बिना जड़ का पेड़ कैसे खड़ा? यहां महादेव की कृपा! मंदिर में कई वैज्ञानिक लगा चुके दिमाग, नहीं मिला जवाब

Balaghat News: दुनिया में कई ऐसी चीजें है, जिसका जवाब आज तक नहीं मिल सका है. ऐसे में उन चीजों को चमत्कार की श्रेणी में रखा जाता है. एक ऐसा ही चमत्कार बालाघाट में भी है. कई वैज्ञानिक आए और गए, लेकिन इस पहेली का जवाब आज तक नहीं मिला. दरअसल, हम बात कर रहे हैं बालाघाट के कटंगी तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव जाम की. यहां पर एक प्राचीन मंदिर है, जिसकी छत पर एक पेड़ है. छत पर पेड़ तो है, लेकिन उसकी जड़ कहां है, किसी को पता नहीं है. ऐसे में लोग हैरान हैं कि बिना जड़ का पेड़ जिंदा कैसे है. वहीं, इस पेड़ में लोगों की आस्था भी है. ऐसे में वह इस पेड़ को ईश्वर के चमत्कार के रूप में देखते हैं.

जानिए मंदिर की कहानी
कटंगी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम जाम में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है. यह मंदिर 10वीं शताब्दी का है. ऐसी मान्यता है कि मंदिर को एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है. वहीं, मंदिर की छत भी एक पत्थर की है. उसी मंदिर की छत पर बरसों से एक पेड़ है, जिसकी प्रकृति आम की पेड़ की तरह है. बसंत ऋतु आने के बाद उसमें बौर लग जाते हैं. वहीं, फिर मार्च-अप्रैल में छोटे-छोटे फल लगते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि ये फल खास आकृति के होते हैं, जिसमें कभी गणेश जी तो कभी शिव-पार्वती की प्रतिमा निकलने का भक्तगण दावा करते हैं.

आंधी-तुफान में भी सालों से पेड़ खड़ा
ग्रामीणों को ये भी पता नहीं है कि पेड़ किस प्रजाति का है. वहीं, इसकी उम्र भी किसी को नहीं पता. गांव के बूजुर्ग कहते हैं कि हमारे दादा-परदादा के जमाने से पेड़ है. वहीं, इस पेड़ का आंधी-तूफान भी कुछ नहीं बिगाड़ पाए. वहीं, दूसरे पेड़ तूफान में गिर जाते हैं, लेकिन इस पेड़ की एक टहनी को भी कुछ नहीं होता है. वहीं, गर्मियों के दिनों में पेड़ सूख जाता है. लेकिन, बारिश में यह पेड़ फिर से हरा-भरा हो जाता है. ऐसे में इस पेड़ को बेहद खास माना जाता है. हालांकि, कुछ लोगों का ये भी दावा है ये पेड़ किसी पक्षी के द्वारा लाए गए बीज के कारण उपजा है. वहीं, समय के साथ वह बड़ा होते गया और उसकी महीन जड़ें दीवारों से होकर जमीन में चली गईं. ऐसे में उसका पोषण हो रहा है.

बेहद खास प्राचीन पेड़
ग्रामीणों में ऐसी मान्यता है कि इस पेड़ में लगने वाले फल खाने से कई मान्यताएं पूरी होती हैं. कोई कहता है कि इस पेड़ के फल को खाने से उसमें खाज-खुजली की समस्या से मुक्ति मिलती है. वहीं, जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से इस मंदिर में आता है तब उन्हें संतान प्राप्ति भी होती है. इसके अलावा ग्रामीणों का दावा ये भी है कि कोरोना काल में इस गांव पर विशेष कृपा रही, जिसकी वजह से गांव में कोरोना की वजह से किसी की मौत नहीं हुई.

महाशिवरात्रि में खास मेला
इस मंदिर में महाशिवरात्रि के मौके पर खास कार्यक्रम होते हैं. ऐसे में यहां पर सात दिन पहले से ही शिवपूराण का आयोजन होता है. वहीं, महाशिवरात्रि के मौके पर खास मेले का आयोजन होता है. ऐसे में वहां दूर-दराज से भक्त गण आते हैं. वहीं, सावन के महीने में भी भगवान शिव की आराधना में दूर-दराज से भक्त गण आते हैं.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *