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनी खड़ी कर दी.

श्रीकांत का बचपन आसान नहीं था. जब वह छह साल के थे, तब हर दिन वह कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते थे. नेत्रहीन होने के कारण सहपाठियों ने उनका खूब मजाक उड़ाया. लोग अक्सर उनके माता-पिता से कहते थे कि इस बच्चे का कोई भविष्य नहीं है. हर कदम पर उनका मनोबल कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन श्रीकांत ने बचपन में ही तय कर लिया था कि वह अपनी कहानी खुद लिखेंगे. उनके माता-पिता ने समाज की बातों को दरकिनार कर अपने बच्चे की हिम्मत को अपना संबल बनाया.

बोर्डिंग स्‍कूल में पढाई

जब वह महज आठ साल के थे, तब उन्हें घर से 400 किलोमीटर दूर हैदराबाद के एक ब्लाइंड बोर्डिंग स्कूल भेजा गया. माता-पिता से इतनी कम उम्र में दूर रहना एक कठिन फैसला था, लेकिन श्रीकांत वहां जल्द ही ढल गए. वहां उन्होंने न केवल पढ़ाई में अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि तैराकी, शतरंज और क्रिकेट में भी हाथ आज़माया. श्रीकांत का सपना एक इंजीनियर बनने का था, लेकिन नियति एक बार फिर उनके सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई. 10वीं के बाद वह विज्ञान (Science) लेकर पढ़ना चाहते थे, लेकिन आंध्र प्रदेश राज्य शिक्षा बोर्ड ने इसे ‘अवैध’ करार दिया. बोर्ड का मानना था कि नेत्रहीन छात्र ग्राफ, डायग्राम और गणित की जटिलताओं को नहीं समझ सकते.

पूर्व राष्‍ट्रपति स्‍वर्गीय एपीजे अब्‍दुल कलाम के साथ श्रीकांत बोला.

कोर्ट में लड़ी कानूनी लड़ाई

श्रीकांत ने हार मानने के बजाय लड़ने का फैसला किया. अपने एक शिक्षक और वकील की मदद से उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में केस दायर किया. छह महीने की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अब नेत्रहीन छात्र भी विज्ञान और गणित पढ़ सकते थे. श्रीकांत ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया. 12वीं के बाद श्रीकांत आईआईटी (IIT) में दाखिला लेना चाहते थे, लेकिन किसी भी कोचिंग संस्थान ने एक नेत्रहीन छात्र को प्रवेश देने की हिम्मत नहीं दिखाई.

व्यवस्था के इस रूखेपन ने उन्हें टूटने नहीं दिया. उन्होंने अपनी नजरें अंतरराष्ट्रीय फलक पर टिकाईं. श्रीकांत ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आवेदन किया और उन्हें दुनिया के शीर्ष संस्थान मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) सहित पांच विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव मिले. श्रीकांत एमआईटी में पढ़ने वाले पहले नेत्रहीन अंतरराष्ट्रीय छात्र बने. यह न केवल उनकी जीत थी, बल्कि उन सभी लोगों को जवाब था जिन्होंने उन्हें कमतर आंका था.

2012 में रखी बोलेंट इंडस्‍ट्रीज की नींव

एमआईटी से मैनेजमेंट साइंस की पढ़ाई पूरी करने के बाद श्रीकांत के पास अमेरिका में बेहतरीन नौकरियों के प्रस्ताव थे. वह वहीं रहकर एक आरामदायक जीवन बिता सकते थे, लेकिन उनके मन में कुछ और ही था. वह भारत वापस आकर उन लोगों के लिए कुछ करना चाहते थे जो उनकी तरह विकलांग थे और समाज की उपेक्षा झेल रहे थे. 2012 में हैदराबाद लौटकर उन्होंने ‘बोलेंट इंडस्ट्रीज’ (Bollant Industries) की नींव रखी. यह एक ऐसी कंपनी थी जो इको-फ्रेंडली डिस्पोजेबल उत्पाद (नेचुरल पत्तों और रीसाइकिल पेपर से बने) बनाती थी. श्रीकांत की विजनरी सोच ने रतन टाटा जैसे दिग्गजों को भी प्रभावित किया और उन्हें टाटा से फंडिंग मिली.

2022 में श्रीकांत ने स्‍वाति से शादी की.

श्रीकांत की कंपनी की सबसे बड़ी सफलता यह नहीं थी कि वह करोड़ों कमा रही है, बल्कि यह थी कि वह किसे रोजगार दे रही है. उन्होंने अपनी कंपनी के दरवाजे उन लोगों के लिए खोले जिन्हें समाज ‘बोझ’ समझता था. उनके कर्मचारियों में बड़ी संख्या विकलांग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों की है. आज बोलेंट इंडस्ट्रीज 483 करोड़ रुपये से अधिक की वैल्यूएशन वाली कंपनी बन चुकी है. श्रीकांत की नेट वर्थ करीब 50 करोड़ रुपये है. 2017 में उनका नाम फोर्ब्स की ’30 अंडर 30′ एशिया लिस्ट में शामिल किया गया.

श्रीकांत पर बन चुकी है फिल्‍म

श्रीकांत बोला का जीवन आज करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उनके जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘श्रीकांत’ भी रिलीज हुई, जिसमें अभिनेता राजकुमार राव ने उनके संघर्ष को पर्दे पर जिया. सफलता की इस यात्रा में श्रीकांत के जीवन में स्वाति का प्रवेश हुआ. स्वाति ने उन्हें एक इंसान के तौर पर पसंद किया और उनकी शारीरिक बाधा उनके प्रेम के बीच कभी नहीं आई. 2022 में दोनों ने शादी कर ली. श्रीकांत अक्सर कहते हैं कि उनकी सफलता में उनके परिवार और उनकी पत्नी का अटूट विश्वास शामिल है.

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