महिला के शरीर में कितने अंडे होते हैं? आजकल 30 में ही महिलाओं में अंडों का रिजर्व क्यों कम

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Why Fertility Decline: आज से सिर्फ 2 दशक पहले तक महिलाएं 40 साल की उम्र तक आराम से कंसीव कर लेती थी. मुश्किल से ही किसी महिला को इसके लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता था लेकिन आजकल 30 साल के बाद तेजी से महिलाओं में फर्टिलिटी या प्रजनन क्षमता कम होने लगती है और अधिकांश महिलाओं को आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर वह क्या कारण है कि 30 साल की उम्र से ही महिलाओं में फर्टिलिटी कम होने लगती है. एक महिला के जीवनकाल में कुल कितने अंडों का रिजर्व होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं.

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महिलाओं में ओवेरियन रिजर्व का क्या मतलब.

Why Fertility Decline: महिला का शरीर प्रकृति की कारीगरी का नायाब नमूना है. इसमें इतनी कारीगरी है कि इसे अब तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है. लेकिन कुतरत में हस्तक्षेप की वजह से महिलाओं का बायलॉजिकल चक्र कमजोर पड़ने लगा है. महज 15 से 20 साल पहले तक 40 साल की उम्र तक महिलाओं को कंसीव करने में शायद ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता था लेकिन आज 30 साल क्रॉस करते ही महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अधिकांश महिलाओं को बच्चा पैदा करने के लिए आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर ऐसा क्यों होता कि महिलाओं में अंडों का रिजर्व कम होने लगा है.

महिलाओं कितने अंडों का रिजर्व होता
आइए पहले ये जानते हैं कि एक महिला के शरीर में कितने अंडों का रिजर्व होता है. पहले तो यह जानकर आपको हैरानी होगी कि जन्म के बाद महिला के शरीर में एक भी नया अंडा नहीं बनता. जो भी अंडा होता है वह जन्म से पहले मां के पेट में ही बन जाता है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक जब मादा भ्रुण मां के गर्भ में होता है तब दो अंडाणु बनता है. इन्हीं अंडाणु में अंडा बनता है और मादा भ्रुण एक दो महीने का होता है तभी अंडा बनना शुरू हो जाता है. गर्भ में ही महिला के शरीर में 60 लाख अंडे बन जाते हैं. इसके बाद से तेजी से इनकी संख्या घटती जाती है. जन्म के समय महिला के शरीर में 10 से 20 लाख अंडों का रिजर्व रहता है. हर दिन यह रिजर्व घटता जाता है.

प्यूबर्टी यानी पहला पीरियड आते ही अंडों की संख्या घटकर 3 से 4 लाख तक रह जाती है. अब अंडों का रिजर्व एकदम सीमित हो जाता है. हर महीने पीरियड्स आने से पहले सिर्फ 1 अंडा परिपक्व होकर कंसीव के लिए तैयार होता है और इसी अंडे से अगर शुक्राणु को मिलन हो गया तो यह भ्रुण बनता है. अगर भ्रुण नहीं बना तो 28 दिनों के बाद इसका विखंडन हो जाता है और यही पीरियड्स के दौरान निकल जाता है. पीरियड शुरू होने के समय जो अंडे रिजर्व में रहता है उनमें से हर महीने करीब 1000 परिपक्व नहीं होता है और वह मर जाता है. इस तरह एक महिला के जीवन काल में 450 से 500 पीरियड्स आते हैं और हर महीने सिर्फ 1 अंडे मैच्योर होता है. लेकिन आजकल इसी रिजर्व में कमी आने लगी है. आखिर इसका क्या कारण है.

क्यों घटने लगा है अंडों का रिजर्व
न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे सोशल मीडिया पर बताती है कि कई शोध हुए हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ साल पहले तक महिलाओं को 40 साल की उम्र तक कंसीव करने में कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन आजकल 30 साल होते ही महिलाओं को फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं होने लगी है. उनका ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. इसके वैसे तो कई कारण है लेकिन इसके लिए लाइफस्टाइल के साथ-साथ पर्यावरण भी जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अब फर्टिलिटी सिर्फ उम्र पर नहीं बल्कि शरीर की कोशिकाओं की सेहत और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करती है. आज भारत में करीब 10–15% दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं और शहरों में 35 साल से कम उम्र की महिलाएं भी इलाज के लिए पहुंच रही हैं.

ये कारण हैं जिम्मेदार

  • आजकल कम उम्र से महिलाएं इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो रही है. इसके कारण प्रीडायबिटीज हो जाता है. वहीं ओवरी की बीमारी पीसीओसी बढ़ रही हैं जिससे ओव्यूलेशन और अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
  • देर रात तक जागना और ज्यादा स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन बिगड़ता है. मेलोटोनिन हार्मोन के कम होने से अंडों की सेहत कमजोर होती है.
  • प्लास्टिक, प्रदूषण और हॉर्मोन को प्रभावित करने वाले केमिकल्स शरीर के सामान्य हार्मोन संतुलन को खराब करते हैं.
  • प्रोसेस्ड खाना जैसे कि पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद फूड, फास्ट फूड, मोमोज, नूडल्स आदि से इंफ्लामेशन बढ़ता है. इससे भी ज्यादा परेशानी तनाव से है. तनाव से पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती हैं, जिससे ओवरी पर असर पड़ता है.
  • कई महिलाएं कैरियर को प्राथमिकता देते हुए गर्भधारण में देरी करती हैं, लेकिन समय रहते अपनी सेहत (जैसे मेटाबॉलिक या थायरॉयड) की जांच नहीं करातीं.

फिर क्या करना चाहिए कि कंसीव में दिक्कत न हो

  • हर वयस्क महिला को हर साल नियमित रूप से कुछ टेस्ट कराना चाहिए. इनमें फास्टिंग इंसुलिन, HbA1c, विटामिन D, थायरॉयड और AMH, ओविरयन रिजर्व टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल आदि की जांच प्रमुख करें. अगर किसी तरह की दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर से इसका इलाज कराएं.
  • प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें. प्लास्टिक फर्टिलिटी पर असर डाल सकता है. इसकी जगह स्टील जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं.
  • सही तरह से कंसीव करने के लिए मांसपेशियां को मजबूत बनाना जरूरी है. मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए. साथ ही पौष्टिक फूड भी जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज से ओवरऑल हेल्थ सुधरती है.
  • आंत की सेहत का ध्यान रखें, इससे सूजन कम होती है. वहीं हार्मोन संतुलित रहते हैं और फर्टिलिटी बेहतर होती है. इसके लिए आपको रोज हरी पत्तीदार सब्जियां, दाल, साबुत अनाज, फल, सीड्स आदि का सेवन करें.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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