खत्म हो रहा गाज़ा शहर का नामोनिशान, कैसे कभी हंसता और खिलखिलाता था ये शहर

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ऐसा लग रहा है कि इजरायल गाजा शहर का नामोनिशान मिटाकर ही मानेगा. शहर तो पहले ही तबाह हो चुका था. अब इजरायली फौजें उसे खाली करा रही हैं. 45 वर्ग किलोमीटर में बसा ये शहर कभी हंसता और चहकता था. बाजार गुलजार रहते थे. बच्चे खिलखिलाते थे लेकिन अब सब खत्म हो चुका है.

इजरायली फौजें अब गाज़ा शहर को खाली कराने में लगी हैं. वहां की इमारतें ध्वस्त की जा रही हैं. इजरायल की योजना पूरी तरह से गाजा को खाली कराने की है ताकि हमास का वहां से नामोनिशान ही मिटा दिया जाए. लेकिन इसके साथ ही एक ऐसे शहर का नामोनिशान खत्म हो रहा है, जो पहले हंसता और खिलखिलाता था. जहां बाजार, स्कूल, अस्पताल और हर तरह की सुविधाएं थीं.

गाजा शहर का क्षेत्रफल करीब 45 वर्ग किलोमीटर (17 वर्ग मील) था, जो उसे गाज़ा पट्टी का सबसे बड़ा शहर बनाता है. इस शहर की जनसंख्या 2025 के अनुमान के अनुसार लगभग 8.23 लाख थी. यहां बहुमंजिला इमारते थीं. अपार्टमेंट थे, आफिस और अस्पताल थे, स्कूल, कॉलेज, बाजार, थिएटर और सुविधाएं थीं. पार्क और खुली जगहें थीं. खेती किसानी भी होती थी. कुछ कारखाने भी थे. अब ये शहर ही गायब होने वाला है. (wiki commons)

ये गाजा शहर के चहकते बाजार की चार साल पुरानी तस्वीर है. 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए. 250 से अधिक बंधक बना लिए गए. इसके बाद इजरायल ने करीब डेढ़ सालों तक गाजा पट्टी पर हवाई हमले करके इसे तबाह कर दिया.और अब तो लगता है कि इसके बाशिंदों को ये जगह स्थायी तौर पर छोड़नी पडे़गी. इसे पूरी तरह खाली करा लिया जाएगा. (courtesy Al Jazeera)

हालांकि तीन साल पहले गाजा शहर में जीवन इजरायली नाकाबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच ही गुजरता था लेकिन फिर भी गाजावासी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक उत्सवों को जीवित रखने के लिए जाने जाते थे. त्योहार और शादियाँ सामूहिक खुशी और सामुदायिक एकजुटता के महत्वपूर्ण अवसर होते थे. ईद की नमाज: ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अधा की शुरुआत सामूहिक नमाज से होती थी, जो बड़े मैदानों या स्टेडियमों में आयोजित की जाती थी.

एक समय में गाजा सिटी के किनारे का समुद्र पिकनिक मनाने, तैरने और मछली पकड़ने का लोकप्रिय स्थान था लेकिन अब वहां भी सन्नाटा और बदहाली है. छुट्टी के दिनों में खासतौर पर यहां रौनक होती थी. गाजा शहर 5,000 साल से भी ज़्यादा पुराना है और ये अपने बंदरगाह के लिए भी प्रसिद्ध रहा है. गाजा शहर की स्थिति ने इसकी अनूठी पाक परंपराओं को आकार दिया है, जिसमें तीखी मिर्च और सोआ जैसे स्वादों का मिश्रण है.

त्योहारों से पहले बाजार विशेष रूप से जीवंत हो उठते थे. यहां बाजार रात में भी लगते थे. लोग खरीदारी करते, मिठाइयां खाते और माहौल का आनंद लेते थे. 2014 में दुनिया भर के सबसे घनी आबादी वाले शहरों की सूची में गाजा शहर को 40वां स्थान मिला था. तब गाजा शहर और आसपास के इलाके की अनुमानित जनसंख्या 7,50,000 थी.

ये महिलाएं गाजा में शादियों के दौरान गाने की खास इस्लामी और फिलिस्तीनी सांस्कृतिक परंपरा पेश कर रही हैं. आमतौर पर सगाई के समय यहां महिलाएं गाती थीं. वैसे शादी यहां की सबसे ऊर्जावान रस्म होती थी. तब सभी नाचते गाते और दावत यानि वलीमा का आनंद लेते थे. 

गाजा शहर के दस मोहल्लों में से हर एक की अपनी लय और अपनी प्रतिष्ठा हुआ करती थी. इसी में एक रेमल मोहल्ला होता था, जो शहर का सबसे खूबसूरत मोहल्ला था, जहां कई शानदार दुकानें थीं. गाजा शहर के पूर्व में शेजाया मोहल्ला था, जो सीमेंट के घरों और संकरी गलियों का एक घना जाल था, वो तो अब गायब ही हो चला है, भविष्य में बिल्कुल ही गायब हो जाएगा.

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हमास के साथ अस्थायी संघर्ष विराम के बाद यहां के लोग वापस अपने घर लौट आए थे. लेकिन अब वो यहां से भाग रहे हैं, क्योंकि इजरायली फौजें शहर में घुस गई हैं. इस जगह का क्या होगा, ये किसी को नहीं मालूम. इजरायल इस जगह को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में लेना चाहता है तो अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने पहले घोषणा की थी अमेरिका इस इलाके को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है. ताकि वहां रिविएरा बना सके यानि घूमने लायक पर्यटन स्थल.

ग़ाज़ा पट्टी इजरायल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक 6-10 किंमी. चौड़ी और कोई 45 किमी लम्बा क्षेत्र है. इसमें करीब चार शहर हैं. इसी में एक शहर गाजा सिटी भी हुआ करता था, जो हमास के नियंत्रण में था. (wiki commons)

ग़ाज़ा शहर में कई प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में हजारों बच्चे थे. अब सबकुछ खत्म हो चुका है. ज़्यादातर स्कूल संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित होते थे. इनमें से अधिकांश स्कूल दोहरी शिफ़्ट में चलते थे. हालांकि यहां शिक्षा की दर काफ़ी ऊंची थी. 93 फ़ीसदी महिलाएं और 98 फ़ीसदी पुरुष साक्षर थे.

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गाजा शहर एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र रहा है, जहां पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और कशीदाकारी यानी एमब्रॉइडरी का बहुत महत्व था. यहां के पारंपरिक बाजार गुलजार रहते थे. यहां की महिलाएं प्रसिद्ध गाजा कशीदाकारी करती हैं, जो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

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गाजा शहर में कई मुस्लिम धर्मस्थल थे. इसमें कई महत्वपूर्ण मस्जिदें भी थीं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

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