दूध से निकली मलाई से घी बनाकर खाना कितना हेल्दी? जानें नुकसान

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How healthy is ghee made from milk cream: घी का सेवन करने से शरीर को कई फायदे होते हैं, क्योंकि इसमें हेल्दी फैट होता है. कुछ लोगों को लगता है कि घी खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन ऐसा नहीं है. काफी लोग मार्केट से घी खरीदते हैं तो कुछ घर पर ही दूध की मलाई को इकट्ठा करके घी तैयार करते हैं. आपको लगता है कि मलाई से बना घी हेल्दी और शुद्ध है, लेकिन आयुर्वेद का कुछ और ही कहना है. जानिए, मलाई से घी बनाकर खाना सेहत के लिए कैसे है अनहेल्दी.

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घर के दूध की मलाई से बना घी सेहत के लिए कितना हेल्दी?

How healthy is ghee made from milk cream: दाल में घी का तड़का हो या फिर रोटी पर घी लगाकर खाना हो, लोग इसके लिए मार्केट से घी जरूर खरीदते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो घर पर ही दूध से मलाई निकालकर एक महीने स्टोर करते हैं और फिर इससे शुद्ध देसी घी तैयार करते हैं. मार्केट में अब हर कुछ मिलावटी मिलने लगी है, ऐसे में घी शुद्ध है या अशुद्ध इसका पता लगा पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, आजकल मार्केट में क्रीम से देसी घी निकालने का चलन भी बढ़ता जा रहा है. लोग ये भी सोचते हैं कि डिब्बांबद मिलावटी घी खाने से अधिक बेहतर है क्रीम से निकला घी खाना. लेकिन, आयुर्वेद का कहना है कि क्रीम से निकला घी शरीर को सिर्फ बीमारी और वसा ही देता है. चलिए जानते हैं कैसे…

मलाई से तैयार घी खाना क्या नुकसानदायक है?

चरक संहिता के अनुसार, ‘सर्वस्नेहेषु श्रेष्ठं घृतम्’. इसका मतलब ये है कि सभी वसायुक्त पदार्थों में घी सबसे सर्वोत्तम होता है. आयुर्वेद में घी को वसा रहित माना गया है, जिसमें किसी तरह का ट्रांस फैट नहीं होता है. आयुर्वेद में घी बनाने की सही विधि भी बताई गई है, जिसका पालन सदियों से हमारे देश में होता आ रहा है. हालांकि, आज लोगों के पास समय का इतना अभाव और आधुनिकता का इतना असर है कि सब कुछ बदल गया है. पहले दूध से दही जमाया जाता है, फिर दही को मथकर माखन निकाला जाता है और अंत में उसी माखन को पकाकर घृत (Ghee) तैयार किया जाता है. लेकिन, अब तो लोग सीधा दूध से मलाई निकाल कर इकट्ठा करते हैं और उसी से घी निकाल लेते हैं. क्या आप जानते हैं कि इस तरह से बनने वाले घी में वसा की मात्रा काफी अधिक होती है, पोषक तत्व न के बराबर होते हैं.

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घी बनाने का सही तरीका

प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को मटके में धीमी आंच पर पकाने की परंपरा रही है, जिससे घी में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पाचन में आसानी और शरीर के लिए बलवर्धक रहा है. प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को बनाने से पहले दूध को दही के रूप में जमाया जाता है, जो उसके गुणों में वृद्धि करता है. दही में मौजूद प्राकृतिक जीवाणु दही को पौष्टिक और पाचन में आसान बनाते हैं और उससे निकले मक्खन में वही सारे गुण होते हैं.

नेचुरल तरीके से बना घी सेहत के लिए है हेल्दी

प्राकृतिक तरीके से बना घी पाचन में आसान होता है. पाचन अग्नि को भी संतुलित करता है. धातुओं को पोषण देता है. शरीर का ओज भी बरकरार रखता है. वहीं, सीधा मलाई या क्रीम से बनाए गए घी में दही जमाने वाला चरण नहीं होता है, जिससे घी की गुणवत्ता कम होती है. सीधे क्रीम से घी निकालने पर हाथ में घी नहीं, प्योर वसा आती है. इसका सेवन करने से मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर कई तरह की बीमारियों का घर बन सकता है.

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Anshumala

अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें

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