हमारी आंखें कितने किलोमीटर तक देख सकती हैं? दूर की चीजें क्यों दिखती हैं छोटी, 5 रोचक तथ्य कर देंगे हैरान

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Human Eye Maximum Vision: हमारी आंखें करीब 5 किलोमीटर दूर तक की चीजें देख सकती हैं. दूर की चीजें छोटी नजर आती हैं, क्योंकि रेटिना पर उनकी इमेज छोटी बनती है. हालांकि अगर किसी चीज का आकार बड़ा है, तो आंखें बहुत ज्यादा दूरी से भी उस चीज को देख सकती हैं. पृथ्वी से चांद की दूरी 3.84 लाख किलोमीटर है, लेकिन आकार बहुत बड़ा है. इसकी वजह से हम अपनी आंखों से चांद को देख सकते हैं. लाखों किमी की दूरी से चांद बहुत छोटा नजर आता है.

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हमारी आंखें सामान्य तौर पर करीब 5 किलोमीटर दूर तक की चीजें देख सकती हैं.

Interesting Facts About Human Eye: हमारी आंखें प्रकृति का अनोखा वरदान हैं, जिनसे हम रंग-बिरंगी दुनिया को देख पाते हैं. आंखें हमारे ब्रेन और शरीर के बीच जानकारी का एक सेंसिटिव ब्रिज भी हैं. आंखें हमें रंग, आकार, दूरी, गति और प्रकाश की तीव्रता का एहसास कराती हैं. अक्सर आपने महसूस किया होगा कि जब आप कई किलोमीटर दूर की चीजें देखते हैं, तो वे अपने आकार से बहुत छोटी नजर आती हैं. अगर आपसे पूछा जाए कि हमारी आंखें वास्तव में कितनी दूर तक देख सकती हैं, तो आप कहेंगे कि 1-2 किलोमीटर या शायद इससे कुछ ज्यादा. हालांकि आपको आंख से जुड़े कई रोचक तथ्य हैरान कर सकते हैं.

सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार आंखों की देखने की क्षमता उनकी संरचना और विजन क्वालिटी पर निर्भर करती है. मानव आंख की रेटिना में करोड़ों प्रकाश-संवेदी कोशिकाएं होती हैं, जो जो प्रकाश की तीव्रता को पहचानती हैं और कोन्स रंगों को पहचानते हैं. एक परफेक्ट विजन पर आप छोटे बिंदुओं को भी स्पष्ट रूप से पहचान सकते हैं. सपाट और क्लीयर सतह पर इंसान लगभग 3 मील यानी करीब 5 किलोमीटर दूर किसी बड़ी वस्तु जैसे ऊंची इमारत या पहाड़ी को आसानी से देख सकता है. अगर किसी चीज का साइज बहुत बड़ा है, तब यह ज्यादा दूरी से भी दिख सकती है.
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अगर हम आकाश की ओर देखें, तो हमारी आंखें लाखों किलोमीटर दूर स्थित वस्तुओं जैसे चांद और सूरज को भी देख सकती हैं. इसका कारण यह है कि ये खगोलीय वस्तुएं इतनी बड़ी हैं कि उनकी छवि हमारी रेटिना पर दिखाई देती है. NASA के अनुसार चांद पृथ्वी से करीब 3.84 लाख किलोमीटर दूर है और सूरज लगभग 1.5 करोड़ किलोमीटर दूर है. फिर भी हम उन्हें स्पष्ट रूप से देख पाते हैं. हालांकि लाखों किलोमीटर दूर से ये ग्रह बहुत छोटे नजर आते हैं, जबकि इनका आकार बहुत बड़ा है. आंखों की सीमा केवल दूरी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वस्तु के आकार, प्रकाश उत्सर्जन और उसकी चमक पर भी निर्भर करती है.

अब आपके मन में सवाल होगा कि दूर की वस्तुएं छोटी क्यों दिखाई देती हैं? इसका उत्तर ऑप्टिक्स में छिपा है. आंखें प्रकाश के फैलाव (divergence) और परावर्तन (refraction) के नियमों के अनुसार काम करती हैं. जैसे-जैसे कोई वस्तु हमारी आंख से दूर होती है, उसकी रेटिना पर बन रही इमेज का आकार छोटा हो जाता है. इसी वजह से किसी इमारत या पहाड़ी की दूरी बढ़ने पर वह छोटी दिखाई देती है. साथ ही वायुमंडल में मौजूद धूल, जलवाष्प और प्रकाश का परावर्तन इमेज को थोड़ा धुंधला और अस्पष्ट भी बना सकता है. आंख का लेंस और कॉर्निया दूर की वस्तु पर फोकस करने के लिए अपनी मोटाई बदलते हैं. इस प्रक्रिया को एकॉमोडेशन कहा जाता है. अगर आंख सही से काम न करे, तो दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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