Nipah Virus Update India: देशभर में इस वक्त निपाह वायरस की चर्चा हो रही है, क्योंकि कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल में इसके 2 मरीज सामने आए थे. एहतियात के तौर पर करीब 200 लोगों को क्वारइंटाइन किया गया था, लेकिन उन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है. निपाह वायरस की आहट के बाद भारत समेत तमाम एशियाई देशों ने अपने एयरपोर्ट्स पर इसकी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है, ताकि यह वायरस एक देश से दूसरे देश में न फैले. देश में अभी निपाह वायरस के मामले पूरी तरह कंट्रोल में हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो हाल ही के कुछ महीनों में निपाह के 2 मामलों की पुष्टि हुई थी और फिलहाल नए मामले नहीं मिले हैं. एक्सपर्ट से जानते हैं कि यह वायरस क्या है और इससे कैसे बचें.
नई दिल्ली के बीआर अंबेडकर सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर और वायरोलॉजिस्ट डॉ. सुनीत कुमार सिंह ने News18 को बताया कि निपाह एक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. इसकी पहचान पहली बार 1999 में मलेशिया में हुई थी. यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्लाइंग फॉक्स) में पाया जाता है और इंसानों में पहुंचने पर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. निपाह वायरस ब्रेन और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है, इसलिए इसे बेहद खतरनाक माना जाता है. निपाह वायरस से संक्रमित लोगों में मृत्यु दर बहुत ज्यादा होती है.
निपाह वायरस कैसे फैलता है और लक्षण क्या हैं?
एक्सपर्ट ने बताया कि निपाह वायरस चमगादड़ों द्वारा खाए या दूषित किए गए फल खाने से फैलता है. यह संक्रमित सूअर या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से फैलता है. इसके अलावा यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ जैसे- लार, बलगम या खून के सीधे संपर्क से फैलता है. अस्पतालों में बिना सुरक्षा उपायों के इलाज के दौरान भी यह फैल जाता है. निपाह वायरस के संक्रमण के 5 से 14 दिन बाद लक्षण दिख सकते हैं. इससे संक्रमित होने पर लोगों को तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी या मतली, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक थकान, मानसिक भ्रम, चक्कर और गंभीर मामलों में एन्सेफेलाइटिस और बेहोशी भी हो सकते हैं.
निपाह वायरस का ट्रीटमेंट क्या है?
डॉक्टर सिंह ने बताया कि निपाह वायरस का कोई सटी इलाज नहीं है. लक्षणों के आधार पर इसका ट्रीटमेंट किया जाता है. बुखार आने पर फीवर की मेडिसिन, सांस की तकलीफ में ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है. गंभीर मामलों में ICU में निगरानी की जाती है और मरीज को आइसोलेशन में रखा जाता है, ताकि संक्रमण न फैले. डॉक्टर सपोर्टिव केयर के जरिए शरीर को वायरस से लड़ने में मदद करते हैं. अभी तक निपाह वायरस की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. कुछ वैक्सीन ट्रायल स्टेज में हैं, लेकिन आम इस्तेमाल के लिए वैक्सीन अभी तक नहीं आई है.
निपाह वायरस से बचाव कैसे करें?
वायरोलॉजिस्ट ने बचाया कि अभी तक निपाह वायरस का कोई सटीक इलाज और वैक्सीन उपलब्ध नहीं है इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है. इससे बचने के लिए चमगादड़ों द्वारा खाए या गिरे हुए फल न खाएं, बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें, हाथों को बार-बार साबुन से धोएं, अस्पतालों में मास्क, ग्लव्स और सुरक्षा नियमों का पालन करें और बुखार या संदिग्ध लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. सही समय पर ट्रीटमेंट से आपकी जान बच सकती है.
सभी लोगों को इसका कितना खतरा?
डॉक्टर सुनीत सिंह ने बताया कि भारत की बात करें, तो समय-समय पर पहले भी इसके मामले सामने आते रहे हैं और यह कुछ नया नहीं है. पश्चिम बंगाल में फिलहाल इसके 2 मामले मिले हैं और सभी लोगों को इसका खतरा नहीं है. हजारों लोगों का कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग किया गया है और सभी के परिणाम नेगेटिव रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल वायरस तेजी से नहीं फैल रहा है. हालांकि लोगों को सतर्क रहना चाहिए, ताकि यह संक्रमण न फैले और इससे बचाव हो सके. निपाह कोविड-19 की तरह बेहद तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है, लेकिन बचाव करना जरूरी है.